नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम होंगे? हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में तेल सस्ता होने का फायदा भारतीय ग्राहकों तक पहुंचने में अभी समय लगेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर सीधे और तुरंत पेट्रोल पंपों पर दिखाई नहीं देता। इसके पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण होते हैं, जिनकी वजह से कीमतों में बदलाव धीरे-धीरे लागू होता है।
सस्ता क्रूड भारत पहुंचने में लगता है समय
मंत्री ने बताया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घटती हैं तो उस सस्ते कच्चे तेल को भारत तक पहुंचने में कई सप्ताह लग सकते हैं। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति होती है, जहां जहाजों की भारी आवाजाही रहती है।
उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां पहले से खरीदे गए महंगे क्रूड ऑयल को रिफाइन करती हैं। ऐसे में नई और सस्ती खेप का असर बाजार में दिखने में समय लगता है। इसलिए केवल वैश्विक कीमतों में गिरावट आने से तुरंत पेट्रोल-डीजल सस्ता होना संभव नहीं होता।
हालिया बढ़ोतरी का असर सिर्फ 3.94 रुपये प्रति लीटर
सुरेश गोपी ने बताया कि हाल के महीनों में ईंधन की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई, उसका सीधा असर ग्राहकों पर प्रति लीटर केवल 3.94 रुपये तक पड़ा है। उन्होंने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेना संभव नहीं है क्योंकि तेल कंपनियों को भी अपने नुकसान की भरपाई करनी होती है।
मंत्री के अनुसार फरवरी में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ा था, जिससे तेल विपणन कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा।
केंद्र सरकार ने उठाया 12,000 करोड़ रुपये का बोझ
राज्य मंत्री ने दावा किया कि ईंधन कीमतों के झटके से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ अपने ऊपर लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राजस्व पर असर झेलते हुए भी उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है।
गोपी ने यह भी कहा कि किसी भी राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले करों में कटौती कर अपना राजस्व कम नहीं किया। ऐसे में केवल केंद्र सरकार पर कीमतें घटाने का दबाव बनाना उचित नहीं है।
तेल की कीमतों में गिरावट से राहत मिलेगी, लेकिन इंतजार करना होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि इसका फैसला तेल विपणन कंपनियों की लागत, आयात मूल्य, रिफाइनिंग खर्च, टैक्स और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, लेकिन अगर कच्चे तेल में गिरावट का रुख जारी रहता है तो आगे राहत मिलने की संभावना बनी हुई है।


