नई दिल्ली: आपने अक्सर यह कहावत सुनी होगी कि “नाम में क्या रखा है”, लेकिन खाद्य उत्पादों की दुनिया में नाम ही किसी ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत और कभी-कभी सबसे बड़ी परेशानी भी बन सकता है। यही वजह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कई नामी खाद्य कंपनियों को नोटिस जारी किया है। नियामक का आरोप है कि इन कंपनियों के ब्रांड नाम, टैगलाइन और उत्पादों पर किए गए दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं।
एफएसएसएआई की इस कार्रवाई ने खाद्य उद्योग में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या किसी उत्पाद को सिर्फ उसके नाम या मार्केटिंग दावे के आधार पर “हेल्दी”, “विटामिन युक्त” या “वीगन” बताया जा सकता है। नियामक का कहना है कि यदि ऐसे दावों के पीछे वैज्ञानिक प्रमाण या आवश्यक मंजूरी नहीं है, तो यह उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ माना जाएगा।
किन कंपनियों को मिला नोटिस?
एफएसएसएआई द्वारा जारी जानकारी के अनुसार जिन कंपनियों को नोटिस भेजा गया है उनमें इमामी हेल्दी एंड टेस्टी, हेल्थ एड, ट्रूवी, द हेल्दी फैक्टरी, हेल्दी मास्टर, हेल्दी चॉइस, प्लान बी और न्यूहर्ब्स शामिल हैं।
नियामक का कहना है कि इन कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कुछ ब्रांड नाम, टैगलाइन और पैकेजिंग दावे उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा बना सकते हैं कि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं, जबकि ऐसे दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त नियामकीय आधार मौजूद नहीं है।
एफएसएसएआई के अनुसार खाद्य उत्पादों की मार्केटिंग में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए, क्योंकि उपभोक्ता अक्सर पैकेजिंग और ब्रांड नाम देखकर खरीदारी का निर्णय लेते हैं।
इमामी हेल्दी एंड टेस्टी पर क्या है आपत्ति?
कोलकाता स्थित इमामी समूह की खाद्य तेल इकाई “Emami Healthy & Tasty” पर एफएसएसएआई ने विशेष आपत्ति जताई है। नियामक का मानना है कि “Healthy & Tasty” जैसा नाम उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा बना सकता है कि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहतर या अधिक लाभकारी है।
खाद्य नियामक का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद को स्वास्थ्यवर्धक बताने के लिए निर्धारित नियमों और वैज्ञानिक मानकों का पालन आवश्यक है। केवल ब्रांड नाम के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी संदेश देना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्लान बी के ‘वीगन’ दावे पर सवाल
एफएसएसएआई ने प्लान बी ब्रांड के खिलाफ भी कार्रवाई की है। यह कंपनी अपने कुछ उत्पादों को “Plant-Based Vegan” के रूप में प्रचारित करती है।
नियामक का कहना है कि यदि किसी उत्पाद को वीगन बताया जाता है तो उसके लिए निर्धारित मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है। एफएसएसएआई के अनुसार आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना किसी उत्पाद को वीगन के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है।
हाल के वर्षों में भारत में वीगन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में नियामक इस श्रेणी के उत्पादों पर विशेष निगरानी रख रहा है ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।
‘जीरो मैदा’ वाले उत्पाद भी जांच के दायरे में
द हेल्दी फैक्टरी नामक कंपनी के कुछ उत्पाद भी नियामक के निशाने पर हैं। इनमें “Zero Maida Whole Wheat Bread” और “Zero Maida Pizza Base” जैसे उत्पाद शामिल हैं।
एफएसएसएआई का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकते हैं। यदि किसी उत्पाद में अन्य सामग्रियां भी शामिल हैं तो केवल एक विशेष दावे को प्रमुखता से दिखाकर उपभोक्ता को प्रभावित करना नियमों के खिलाफ माना जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि “जीरो”, “फ्री”, “100 प्रतिशत प्राकृतिक” जैसे शब्द उपभोक्ताओं को तेजी से आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि नियामक इन दावों की जांच को गंभीरता से ले रहा है।
‘True Vitamin’ नाम पर भी उठे सवाल
न्यूहर्ब्स की “True Vitamin” उत्पाद श्रृंखला भी एफएसएसएआई की जांच के दायरे में आ गई है।
नियामक का कहना है कि “True Vitamin” जैसा व्यापारिक नाम उसके नियमों में परिभाषित या मान्यता प्राप्त श्रेणी नहीं है। इससे उपभोक्ता यह समझ सकते हैं कि उत्पाद में विशेष स्वास्थ्य लाभ या अतिरिक्त पोषण संबंधी गुण मौजूद हैं।
एफएसएसएआई का मानना है कि खाद्य उत्पादों के नाम ऐसे होने चाहिए जो उपभोक्ता को भ्रमित न करें और उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को सही तरीके से दर्शाएं।
स्नैक फूड को ‘हेल्दी’ बताने पर आपत्ति
ट्रूवी ब्रांड के कई स्नैक उत्पादों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें “Healthy Mix Veggie Chips”, “Healthy Ragi Chips” और “Healthy Moong Dal Chips” जैसे उत्पाद शामिल हैं।
एफएसएसएआई का तर्क है कि केवल किसी एक सामग्री की मौजूदगी के आधार पर पूरे उत्पाद को “हेल्दी” बताना उचित नहीं हो सकता। यदि उत्पाद में अन्य सामग्री, तेल, नमक या एडिटिव्स भी शामिल हैं तो उपभोक्ता को संपूर्ण जानकारी मिलनी चाहिए।
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल “हेल्दी स्नैक” एक बड़ा मार्केटिंग ट्रेंड बन चुका है। कई कंपनियां स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। नियामक अब इसी प्रवृत्ति पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।
टैगलाइन और विज्ञापन दावों पर भी सख्ती
एफएसएसएआई ने केवल उत्पादों के नाम ही नहीं बल्कि टैगलाइन और विज्ञापन दावों पर भी आपत्ति जताई है।
उदाहरण के तौर पर हेल्दी मास्टर की टैगलाइन “Vision to Serve Healthy” और हेल्दी चॉइस के “Healthy Food for Healthy Life Poha” जैसे प्रचार संदेशों को भी जांच के दायरे में लाया गया है।
नियामक का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिला सकते हैं कि उत्पाद विशेष रूप से स्वास्थ्यवर्धक हैं, जबकि इसकी पुष्टि नियामकीय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह मामला?
भारत का पैकेज्ड फूड बाजार तेजी से बढ़ रहा है। शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पैक्ड स्नैक्स, हेल्थ फूड और रेडी-टू-ईट उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ऐसे माहौल में यदि कोई उपभोक्ता केवल “हेल्दी”, “विटामिन”, “नेचुरल” या “वीगन” जैसे शब्द देखकर खरीदारी करता है तो उसके भ्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है।
एफएसएसएआई की यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने और भ्रामक मार्केटिंग पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
खाद्य उद्योग पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद कई खाद्य कंपनियां अपने ब्रांड नाम, पैकेजिंग और मार्केटिंग रणनीतियों की समीक्षा कर सकती हैं।
कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पादों पर किए गए सभी दावे वैज्ञानिक तथ्यों और नियामकीय मानकों के अनुरूप हों। भविष्य में खाद्य क्षेत्र में विज्ञापन और लेबलिंग को लेकर और अधिक सख्ती देखने को मिल सकती है।
इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में पारदर्शिता को भी मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
एफएसएसएआई की ताजा कार्रवाई यह संदेश देती है कि अब केवल आकर्षक नाम या प्रभावशाली टैगलाइन के सहारे उत्पाद बेचने का दौर धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। नियामक चाहता है कि उपभोक्ताओं को उत्पादों के बारे में सटीक और तथ्यात्मक जानकारी मिले।
इमामी हेल्दी एंड टेस्टी से लेकर ट्रूवी और न्यूहर्ब्स तक कई कंपनियों को भेजे गए नोटिस इस बात का संकेत हैं कि खाद्य उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर निगरानी और सख्त होने वाली है। आने वाले समय में यह कार्रवाई पूरे उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकती है।


