Success Story of Yuvraj Dwivedi: नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करना आसान नहीं होता। हर महीने मिलने वाली तय सैलरी छोड़ने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर कारोबार नहीं चला तो क्या होगा? लखनऊ के युवराज द्विवेदी ने भी जब अपनी नौकरी छोड़कर रेस्टोरेंट बिजनेस में उतरने का फैसला किया तो उनके मन में यही सवाल बार-बार आता था कि कहीं उन्होंने गलती तो नहीं कर दी। लेकिन आज वही फैसला उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बन चुका है। इंस्टाग्राम के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बनाने वाले युवराज का कारोबार इतनी तेजी से बढ़ा कि अप्रैल 2026 में उनके रेस्टोरेंट ने एक ही दिन में ₹92,000 की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की।
भारत में हर साल हजारों युवा नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप या छोटा कारोबार शुरू करने का सपना देखते हैं। हालांकि उनमें से बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो बाजार की वास्तविक जरूरत को पहचानकर सफल बिजनेस मॉडल तैयार कर पाते हैं। युवराज द्विवेदी की कहानी इसी बात का उदाहरण है कि सही रिसर्च, स्पष्ट विजन और लगातार मेहनत किसी भी छोटे व्यवसाय को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
लखनऊ में दिखा बड़ा बिजनेस मौका
साल 2025 में युवराज को एक दोस्त के जरिए पता चला कि लखनऊ जैसे बड़े शहर में जापानी व्यंजन ‘रामेन’ पर केंद्रित कोई डेडिकेटेड रेस्टोरेंट मौजूद नहीं है। शुरुआत में यह जानकारी सामान्य लग सकती थी, लेकिन युवराज ने इसे एक संभावित बिजनेस अवसर के रूप में देखा।
उन्होंने बाजार का गहराई से अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि शहर में कई पैन-एशियन रेस्टोरेंट जरूर हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश ग्राहकों की पसंद के हिसाब से व्यंजनों में भारतीय स्वाद मिला देते हैं। परिणामस्वरूप असली जापानी भोजन का अनुभव लगभग गायब हो जाता है।
यहीं से युवराज को अपना बिजनेस आइडिया मिला। उन्होंने तय किया कि वह ऐसा रेस्टोरेंट शुरू करेंगे जहां ग्राहकों को जापानी भोजन उसके मूल और प्रामाणिक स्वरूप में परोसा जाए।
नौकरी छोड़कर लिया बड़ा जोखिम
बाजार में अवसर दिखने के बाद भी युवराज के लिए फैसला आसान नहीं था। एक स्थिर नौकरी छोड़कर ऐसे क्षेत्र में कदम रखना, जहां उनका कोई पूर्व अनुभव नहीं था, अपने आप में बड़ा जोखिम था।
फिर भी उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की। उनका मानना था कि अगर किसी बाजार में स्पष्ट गैप मौजूद है और ग्राहक उसके लिए तैयार हैं, तो सही रणनीति के साथ सफलता हासिल की जा सकती है।
नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती दिनों में उन्हें कई बार चिंता हुई। रेस्टोरेंट की तैयारी के दौरान उनके मन में बार-बार यह सवाल आता था कि कहीं उन्होंने गलत फैसला तो नहीं कर लिया। लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर देखने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
PMEGP योजना ने दिया सहारा
युवराज शुरुआत में एक मॉडर्न फूड कार्ट के जरिए कारोबार शुरू करना चाहते थे। लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि अगर ग्राहकों को प्रीमियम अनुभव देना है तो उन्हें एक बेहतर और स्थायी सेटअप की जरूरत होगी।
हालांकि, उनके पास इतनी बड़ी पूंजी नहीं थी कि वह अपने दम पर पूरा निवेश कर सकें। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना के तहत बिजनेस लोन के लिए आवेदन किया।
PMEGP भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसका उद्देश्य नए उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इसी योजना की मदद से युवराज को अपने सपने को साकार करने के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में मदद मिली।
करीब 30 से 35 लाख रुपये के कुल निवेश के साथ उन्होंने लखनऊ के विभूति खंड इलाके में लगभग 700 वर्ग फुट का स्थान लिया और अपने रेस्टोरेंट की नींव रखी।
असली जापानी स्वाद देने पर रहा पूरा फोकस
युवराज ने शुरुआत से ही तय कर लिया था कि वह अपने रेस्टोरेंट में किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे। जहां अधिकांश रेस्टोरेंट ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए चिली पनीर, मंचूरियन या अन्य इंडो-चाइनीज व्यंजन जोड़ते हैं, वहीं उन्होंने इस रास्ते से दूरी बनाए रखी।
उनका पूरा फोकस जापानी रामेन को उसके मूल स्वरूप में पेश करने पर रहा। इसके लिए रामेन के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी ‘ब्रॉथ’ को पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया कई घंटों तक चलती है और इसमें किसी प्रकार का शॉर्टकट नहीं अपनाया जाता।
रिपोर्ट के अनुसार, उनके रेस्टोरेंट में ब्रॉथ को 8 से 9 घंटे तक उबाला जाता है ताकि ग्राहकों को वास्तविक जापानी स्वाद मिल सके। यही चीज उनके बिजनेस की सबसे बड़ी यूएसपी बन गई।
अनुभव नहीं था, फिर भी खड़ा कर दिया सफल कारोबार
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में युवराज का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। उन्हें कंस्ट्रक्शन, इंटीरियर, स्टाफ भर्ती, किचन सेटअप और रोजमर्रा के संचालन जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
शुरुआती महीनों में यह काम बेहद कठिन साबित हुआ। लेकिन उन्होंने विशेषज्ञों की मदद ली और एक मजबूत टीम तैयार की।
हयात रीजेंसी से जुड़े अनुभवी लोगों की सहायता से उन्हें भान सिंह थापा के रूप में एक कुशल हेड शेफ मिला। सही टीम मिलने के बाद बिजनेस को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली।
जनवरी 2026 में शुरू हुआ रेस्टोरेंट
करीब कई महीनों की तैयारी के बाद युवराज ने 23 जनवरी 2026 को अपने रेस्टोरेंट की आधिकारिक शुरुआत की।
रेस्टोरेंट में 28 लोगों के बैठने की व्यवस्था है और लगभग 9 कर्मचारी काम करते हैं। ग्राहकों को भ्रमित होने से बचाने के लिए मेन्यू को जानबूझकर सीमित रखा गया है।
युवराज का मानना है कि कम लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले व्यंजन परोसना ज्यादा प्रभावी होता है। इससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिलता है और संचालन भी आसान रहता है।
Instagram बना सबसे बड़ा मार्केटिंग हथियार
आज के डिजिटल दौर में अधिकांश व्यवसाय विज्ञापनों पर भारी रकम खर्च करते हैं। लेकिन युवराज ने अलग रास्ता चुना।
उन्होंने किसी भी प्रकार के पेड विज्ञापन का उपयोग नहीं किया। इसके बजाय अपनी एक दोस्त के साथ मिलकर इंस्टाग्राम रील्स बनानी शुरू कीं।
इन वीडियो में उन्होंने रेस्टोरेंट के पीछे की कहानी, रोजाना की गतिविधियां, खाना बनाने की प्रक्रिया और अपनी उद्यमिता यात्रा को ईमानदारी से साझा किया।
इस रणनीति का असर यह हुआ कि लोगों ने उनके कंटेंट से जुड़ाव महसूस किया। धीरे-धीरे इंस्टाग्राम पर उनकी ऑर्गेनिक पहुंच बढ़ती गई और बड़ी संख्या में ग्राहक रेस्टोरेंट तक पहुंचने लगे।
डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आज के समय में ऑर्गेनिक कंटेंट ब्रांड पर भरोसा बनाने का सबसे प्रभावी तरीका बनता जा रहा है। युवराज की सफलता इस बात का प्रमाण है।
एक दिन में हुई ₹92,000 की रिकॉर्ड बिक्री
रेस्टोरेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। इसका असर बिक्री पर भी दिखाई देने लगा।
वर्तमान में उनके रेस्टोरेंट का औसत ऑर्डर मूल्य (Average Order Value-AOV) लगभग ₹1,200 है। हालांकि प्रीमियम सामग्री इस्तेमाल होने के कारण लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा सीधे फूड कॉस्ट में चला जाता है।
इसके बावजूद ग्राहकों की बढ़ती संख्या ने कारोबार को मजबूत बना दिया है। अप्रैल 2026 में उनके रेस्टोरेंट ने एक ही दिन में ₹92,000 की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जो किसी नए स्वतंत्र रेस्टोरेंट के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
युवाओं के लिए क्या सीख है?
युवराज द्विवेदी की कहानी कई महत्वपूर्ण सबक देती है। पहला, किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले बाजार में मौजूद गैप को समझना जरूरी है। दूसरा, सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके कारोबार शुरू किया जा सकता है। तीसरा, आज के समय में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि एक शक्तिशाली बिजनेस टूल भी है।
युवराज का अगला लक्ष्य बिना किसी शॉर्टकट, मिलावट या फ्यूजन के शुद्ध एशियन फूड कल्चर को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि गुणवत्ता और पारदर्शिता पर टिके रहने से लंबे समय में मजबूत ब्रांड बनाया जा सकता है।
उनकी यह सफलता दिखाती है कि अगर विचार स्पष्ट हो, रिसर्च मजबूत हो और मेहनत लगातार की जाए तो नौकरी छोड़कर भी एक सफल और टिकाऊ कारोबार खड़ा किया जा सकता है।


