नई दिल्ली। लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शानदार वापसी देखने को मिली। घरेलू और वैश्विक स्तर पर कुछ राहत भरे संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा लौटा और बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबारी सत्र समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत मजबूत होकर 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया।
Highlights
- सेंसेक्स 394.50 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ
- निफ्टी 119.10 अंक की बढ़त के साथ 23,242.10 पर पहुंचा
- बैंकिंग, रियल्टी और पीएसयू बैंक शेयरों में जोरदार खरीदारी
- ईरान-इजराइल तनाव में कमी और कच्चे तेल की नरमी से मिला समर्थन
- FII बिकवाली और अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर
बाजार में तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने किया। पिछले कुछ दिनों से वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में रहने वाला बाजार मंगलवार को राहत की सांस लेता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजराइल तनाव में फिलहाल आई नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों की चिंता कुछ हद तक कम की है।
बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने बाजार को दी मजबूती
मंगलवार के कारोबारी सत्र में बैंकिंग सेक्टर बाजार का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। निफ्टी बैंक इंडेक्स 2.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में कमी, बेहतर क्रेडिट ग्रोथ और मजबूत लाभप्रदता ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। यही वजह है कि बाजार में कमजोरी आने पर भी निवेशक बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।
पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3.6 प्रतिशत की तेज उछाल दर्ज की गई, जो पूरे बाजार में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टरों में शामिल रहा।
किन सेक्टरों में रही सबसे ज्यादा तेजी?
आईटी और मीडिया सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा बढ़त वाले सेक्टरों में शामिल रहे:
- पीएसयू बैंक
- निफ्टी बैंक
- प्राइवेट बैंक
- रियल्टी
- फाइनेंशियल सर्विसेज
- ऑटो
- एफएमसीजी
- डिफेंस
- मैन्युफैक्चरिंग
रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। वहीं एफएमसीजी कंपनियों में सुरक्षित निवेश की धारणा के चलते मांग बनी रही।
दूसरी ओर निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितता का असर आईटी शेयरों पर देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी लौटी तेजी
सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 809.80 अंक यानी 1.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,715.45 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 300.15 अंक यानी 1.69 प्रतिशत बढ़कर 18,063.60 के स्तर पर पहुंच गया।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान एक बार फिर बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञ अभी भी चयनात्मक निवेश की सलाह दे रहे हैं क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
ईरान-इजराइल तनाव में नरमी से मिला बाजार को सहारा
पिछले कुछ सप्ताहों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर देखा जा रहा था। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया था, जिससे भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता बढ़ गई थी।
हालांकि हालिया घटनाक्रमों के बाद तनाव में कुछ ठहराव देखने को मिला है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है। इससे भारतीय बाजार को सकारात्मक संकेत मिले हैं।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में कमी से देश का आयात बिल घट सकता है, महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और कॉर्पोरेट मुनाफे को भी समर्थन मिल सकता है।
FII की बिकवाली अभी भी बनी हुई है चिंता
बाजार में आई तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है।
विदेशी निवेशक पिछले कुछ समय से भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की रणनीति को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि FII की बिकवाली लंबे समय तक जारी रहती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा दे रहे हैं।
बाजार की बढ़त पर क्या बोले एक्सपर्ट?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर के अनुसार हालिया गिरावट के बाद बाजार में तकनीकी रिकवरी देखने को मिल रही है।
उनके मुताबिक ईरान-इजराइल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार को समर्थन दिया है। हालांकि FII निकासी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी अभी भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों पर होगी, क्योंकि यही आंकड़े फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिकी महंगाई आंकड़े क्यों हैं अहम?
इस समय वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों पर टिकी हुई है। यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक रहती है तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।
उच्च ब्याज दरों का असर वैश्विक निवेश प्रवाह पर पड़ता है। इससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है। भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा।
यही कारण है कि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े इस समय भारतीय निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गए हैं।
आज के टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, आइशर मोटर्स, एसबीआई और अपोलो हॉस्पिटल्स शामिल रहे।
सेंसेक्स में इंडिगो, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एमएंडएम, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख गेनर्स रहे।
वहीं टाइटन, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, इन्फोसिस, एचसीएल टेक और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे शेयर दबाव में रहे।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। निवेशक फिलहाल अमेरिकी महंगाई आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की नीति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे।
यदि वैश्विक स्तर पर हालात स्थिर रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आती है, तो भारतीय बाजार में आगे भी खरीदारी देखने को मिल सकती है। हालांकि किसी भी नकारात्मक वैश्विक संकेत से अस्थिरता बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।
निष्कर्ष
दो दिनों की तेज गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में आई यह वापसी निवेशकों के लिए राहत भरी रही। बैंकिंग, वित्तीय और रियल्टी शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।


