नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में पिछले दो वर्षों से जारी जबरदस्त तेजी के बीच अब बाजार में एक नया डर उभरता दिखाई दे रहा है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में शुक्रवार को आई भारी बिकवाली ने निवेशकों को झकझोर दिया। अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों से लेकर बॉन्ड, सोना और बिटकॉइन तक लगभग हर एसेट क्लास दबाव में दिखाई दिया। सबसे बड़ा झटका उन कंपनियों को लगा जो पिछले कुछ समय से AI क्रांति की सबसे बड़ी लाभार्थी मानी जा रही थीं।
अमेरिकी शेयर बाजार के टेक्नोलॉजी केंद्र नैस्डैक में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने केवल एक कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति से 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यूएशन मिटा दी। कई विश्लेषकों ने इसे सामान्य करेक्शन बताया है, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह AI शेयरों में बने अत्यधिक उत्साह के टूटने की शुरुआत हो सकती है।
क्यों आई अचानक इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार में घबराहट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़े रहे। अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी रोजगार डेटा उम्मीद से बेहतर रहा, जिससे यह संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है।
पहली नजर में यह सकारात्मक खबर लग सकती है, लेकिन शेयर बाजार के लिए इसका दूसरा अर्थ भी है। मजबूत अर्थव्यवस्था का मतलब है कि महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या जरूरत पड़ने पर फिर से सख्ती कर सकता है।
उच्च ब्याज दरें आमतौर पर टेक्नोलॉजी और ग्रोथ कंपनियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि इन कंपनियों की भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य कम हो जाता है। यही कारण है कि रोजगार आंकड़ों के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर टेक शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
AI कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव
बाजार की इस गिरावट का सबसे बड़ा असर सेमीकंडक्टर और AI कंपनियों पर दिखाई दिया। AI मॉडल चलाने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है, जिसके कारण चिप कंपनियों के शेयरों में पिछले दो वर्षों के दौरान जबरदस्त तेजी आई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार PHLX Semiconductor Index से एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यूएशन कम हो गई। ब्रॉडकॉम, कई चिप निर्माता और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
दरअसल पिछले कुछ वर्षों में AI को लेकर निवेशकों में जिस प्रकार का उत्साह देखने को मिला था, उसने कई कंपनियों के वैल्यूएशन को ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। अब निवेशक यह सवाल पूछने लगे हैं कि क्या कंपनियों की वास्तविक कमाई इतनी तेजी से बढ़ पाएगी जितनी तेजी से उनके शेयरों की कीमतें बढ़ी हैं।
रे डेलियो ने क्यों दी ‘AI बबल’ की चेतावनी?
दुनिया के सबसे बड़े हेज फंडों में से एक ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक Ray Dalio ने AI सेक्टर में बने माहौल को लेकर चेतावनी दी है। उनका मानना है कि बाजार में कुछ हिस्सों में क्लासिक बबल जैसी स्थिति दिखाई दे रही है।
रे डेलियो के अनुसार जब किसी नई तकनीक को लेकर अत्यधिक उत्साह पैदा होता है, तब कई निवेशक बिना जोखिम समझे निवेश करना शुरू कर देते हैं। इतिहास में इंटरनेट बूम, डॉट-कॉम बबल और कई अन्य उदाहरण इसी तरह के रहे हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि AI तकनीक भविष्य को बदलने की क्षमता रखती है। उनका मुख्य सवाल कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर नहीं बल्कि उनके मौजूदा वैल्यूएशन पर है।
क्या यह डॉट-कॉम बबल जैसा संकट है?
कई निवेशक 1999-2000 के डॉट-कॉम बबल से तुलना कर रहे हैं। उस दौर में इंटरनेट कंपनियों के शेयर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे, लेकिन बाद में बाजार में भारी गिरावट आई थी।
फिर भी कई विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह वैसी नहीं है। आज की AI कंपनियों के पास वास्तविक ग्राहक, मजबूत राजस्व और विशाल नकदी भंडार मौजूद हैं। उदाहरण के लिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का वास्तविक निवेश किया जा रहा है।
यही कारण है कि कुछ विशेषज्ञ इस गिरावट को बबल फूटने की शुरुआत नहीं बल्कि अत्यधिक तेजी के बाद सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।
गोल्डमैन सैक्स का नजरिया अलग
जहां कुछ विशेषज्ञ जोखिम की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं कई बड़े निवेश बैंक अभी भी AI सेक्टर को लेकर सकारात्मक हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स जैसे संस्थानों का मानना है कि AI से जुड़ी कई कंपनियों की लंबी अवधि की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। उनके अनुसार मौजूदा गिरावट उन निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है जो लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं।
विशेष रूप से AI डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस चिप्स से जुड़ी कंपनियों में भविष्य की मांग मजबूत रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
बाजार के सामने कौन-कौन सी नई चुनौतियां हैं?
आने वाले सप्ताह निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। सबसे पहले अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़े जारी होंगे। यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा AI सेक्टर से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के संभावित आईपीओ पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। बाजार में पहले से चर्चा है कि AI और टेक्नोलॉजी सेक्टर की कई बड़ी निजी कंपनियां भविष्य में पूंजी जुटाने की तैयारी कर सकती हैं।
जब बड़ी संख्या में नए शेयर बाजार में आते हैं तो निवेशकों की पूंजी बंट जाती है, जिससे मौजूदा शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय निवेशकों पर क्या असर पड़ सकता है?
भारतीय शेयर बाजार सीधे तौर पर अमेरिकी टेक कंपनियों में निवेश नहीं करता, लेकिन वैश्विक जोखिम भावना का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई देता है।
यदि अमेरिका में बिकवाली का दौर लंबा चलता है तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) उभरते बाजारों से भी पैसा निकाल सकते हैं। इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों, टेक्नोलॉजी शेयरों और व्यापक बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत बनी हुई है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल AI शब्द देखकर किसी शेयर में निवेश करने से बचना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की कमाई, नकदी प्रवाह, कर्ज और वास्तविक बिजनेस मॉडल का मूल्यांकन करना चाहिए।
इतिहास बताता है कि नई तकनीकें लंबे समय में अर्थव्यवस्था को बदल देती हैं, लेकिन हर कंपनी उस बदलाव की विजेता नहीं बनती। इसलिए निवेशकों को उत्साह और डर दोनों से बचते हुए संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए।
फिलहाल बाजार की नजर महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की अगली नीति और AI सेक्टर की कमाई पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय कर सकते हैं कि यह केवल एक अस्थायी करेक्शन है या फिर AI शेयरों में लंबे समय की कमजोरी की शुरुआत।


