नई दिल्ली: दुनिया भर के देश विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अपने पर्यटन प्रचार और डिजिटल मार्केटिंग पर अरबों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इसके उलट रास्ता अपनाया। नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत का मानना है कि विदेशों में भारत के पर्यटन प्रचार बजट में भारी कटौती का सीधा असर विदेशी पर्यटकों की संख्या पर पड़ा है। उनका कहना है कि इस फैसले से भारत को न केवल अरबों डॉलर के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि लाखों रोजगार अवसर भी प्रभावित हुए हैं।
अमिताभ कांत ने इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में पर्यटन ऐसा क्षेत्र है जो सबसे तेज गति से विदेशी मुद्रा ला सकता है और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकता है। इसके बावजूद भारत ने विदेशी पर्यटन मार्केटिंग को प्राथमिकता नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि कोरोना महामारी के बाद जब दुनिया के कई देशों ने पर्यटन क्षेत्र में रिकॉर्ड रिकवरी दर्ज की, तब भारत अभी भी महामारी-पूर्व स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया।
भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी भी महामारी से पहले के स्तर से नीचे है। वर्ष 2024 में देश में लगभग 99 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे, जबकि वर्ष 2019 में यह संख्या इससे लगभग 10 प्रतिशत अधिक थी। दूसरी ओर, थाईलैंड, मलेशिया, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों ने अपने पर्यटन प्रचार अभियान को मजबूत बनाकर विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
विदेशी पर्यटक क्यों हैं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण?
अमिताभ कांत के अनुसार एक विदेशी पर्यटक भारत की अर्थव्यवस्था में औसतन 3,000 डॉलर यानी करीब 2.87 लाख रुपये का योगदान देता है। इसके मुकाबले एक घरेलू पर्यटक का आर्थिक योगदान केवल 75 डॉलर यानी लगभग 7,000 रुपये के आसपास होता है। यही कारण है कि विदेशी पर्यटकों की संख्या में छोटी सी वृद्धि भी देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
उन्होंने अनुमान लगाया कि यदि भारत विदेशी पर्यटन मार्केटिंग पर 200 मिलियन डॉलर का निवेश करे तो लगभग 10 लाख अतिरिक्त विदेशी पर्यटक आकर्षित किए जा सकते हैं। इससे करीब 3.6 अरब डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि पैदा होगी। साथ ही सरकार को लगभग 400 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त जीएसटी संग्रह भी प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा लगभग 2.83 लाख नए रोजगार अवसर बनने की संभावना है।
कांत के मुताबिक यह निवेश किसी खर्च की तरह नहीं बल्कि एक लाभदायक आर्थिक निवेश की तरह देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार पर्यटन प्रचार पर खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर के बदले लगभग 18 डॉलर का आर्थिक रिटर्न मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि केवल 55,000 अतिरिक्त विदेशी पर्यटक भी भारत आते हैं तो प्रचार पर किया गया पूरा खर्च वसूल हो सकता है।
उन्होंने याद दिलाया कि ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ अभियान के शुरुआती वर्षों में भारत ने वैश्विक पर्यटन बाजार में मजबूत पहचान बनाई थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए गए प्रचार अभियानों का सकारात्मक असर विदेशी पर्यटकों की संख्या में देखने को मिला था।
दुनिया के कई देशों ने पर्यटन मार्केटिंग को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया है। अमिताभ कांत ने अपने लेख में कुछ देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे पर्यटन प्रचार में निवेश करने से उनके राजस्व और पर्यटकों दोनों में तेजी आई।
मलेशिया ने वित्त वर्ष 2024 में पर्यटन मार्केटिंग पर लगभग 7 करोड़ डॉलर खर्च किए। इसके परिणामस्वरूप विदेशी पर्यटकों की संख्या 31 प्रतिशत बढ़कर 2.73 करोड़ तक पहुंच गई। इसके साथ ही देश का पर्यटन राजस्व 37.5 प्रतिशत बढ़कर 22 अरब डॉलर हो गया।
थाईलैंड ने पर्यटन प्रचार पर लगभग 12 करोड़ डॉलर खर्च किए। इसका असर यह हुआ कि वहां विदेशी पर्यटकों की संख्या 26 प्रतिशत बढ़कर 3.55 करोड़ हो गई। देश को पर्यटन क्षेत्र से मिलने वाला राजस्व भी 34 प्रतिशत बढ़कर 48 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ब्राजील ने भी लगभग 9 करोड़ डॉलर के प्रचार निवेश के बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या में 22 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। वहीं सऊदी अरब ने पर्यटन क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर करोड़ों नए विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया। कांत के अनुसार सऊदी अरब को पर्यटन क्षेत्र से लगभग 41 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ।
अमेरिका का उदाहरण भी उल्लेखनीय है। वहां ‘ब्रांड यूएसए’ अभियान के तहत लगभग 24 करोड़ डॉलर खर्च किए गए, जिसमें 90 प्रतिशत राशि डिजिटल माध्यमों पर लगाई गई। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार पर्यटन प्रचार पर खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर के बदले लगभग 25 डॉलर का आर्थिक लाभ मिला।
अमिताभ कांत का मानना है कि आज का वैश्विक पर्यटन उद्योग पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स अब किसी भी देश की पर्यटन रणनीति के केंद्र में हैं। लेकिन भारत इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देता है।
उन्होंने बताया कि ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ के फेसबुक पेज पर लगभग 19 लाख और इंस्टाग्राम पर करीब 7.85 लाख फॉलोअर्स हैं, लेकिन इनके मुकाबले डिजिटल एंगेजमेंट बेहद कम है। उदाहरण के तौर पर समान फॉलोअर संख्या वाले सऊदी अरब के पर्यटन अभियान को एक महीने में लगभग 2.7 करोड़ व्यूज मिलते हैं, जबकि भारत को केवल 3.88 लाख व्यूज ही प्राप्त होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास हिमालय से लेकर समुद्री तटों तक, आध्यात्मिक पर्यटन से लेकर एडवेंचर टूरिज्म तक, दुनिया के सबसे विविध पर्यटन उत्पाद मौजूद हैं। बावजूद इसके, इनका वैश्विक स्तर पर पर्याप्त प्रचार नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि भारत अपनी वास्तविक क्षमता के मुकाबले कम विदेशी पर्यटक आकर्षित कर रहा है।
अमिताभ कांत ने सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग से जुड़े होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में कई तरह के लाइसेंस और बार-बार होने वाले निरीक्षण निवेशकों और कारोबारियों के लिए परेशानी पैदा करते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि ‘यूनिफाइड लाइसेंस सिस्टम’ और ऑटोमैटिक रिन्यूअल जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे कारोबार करना आसान हो सके। इसके अलावा उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी भारत की पर्यटन रणनीति का अहम हिस्सा बनाने की वकालत की। उनके अनुसार किसी लोकप्रिय ट्रैवलर द्वारा साझा किया गया अनुभव आज के दौर में किसी सरकारी विज्ञापन से अधिक प्रभावशाली साबित हो सकता है।
पर्यटन क्षेत्र लंबे समय से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे समय में जब सरकार विनिर्माण, निर्यात और विदेशी निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है, पर्यटन क्षेत्र अपेक्षाकृत कम निवेश में अधिक रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जित करने की क्षमता रखता है। अमिताभ कांत का मानना है कि यदि भारत वैश्विक पर्यटन मार्केटिंग पर दोबारा ध्यान देता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करता है, तो आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या और पर्यटन राजस्व दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।


