Petrol-Diesel Export Duty Cut: सरकार ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती कर दी है। नई व्यवस्था 1 जून से लागू होगी और अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेगी।
Highlights
- सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स घटाया
- नई दरें 1 जून से अगले 15 दिनों के लिए लागू होंगी
- रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों को मिल सकता है फायदा
- कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के बाद लिया गया फैसला
- आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं
सरकार हर पंद्रह दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के आधार पर इस टैक्स का पुनर्मूल्यांकन करती है। इस बार कीमतों में नरमी और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए निर्यात शुल्क में कमी का फैसला लिया गया है। हालांकि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को तत्काल पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में लागू एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नई दरें क्या होंगी?
सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर यह शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ यानी विमान ईंधन पर लागू शुल्क में सबसे बड़ी कटौती की गई है। इसे 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस बदलाव से निर्यात करने वाली कंपनियों की लागत कम होगी और उनके मुनाफे में सुधार देखने को मिल सकता है।
आखिर क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स एक ऐसा अतिरिक्त कर होता है जिसे सरकार तब लागू करती है जब किसी कंपनी को वैश्विक परिस्थितियों के कारण असामान्य या अप्रत्याशित लाभ (Windfall Profit) मिलने लगता है। भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में यह टैक्स लागू किया था। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल थी और तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही थीं। सरकार का उद्देश्य था कि तेल कंपनियों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा सरकारी राजस्व के रूप में प्राप्त हो और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
किन कंपनियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
विंडफॉल टैक्स में कटौती का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को मिलेगा जो बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम रिलायंस इंडस्ट्रीज का है। गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस की रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग परिसंपत्तियों में शामिल है। रिलायंस बड़ी मात्रा में डीजल, पेट्रोल और एटीएफ का निर्यात करती है। कंपनी की जामनगर स्थित दो रिफाइनरियों में हर साल लगभग 50 लाख टन एटीएफ का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग एक-चौथाई माना जाता है। इसके अलावा सरकारी क्षेत्र की कंपनियां ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को भी इस फैसले का लाभ मिल सकता है। निर्यात शुल्क घटने से इन कंपनियों की आय और लाभप्रदता में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।
क्या आम लोगों को मिलेगा फायदा?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि क्या विंडफॉल टैक्स घटने से पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है। सरकार ने केवल निर्यात शुल्क में बदलाव किया है। घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसलिए पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि यदि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट बनी रहती है और रिफाइनिंग लागत कम होती है, तो सरकार कीमतों की समीक्षा कर सकती है। लेकिन अभी ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय ऑयल बास्केट की कीमत शुक्रवार को 97.52 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई, जो मार्च के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंची। वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 91.12 डॉलर प्रति बैरल रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग में नरमी, कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक सुस्ती की आशंका और अतिरिक्त आपूर्ति के संकेतों ने तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है। पिछले एक सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
एयरलाइन कंपनियों को भी मिल सकती है राहत
एटीएफ पर निर्यात शुल्क में बड़ी कटौती का सकारात्मक असर विमानन उद्योग पर भी पड़ सकता है। भारत में एयरलाइन कंपनियों की कुल परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा विमान ईंधन पर खर्च होता है। यदि एटीएफ की उपलब्धता और आपूर्ति बेहतर होती है तो एयरलाइंस को लागत प्रबंधन में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका सीधा असर हवाई किराए पर पड़ेगा या नहीं, यह आने वाले समय में वैश्विक तेल कीमतों और एयरलाइन कंपनियों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा?
सरकार हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। इसलिए अगले पखवाड़े में फिर से नई दरों की घोषणा की जा सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमतें और नीचे आती हैं तो निर्यात शुल्क में और कमी संभव है। दूसरी ओर यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है और तेल महंगा होता है तो सरकार फिर से टैक्स बढ़ाने का फैसला भी कर सकती है। फिलहाल इतना तय है कि सरकार का यह कदम तेल निर्यातक कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है, जबकि आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
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