नई दिल्ली: घर केवल ईंट-पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं होता, बल्कि यह किसी परिवार की वर्षों की मेहनत, बचत और सपनों का परिणाम होता है। अधिकांश भारतीय परिवार अपनी जीवनभर की कमाई घर बनाने में लगा देते हैं। ऐसे में यदि किसी दुर्घटना, आग, प्राकृतिक आपदा या चोरी की घटना से घर को भारी नुकसान पहुंच जाए, तो परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का बड़ा झटका लग सकता है।
Highlights
- शॉर्ट सर्किट और बिजली संबंधी खराबी से लगती हैं अधिकांश घरेलू आग।
- होम इंश्योरेंस आग, चोरी, बाढ़, तूफान और अन्य जोखिमों से देता है सुरक्षा।
- घर के साथ फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कीमती सामान भी हो सकते हैं कवर।
- मामूली प्रीमियम में लाखों रुपये की संपत्ति को मिलती है आर्थिक सुरक्षा।
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान, पुराने विद्युत उपकरणों, ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट की वजह से घरों में आग लगने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे समय में होम इंश्योरेंस केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बन गया है।
क्यों बढ़ रही है होम इंश्योरेंस की जरूरत?
भारत में रियल एस्टेट की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। बड़े शहरों में एक सामान्य फ्लैट की कीमत भी लाखों से करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा घरों में रखे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फर्नीचर, आभूषण और अन्य कीमती सामान का मूल्य भी लगातार बढ़ रहा है। बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश लोग अपने स्वास्थ्य और वाहन का बीमा तो करवाते हैं, लेकिन घर जैसी सबसे बड़ी संपत्ति को अक्सर बिना सुरक्षा के छोड़ देते हैं। किसी बड़े हादसे के बाद घर को दोबारा बनवाने या उसकी मरम्मत करने का खर्च कई परिवारों की वित्तीय स्थिति को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।
आग की एक घटना कैसे बदल सकती है पूरी जिंदगी?
दिल्ली अग्निशमन सेवा और विभिन्न राज्य अग्निशमन विभागों की रिपोर्टों में कई बार यह सामने आया है कि घरेलू आग लगने की बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग और बिजली उपकरणों में खराबी होती है। कल्पना कीजिए कि किसी परिवार का 60 लाख रुपये मूल्य का मकान और लगभग 10 लाख रुपये का घरेलू सामान आग में नष्ट हो जाए। यदि उस परिवार के पास होम इंश्योरेंस नहीं है तो पूरा नुकसान स्वयं वहन करना पड़ेगा। वहीं उचित बीमा कवरेज होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार मरम्मत, पुनर्निर्माण और सामान की क्षति की भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जा सकती है। यही कारण है कि वित्तीय योजनाकार अब होम इंश्योरेंस को परिवार की फाइनेंशियल प्लानिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
होम इंश्योरेंस वास्तव में क्या कवर करता है?
बहुत से लोगों को लगता है कि होम इंश्योरेंस केवल मकान की दीवारों और छत तक सीमित होता है। जबकि वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है। सामान्य होम इंश्योरेंस पॉलिसियां निम्नलिखित जोखिमों को कवर कर सकती हैं: आग लगना, बिजली गिरना, विस्फोट, तूफान और चक्रवात, बाढ़ और जलभराव, भूकंप (विशेष कवरेज के साथ), चोरी और सेंधमारी, दंगे और दुर्भावनापूर्ण क्षति, पाइपलाइन फटना या पानी से नुकसान. इसके अलावा कई बीमा कंपनियां घर के अंदर मौजूद फर्नीचर, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, टीवी, लैपटॉप, घरेलू उपकरण, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के लिए भी अलग से कवरेज प्रदान करती हैं।
सिर्फ मकान नहीं, घर के अंदर का सामान भी सुरक्षित
अक्सर लोग अपने घर की कीमत का अनुमान लगाते समय केवल भवन की लागत को देखते हैं, जबकि घर के अंदर मौजूद सामान का मूल्य भी लाखों रुपये तक हो सकता है। उदाहरण के तौर पर एक मध्यमवर्गीय परिवार के घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, मॉड्यूलर किचन, इन्वर्टर, एयर कंडीशनर और अन्य घरेलू सामान का कुल मूल्य आसानी से 10 से 20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में केवल भवन का बीमा पर्याप्त नहीं होता। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पॉलिसी लेते समय घर की संरचना और घरेलू सामान दोनों का उचित मूल्यांकन कराना चाहिए।
होम इंश्योरेंस खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
बीमा विशेषज्ञों के अनुसार पॉलिसी खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले घर की पुनर्निर्माण लागत का सही आकलन करें। कई लोग बाजार मूल्य के आधार पर बीमा करवाते हैं, जबकि वास्तविक आवश्यकता पुनर्निर्माण लागत के अनुसार कवरेज चुनने की होती है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि घर में मौजूद महंगी वस्तुओं की सूची तैयार की जाए। यदि आपके पास महंगे आभूषण, कलाकृतियां या हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स हैं तो उनके लिए अतिरिक्त कवरेज की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा पॉलिसी की शर्तों, एक्सक्लूजन और क्लेम प्रक्रिया को भी अच्छी तरह समझना चाहिए।
कितना आता है प्रीमियम?
होम इंश्योरेंस का सबसे बड़ा फायदा इसकी किफायती लागत है। कई बीमा कंपनियां अपेक्षाकृत कम प्रीमियम में लाखों रुपये का कवरेज उपलब्ध कराती हैं। प्रीमियम की राशि कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें शामिल हैं: घर का स्थान, निर्माण प्रकार, भवन की उम्र, कवरेज राशि, शामिल जोखिम, अतिरिक्त सुविधाएं. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में होम इंश्योरेंस की वार्षिक लागत घर की कुल कीमत की तुलना में बेहद कम होती है, जबकि इससे मिलने वाली सुरक्षा बहुत बड़ी होती है।
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ वर्षों में देश में बाढ़, भारी बारिश, चक्रवात और अत्यधिक गर्मी जैसी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है। ऐसे माहौल में केवल आग ही नहीं बल्कि बाढ़, तूफान और अन्य प्राकृतिक जोखिमों से भी घरों को खतरा बढ़ गया है। यही वजह है कि बीमा उद्योग में होम इंश्योरेंस को भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता माना जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
बीमा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे स्वास्थ्य बीमा और वाहन बीमा आज जरूरत बन चुके हैं, उसी तरह होम इंश्योरेंस भी हर मकान मालिक की प्राथमिकता होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार लोग अक्सर तब तक बीमा की आवश्यकता को नहीं समझते जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हो जाती। लेकिन वित्तीय दृष्टि से समझदारी इसी में है कि जोखिम आने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित कर ली जाए।
निष्कर्ष
घर किसी भी परिवार की सबसे बड़ी पूंजी होती है। आग, चोरी, प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य अप्रत्याशित घटना के कारण होने वाला नुकसान वर्षों की मेहनत और बचत को एक झटके में खत्म कर सकता है। ऐसे में होम इंश्योरेंस केवल एक वैकल्पिक वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुका है। बढ़ती संपत्ति कीमतों, जलवायु संबंधी जोखिमों और आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए हर मकान मालिक को अपनी संपत्ति का उचित मूल्यांकन कर एक मजबूत होम इंश्योरेंस कवरेज चुनने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। एक छोटा सा वार्षिक प्रीमियम भविष्य में लाखों रुपये के नुकसान से बचाने का काम कर सकता है।
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