नई दिल्ली। देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच अब सीएनजी (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम और पीएनजी की कीमतों में 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की घोषणा की है। नई दरें शनिवार से लागू हो गई हैं।
इस बढ़ोतरी के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सीएनजी की खुदरा कीमत बढ़कर ₹86 प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं, पीएनजी उपयोग करने वाले लाखों घरेलू उपभोक्ताओं को भी अधिक बिल चुकाना पड़ेगा। यह मई 2026 के दौरान दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 14 मई को भी कंपनी ने सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो का इजाफा किया था। लगातार दो बार हुई वृद्धि ने वाहन चालकों और घरेलू गैस उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ रहे हैं CNG और PNG के दाम?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब वैश्विक बाजार में गैस महंगी होती है या सप्लाई प्रभावित होती है तो गैस वितरण कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। यही अतिरिक्त लागत अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में एलएनजी (LNG) की वैश्विक कीमतों में तेजी आई है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत बढ़ा दी है। घरेलू गैस आवंटन में बदलाव का असर भी गैस कंपनियों पर पड़ा है। इन्हीं कारणों से MGL जैसी कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
मुंबई में अब कितनी हुई CNG की कीमत?
नई वृद्धि के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र में सीएनजी की कीमत:
| विवरण | कीमत |
|---|---|
| पुरानी कीमत | ₹84 प्रति किलो |
| बढ़ोतरी | ₹2 प्रति किलो |
| नई कीमत | ₹86 प्रति किलो |
यह दर मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और MGL के अन्य सेवा क्षेत्रों में लागू होगी।
PNG उपभोक्ताओं को भी झटका
सिर्फ वाहन चालकों पर ही असर नहीं पड़ा है। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपयोग करने वाले परिवारों के लिए भी गैस महंगी हो गई है। कंपनी ने PNG की कीमतों में 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की है। इसका सीधा असर उन घरों पर पड़ेगा जो खाना पकाने के लिए पाइप्ड गैस का उपयोग करते हैं। हालांकि प्रति यूनिट वृद्धि छोटी लग सकती है, लेकिन लाखों परिवारों के मासिक गैस बिल में इसका असर दिखाई देगा।
आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
यदि कोई कार मालिक हर महीने लगभग 40 से 50 किलोग्राम सीएनजी का उपयोग करता है, तो ₹2 प्रति किलो वृद्धि 50 किलो मासिक खपत अतिरिक्त खर्च लगभग ₹100 प्रति माह. वहीं टैक्सी, ऑटो और व्यावसायिक वाहन संचालकों पर इसका प्रभाव कहीं अधिक होगा क्योंकि उनकी खपत सामान्य वाहन चालकों की तुलना में कई गुना ज्यादा होती है।
ऑटो और टैक्सी किराए पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है तो ऑटो रिक्शा किराए बढ़ सकते हैं। टैक्सी सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। लॉजिस्टिक्स कंपनियों का खर्च बढ़ेगा। सामान ढुलाई महंगी हो सकती है। इसका असर अंततः रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल और डीजल पहले से महंगे
सीएनजी की कीमतों में वृद्धि ऐसे समय पर हुई है जब पेट्रोल और डीजल भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। मुंबई में शनिवार को:
| ईंधन | कीमत |
|---|---|
| पेट्रोल | ₹111.21 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹97.83 प्रति लीटर |
ऊर्जा बाजार में जारी दबाव के कारण आने वाले समय में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
सरकार ने तेल कंपनियों को क्या निर्देश दिए हैं?
केंद्र सरकार ने संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पर्याप्त एलपीजी भंडार बनाए रखने का निर्देश दिया है। सरकार ने कहा है कि कम से कम 30 दिनों की मांग के बराबर एलपीजी स्टॉक रखा जाए। घरेलू उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार निगरानी रखी जाए। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए काफी वित्तीय दबाव झेल रही हैं।
आगे क्या और महंगी हो सकती है गैस?
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में सब कुछ अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा। यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, कच्चे तेल और एलएनजी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, रुपया कमजोर होता है, तो गैस वितरण कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में आगे भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
सीएनजी में ₹2 प्रति किलो और पीएनजी में 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी ने लाखों उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित करने की आशंका बढ़ा दी है। यह सिर्फ गैस बिल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन लागत, ऑटो-टैक्सी किराए और रोजमर्रा के खर्चों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता को देखते हुए आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
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