नई दिल्ली। महंगाई का असर अब केवल पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और दूध तक सीमित नहीं रहा है। रोज सुबह इस्तेमाल होने वाला टूथपेस्ट भी अब महंगा हो गया है। देश की प्रमुख ओरल केयर कंपनी कोलगेट-पामोलिव इंडिया ने अपने कई लोकप्रिय टूथपेस्ट ब्रांड्स की कीमतों में 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। कंपनी ने इसके पीछे कच्चे माल, पैकेजिंग सामग्री और लॉजिस्टिक्स लागत में लगातार हो रही वृद्धि को जिम्मेदार बताया है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब देश में पहले से ही खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने के कारण उपभोक्ताओं का घरेलू बजट दबाव में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल और आयातित कच्चे माल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो आने वाले महीनों में अन्य एफएमसीजी कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं।
किन उत्पादों के दाम बढ़े?
कंपनी ने अपने सबसे अधिक बिकने वाले उत्पादों में कीमत संशोधन किया है। कोलगेट डेंटल क्रीम के 200 ग्राम + 100 ग्राम + टूथब्रश पैक की कीमत 8 रुपये बढ़कर 208 रुपये हो गई है। 200 ग्राम पैक की कीमत 135 रुपये और 100 ग्राम पैक की कीमत 73 रुपये कर दी गई है। इसी तरह कोलगेट मैक्स फ्रेश ब्लू और विजिबल व्हाइट पर्पल जैसे प्रीमियम उत्पादों में भी कीमतें बढ़ाई गई हैं। खास बात यह है कि प्रीमियम सेगमेंट में बढ़ोतरी सामान्य उत्पादों की तुलना में अधिक देखने को मिली है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं टूथपेस्ट के दाम?
टूथपेस्ट बनाने में उपयोग होने वाले कई कच्चे माल पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़े होते हैं। पैकेजिंग ट्यूब, प्लास्टिक कैप, रसायन और परिवहन लागत का सीधा संबंध कच्चे तेल की कीमतों से होता है। पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री और माल ढुलाई पर खर्च भी बढ़ा है। यही वजह है कि एफएमसीजी कंपनियां धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत का बोझ डाल रही हैं।
आम उपभोक्ता पर कितना असर पड़ेगा?
पहली नजर में 3 से 8 रुपये की बढ़ोतरी मामूली लग सकती है, लेकिन जब इसे साबुन, शैंपू, दूध, खाद्य तेल, गैस, पेट्रोल और अन्य घरेलू खर्चों के साथ जोड़ा जाए तो मासिक बजट पर इसका प्रभाव बढ़ जाता है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए दैनिक उपयोग की वस्तुओं में लगातार हो रही छोटी-छोटी बढ़ोतरी भी सालाना आधार पर हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च पैदा कर सकती है।
क्या दूसरी कंपनियां भी बढ़ा सकती हैं कीमतें?
एफएमसीजी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कमोडिटी कीमतों और लॉजिस्टिक्स लागत में राहत नहीं मिलती है तो अन्य बड़ी कंपनियां भी कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों में कंपनियां कीमत बढ़ाने के बजाय पैक साइज कम करने या अतिरिक्त मात्रा हटाने जैसी रणनीतियां अपनाती रही हैं, लेकिन लागत दबाव बढ़ने पर सीधे मूल्य वृद्धि का रास्ता चुना जा सकता है।
कोलगेट के लिए टूथपेस्ट कितना महत्वपूर्ण कारोबार?
कंपनी की आय का सबसे बड़ा स्रोत टूथपेस्ट कारोबार है। उद्योग अनुमानों के अनुसार कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इसी श्रेणी से आता है। ऐसे में लागत बढ़ने पर कंपनी के लिए कीमतों में संशोधन करना व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
आगे क्या?
महंगाई के मौजूदा दौर में उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में और भी कीमत वृद्धि देखने को मिल सकती है। यदि कच्चे तेल, पैकेजिंग सामग्री और परिवहन लागत ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो एफएमसीजी कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में और बदलाव कर सकती हैं। ऐसे में टूथपेस्ट की यह बढ़ोतरी केवल एक शुरुआत साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में महंगाई का सबसे बड़ा असर उन्हीं उत्पादों पर दिख सकता है जिनका उपयोग हर घर में रोजाना होता है।
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