Highlights
- केंद्र सरकार LIC में 2% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में
- इस विनिवेश से करीब ₹10,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य
- जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में आ सकता है ऑफर
- Goldman Sachs, BNP Paribas समेत कई बड़े बैंक प्रक्रिया में शामिल
- शेयर में करीब 3.5% की गिरावट दर्ज
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और शेयर बाजार की दिग्गज सरकारी कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार अब कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार जून 2026 में LIC के लगभग 2% शेयर बेच सकती है। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकार का लक्ष्य करीब ₹10,000 करोड़ जुटाने का है।
इस खबर के सामने आने के बाद बुधवार को LIC के शेयरों में दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान शेयर करीब 3.5% तक टूटकर 825.40 रुपये के आसपास पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी बिक्री की खबर आने पर अक्सर शेयरों में अल्पकालिक दबाव देखने को मिलता है, क्योंकि बाजार में सप्लाई बढ़ने की आशंका रहती है।
हालांकि, कई जानकार इसे सरकार की लंबी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जिसका मकसद सिर्फ फंड जुटाना नहीं बल्कि LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाना भी है।
आखिर सरकार LIC में हिस्सेदारी क्यों बेच रही है?
भारत सरकार फिलहाल LIC में सबसे बड़ी हिस्सेदार है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार 31 मार्च 2026 तक सरकार की कंपनी में करीब 96.5% हिस्सेदारी थी। यानी बाजार में आम निवेशकों और संस्थागत निवेशकों के पास LIC के बहुत कम शेयर उपलब्ध हैं।
SEBI के नियमों के मुताबिक किसी भी लिस्टेड कंपनी में कम से कम 25% सार्वजनिक हिस्सेदारी होना जरूरी है। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में सरकार को धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी घटानी पड़ेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि LIC में सरकार की हिस्सेदारी कम करने का उद्देश्य तीन बड़े लक्ष्यों से जुड़ा हुआ है:
- विनिवेश के जरिए सरकारी खजाने के लिए धन जुटाना
- कंपनी में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना
- शेयर में लिक्विडिटी और संस्थागत भागीदारी बढ़ाना
जून-जुलाई में आ सकता है बड़ा ऑफर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह हिस्सेदारी बिक्री जून के अंत या जुलाई 2026 की शुरुआत में लाई जा सकती है। माना जा रहा है कि इस बार सरकार मुख्य रूप से बड़े संस्थागत निवेशकों यानी Institutional Investors को टार्गेट कर सकती है।
हालांकि, अभी अंतिम समय और आकार को लेकर चर्चा जारी है। बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और वैश्विक माहौल को देखते हुए इसमें बदलाव भी संभव है। अगर बाजार मजबूत रहता है और निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहती है, तो सरकार इस ऑफर को तेजी से आगे बढ़ा सकती है।
कौन संभाल रहा है पूरा सौदा?
इस पूरे विनिवेश की जिम्मेदारी निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग यानी DIPAM संभाल रहा है। सरकार ने इस डील के लिए कई बड़े घरेलू और विदेशी निवेश बैंकों तथा मर्चेंट बैंकरों को नियुक्त किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें शामिल हैं:
- Goldman Sachs Group Inc.
- Motilal Oswal Investment Advisors
- BNP Paribas
- IIFL Capital Services
इन संस्थानों का काम निवेशकों से संपर्क करना, मार्केटिंग रणनीति बनाना और हिस्सेदारी बिक्री को सफल बनाना होगा।
LIC IPO की याद फिर ताजा
यह पहली बार नहीं है जब सरकार LIC में हिस्सेदारी बेच रही है। इससे पहले मई 2022 में देश का सबसे बड़ा IPO लॉन्च किया गया था। उस समय सरकार ने लगभग 3.5% हिस्सेदारी बेचकर करीब ₹21,000 करोड़ जुटाए थे।
IPO के दौरान LIC का इश्यू प्राइस 949 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर लंबे समय तक दबाव में रहा। बाद में बाजार में सुधार और बीमा सेक्टर में तेजी के चलते इसमें रिकवरी देखने को मिली। अब नई हिस्सेदारी बिक्री की खबर से निवेशकों के बीच यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या LIC के शेयर में दोबारा दबाव आ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा संकेत?
बाजार जानकारों का कहना है कि सरकार की हिस्सेदारी बिक्री को पूरी तरह नकारात्मक नजरिए से नहीं देखना चाहिए। लंबे समय में इससे LIC के शेयर में कई सकारात्मक बदलाव भी आ सकते हैं।
1. शेयर में बढ़ेगी लिक्विडिटी
अभी LIC के शेयर बाजार में सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। हिस्सेदारी बढ़ने से ट्रेडिंग वॉल्यूम मजबूत हो सकता है।
2. विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है
अगर सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ती है तो कई बड़े विदेशी फंड LIC में निवेश बढ़ा सकते हैं।
3. इंडेक्स वेटेज में सुधार संभव
विश्लेषकों का मानना है कि फ्री फ्लोट बढ़ने से प्रमुख इंडेक्स में LIC का वेटेज भी बेहतर हो सकता है।
लेकिन जोखिम भी कम नहीं
हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। शेयर सप्लाई बढ़ने से शॉर्ट टर्म दबाव रह सकता है, सरकारी कंपनी होने के कारण पॉलिसी आधारित फैसलों का असर पड़ता है, निजी बीमा कंपनियों से प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, बाजार में ब्याज दर और निवेश रिटर्न का भी असर पड़ता है इसी वजह से कई निवेशक फिलहाल सरकार के अगले कदम और ऑफर प्राइस का इंतजार कर रहे हैं।
LIC के कारोबार की स्थिति कैसी है?
LIC अभी भी भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर छोटे शहरों तक इसकी मजबूत पहुंच है। कंपनी का एजेंट नेटवर्क और ब्रांड वैल्यू इसे निजी कंपनियों से अलग बनाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में HDFC Life, SBI Life और ICICI Prudential जैसी निजी कंपनियों ने तेजी से बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है। ऐसे में LIC पर अब profitability और operational efficiency सुधारने का दबाव भी बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर LIC डिजिटल विस्तार, नए प्रोडक्ट्स और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में सफल रहती है, तो लंबे समय में कंपनी मजबूत स्थिति में रह सकती है।
बाजार की नजर अब किस पर रहेगी?
अब निवेशकों की नजर तीन बड़ी चीजों पर होगी सरकार ऑफर किस प्राइस पर लाती है संस्थागत निवेशकों की मांग कैसी रहती है हिस्सेदारी बिक्री के बाद शेयर का प्रदर्शन कैसा रहता है अगर ऑफर को मजबूत रिस्पॉन्स मिलता है, तो यह सरकार के लिए भी बड़ा संकेत होगा कि बाजार अभी भी LIC पर भरोसा रखता है।
निष्कर्ष
LIC में हिस्सेदारी बिक्री सिर्फ एक साधारण विनिवेश नहीं बल्कि भारत के वित्तीय बाजार के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार जहां इससे हजारों करोड़ रुपये जुटाना चाहती है, वहीं बाजार इसे LIC के भविष्य और सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम के रूप में देख रहा है।
हालांकि, शॉर्ट टर्म में शेयर पर दबाव रह सकता है, लेकिन लंबे समय में यह कदम कंपनी की बाजार भागीदारी और निवेशकों की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है।
Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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