भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है, भारत में एक विशाल तेल भंडार मिलने की खबर ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं। पश्चिम बंगाल के अशोकनगर इलाके में मिले इस ऑयल फील्ड को देश के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि यहां 24 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का भंडार मौजूद हो सकता है।
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अगर घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो इससे न केवल इंपोर्ट बिल कम होगा बल्कि वैश्विक संकटों के दौरान भारत की निर्भरता भी घटेगी।
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर
अमेरिका-ईरान तनाव और फारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। इस रास्ते से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है। भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से खरीदता है।
यदि इस मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है तो उसका सीधा असर भारत पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर महंगाई तक कई चीजें प्रभावित होती हैं। ऐसे माहौल में घरेलू तेल भंडार की खोज भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
कहां मिला है यह बड़ा तेल भंडार?
यह ऑयल फील्ड पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के अशोकनगर क्षेत्र में स्थित है। ONGC ने यहां साल 2018 में तेल और गैस के भंडार की खोज की थी। शुरुआती सर्वे और ड्रिलिंग डेटा के आधार पर अनुमान लगाया गया कि यहां भारी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पूर्वी भारत के सबसे बड़े संभावित तेल क्षेत्रों में से एक हो सकता है। अभी तक भारत में पश्चिमी तट और असम जैसे क्षेत्रों में तेल उत्पादन ज्यादा होता रहा है। ऐसे में पूर्वी भारत में इस स्तर का भंडार मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
24 करोड़ बैरल तेल कितना बड़ा भंडार है?
24 करोड़ बैरल कच्चे तेल का अनुमान भारत के लिए काफी बड़ा माना जा रहा है। हालांकि यह पूरी तरह उत्पादन योग्य भंडार कितना होगा, इसका अंतिम आकलन विस्तृत ड्रिलिंग और तकनीकी परीक्षणों के बाद ही होगा।
फिर भी ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यहां बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होता है तो इससे भारत का इंपोर्ट बिल कम हो सकता है, पूर्वी भारत में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तेल सप्लाई को लेकर रणनीतिक मजबूती मिलेगी भारत हर साल अरबों डॉलर का कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन में थोड़ी वृद्धि भी विदेशी मुद्रा बचाने में मदद कर सकती है।
ONGC अब क्या करने जा रही है?
सरकारी तेल कंपनी ONGC अब इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी यहां कमर्शियल ड्रिलिंग और एक्सट्रैक्शन शुरू करने के लिए अंतिम स्तर की तैयारियों में जुटी हुई है।
बीते दिनों भाजपा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात भी की। इस दौरान पश्चिम बंगाल में निवेश और अशोकनगर तेल क्षेत्र को जल्द चालू करने पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है।
पहले क्यों रुक गया था प्रोजेक्ट?
यह प्रोजेक्ट कई साल पहले शुरू हो सकता था, लेकिन स्थानीय विरोध, जमीन से जुड़े विवाद और विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से काम धीमा पड़ गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ONGC को ड्रिलिंग गतिविधियों में कई प्रशासनिक और स्थानीय बाधाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि अब केंद्र और राज्य स्तर पर हालात बेहतर होने के बाद परियोजना को दोबारा गति मिलने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी मंजूरियां समय पर मिलती हैं तो आने वाले वर्षों में यहां बड़े स्तर पर तेल उत्पादन शुरू हो सकता है।
क्या इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा?
यह सवाल आम लोगों के मन में सबसे ज्यादा है। हालांकि किसी एक ऑयल फील्ड से तुरंत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी गिरावट आना संभव नहीं होता, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ने से लंबे समय में फायदा जरूर मिल सकता है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपया, टैक्स, रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्ट लागत
लेकिन अगर भारत का घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर दबाव कम होगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, सप्लाई संकट का असर कम पड़ सकता है यानी भविष्य में यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा फोकस
पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दे रहा है। सरकार घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने, रिन्यूएबल एनर्जी विस्तार, एथेनॉल ब्लेंडिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व जैसी योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है।
ONGC, Oil India और निजी कंपनियों को नए क्षेत्रों में खोज और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अशोकनगर प्रोजेक्ट को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा फायदा
अगर यह प्रोजेक्ट बड़े स्तर पर सफल होता है तो पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सकता है। तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स, पाइपलाइन, रिफाइनिंग और सर्विस सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, छोटे कारोबार को फायदा मिलेगा विशेषज्ञ मानते हैं कि ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक गति दे सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू तेल भंडार की खोज भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
अशोकनगर में मिला यह तेल भंडार भले ही पूरी तरह भारत की आयात निर्भरता खत्म न कर पाए, लेकिन यह निश्चित रूप से देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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