भारतीय आमों की मिठास अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही। खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर तक भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है। विदेशी सुपरमार्केट्स में भारतीय आमों को खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। खास बात यह है कि अब भारतीय आम केवल प्रवासी भारतीयों की पसंद नहीं रह गए हैं, बल्कि विदेशी उपभोक्ता भी इन्हें प्रीमियम फ्रूट के तौर पर पसंद कर रहे हैं।
भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। वैश्विक आम उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत मानी जाती है। देश में पैदा होने वाले आमों का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में ही खप जाता है, लेकिन इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में आमों के निर्यात में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। बेहतर कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक पैकेजिंग और एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर ने भारतीय आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई है।
विदेशों में क्यों बढ़ रही है भारतीय आमों की मांग?
भारतीय आमों की लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण इनका स्वाद और खुशबू है, जिसे दुनिया के दूसरे देशों के आमों से अलग माना जाता है। भारतीय किस्मों में मिठास अधिक होती है और उनकी प्राकृतिक सुगंध विदेशी ग्राहकों को आकर्षित करती है।
इसके अलावा भारत सरकार और APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फलों की ब्रांडिंग पर काफी जोर दिया है। विदेशों में फूड फेस्टिवल, रिटेल प्रमोशन और भारतीय दूतावासों के जरिए भारतीय आमों को प्रमोट किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड महामारी के बाद दुनियाभर में प्रीमियम और एक्सोटिक फूड आइटम्स की मांग बढ़ी है। इसी ट्रेंड का फायदा भारतीय आम उद्योग को मिला है।
HE @AmbGVSrinivas inaugurated the 23rd edition of the Mango Mania festival at Lulu Hypermarket in Muscat yesterday. This year, the annual event showcased over 50 premium mango varieties from India, alongside selections from across the globe. In addition to fresh fruit, the… pic.twitter.com/it7ijRisan
— India in Oman (Embassy of India, Muscat) (@Indemb_Muscat) May 25, 2026 APEDA के आंकड़े क्या बताते हैं?
APEDA के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया। इससे देश को 470 करोड़ रुपये से ज्यादा का एक्सपोर्ट रेवेन्यू मिला। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय आम अब केवल मौसमी फल नहीं रहे, बल्कि एक बड़ा एग्री-एक्सपोर्ट बिजनेस बन चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो लागत में और सुधार होता है, तो आने वाले वर्षों में आम निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
UAE बना भारतीय आमों का सबसे बड़ा बाजार
खाड़ी देशों में भारतीय आमों की सबसे ज्यादा मांग देखने को मिल रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में भारत ने UAE को 12,000 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए, जिनकी कुल कीमत करीब 20 मिलियन डॉलर रही।
दुबई, अबू धाबी और शारजाह जैसे शहरों में भारतीय आमों की जबरदस्त मांग है। यहां रहने वाले भारतीयों के अलावा स्थानीय लोग भी भारतीय किस्मों को पसंद कर रहे हैं। खासतौर पर रमजान और गर्मियों के दौरान आमों की बिक्री में भारी उछाल आता है।
सिंगापुर में सुपरमार्केट से फटाफट गायब हो रहे आम
हाल ही में सिंगापुर में भारतीय आमों की लोकप्रियता सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। भारत में सिंगापुर उच्चायोग ने एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि सिंगापुर के सुपरमार्केट्स में भारतीय आम तेजी से बिक रहे हैं। पोस्ट में बताया गया कि भारत के अलग-अलग राज्यों से आने वाले आमों की इतनी मांग है कि स्टोर्स में स्टॉक टिक ही नहीं पा रहा।
इससे साफ है कि भारतीय आम अब ग्लोबल ब्रांड बनते जा रहे हैं।
Guys, #indianmango fever has landed in Singapore. Mangoes from all states of India are flying off the shelves. Thanks to @protosphinx for sharing the story with us. HC Wong#mango #mangoexport @AgriGoI #fruit pic.twitter.com/vQWkjR5jN4
— Singapore in India (@SGinIndia) May 25, 2026 अमेरिका और यूरोप में क्यों बढ़ रही डिमांड?
अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में भारतीय आमों की मांग बढ़ने की बड़ी वजह वहां की भारतीय आबादी है। हालांकि अब विदेशी ग्राहक भी भारतीय आमों को प्रीमियम फ्रूट मानकर खरीद रहे हैं। अमेरिका में भारतीय आमों के लिए सख्त फाइटोसैनिटरी नियम लागू हैं। वहां एक्सपोर्ट किए जाने वाले आमों को विशेष इरेडिएशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इन मानकों को बेहतर तरीके से पूरा करना शुरू किया है। यही कारण है कि अमेरिका में भारतीय आमों की उपलब्धता बढ़ी है।
अल्फांसो अब भी ‘किंग ऑफ मैंगोज’
अगर भारतीय आमों की बात हो और अल्फांसो का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला भारतीय आम है। इसकी खास खुशबू, मलाईदार टेक्सचर और मिठास इसे प्रीमियम कैटेगरी में रखती है। विदेशों में अल्फांसो को “King of Mangoes” कहा जाता है।
हालांकि अब दूसरी भारतीय किस्मों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
केसर, चौसा और लंगड़ा की बढ़ी लोकप्रियता
गुजरात का केसर आम उन बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है जहां ग्राहक प्रीमियम अल्फांसो की तुलना में सस्ता विकल्प चाहते हैं। इसके अलावा उत्तर भारत के चौसा और लंगड़ा आम भी विदेशों में पसंद किए जा रहे हैं। दक्षिण भारत का तोतापरी आम भी प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री में काफी उपयोग किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग देशों में ग्राहकों की पसंद के हिसाब से भारतीय एक्सपोर्टर्स अब विभिन्न किस्मों की सप्लाई बढ़ा रहे हैं।
GI-Tagged आमों की बढ़ रही पहचान
भारत सरकार और APEDA अब GI-Tagged आमों की ब्रांडिंग पर भी जोर दे रहे हैं। GI टैग किसी खास क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है। अल्फांसो, केसर और कुछ अन्य किस्मों को GI टैग मिलने से उनकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में वैल्यू बढ़ी है।
जुलाई 2025 में अबू धाबी में आयोजित “Indian Mango Mania 2025” कार्यक्रम में भारत के प्रीमियम आमों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। इस आयोजन का मकसद वैश्विक खरीदारों को भारतीय आमों की विविधता और गुणवत्ता से परिचित कराना था।
कैसे बदला भारतीय आम एक्सपोर्ट सिस्टम?
एक दशक पहले तक भारतीय आमों के एक्सपोर्ट में कई समस्याएं थीं। खराब पैकेजिंग, कमजोर कोल्ड-चेन और ट्रांसपोर्ट में देरी के कारण गुणवत्ता प्रभावित होती थी। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदली है।
भारतीय निर्यातकों ने आधुनिक पैक-हाउस, नियंत्रित तापमान वाली सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रोसेसिंग सिस्टम विकसित किए हैं। इसके अलावा एयर कार्गो सुविधाओं में सुधार और तेज लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ने एक्सपोर्ट को आसान बनाया है।
फिर भी सामने हैं कई बड़ी चुनौतियां
हालांकि भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती आम का छोटा सीजन है। आम केवल कुछ महीनों तक उपलब्ध रहते हैं, जिससे सप्लाई सीमित रहती है।
इसके अलावा हवाई माल ढुलाई की लागत काफी ज्यादा है। यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में एयर फ्रेट खर्च एक्सपोर्टर्स के मार्जिन को प्रभावित करता है। कुछ देशों के सख्त आयात नियम भी चुनौती बने हुए हैं। कई बार छोटे एक्सपोर्टर्स इन मानकों को पूरा नहीं कर पाते।
किसानों और एक्सपोर्टर्स को क्या होगा फायदा?
भारतीय आमों की बढ़ती वैश्विक मांग का सबसे बड़ा फायदा किसानों और एक्सपोर्टर्स को मिल सकता है। अगर एक्सपोर्ट लगातार बढ़ता है, तो किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। खासतौर पर GI-tagged और प्रीमियम किस्मों के उत्पादकों की आय में बड़ा इजाफा हो सकता है। इसके अलावा भारत का एग्री-एक्सपोर्ट सेक्टर भी मजबूत होगा और विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी।
भारत के लिए बड़ा अवसर क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास दुनिया के प्रीमियम फ्रूट मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने का मौका है। दुनियाभर में हेल्दी और नेचुरल फूड की मांग बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय आम “प्रीमियम नेचुरल प्रोडक्ट” के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। अगर सरकार और एक्सपोर्टर्स मिलकर गुणवत्ता, ब्रांडिंग और सप्लाई चेन पर फोकस जारी रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
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