भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट देखने को मिली। सोमवार की शानदार तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार दबाव में आ गया। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, एफएंडओ एक्सपायरी और तकनीकी कमजोरी ने मिलकर बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसका असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रुपये में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
बीएसई सेंसेक्स 479.26 अंक यानी 0.63% गिरकर 76,009.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 118 अंक यानी 0.49% टूटकर 23,913.70 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स ने दिन में 76,627 का उच्च स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,089.8 तक पहुंचा था। लेकिन बाद में बिकवाली हावी होने से दोनों इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार की मजबूत तेजी के बाद निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी के पीछे यह उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो सकता है और जल्द कोई शांति समझौता सामने आ सकता है।
हालांकि, हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया। इससे वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की भावना कमजोर हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौते में अभी कुछ दिन लग सकते हैं।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सबसे पहले असर कच्चे तेल और मुद्रा बाजार पर दिखाई देता है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर दबाव बनता है।
मंथली F&O एक्सपायरी ने बढ़ाई अस्थिरता
मंगलवार को निफ्टी की मासिक एफएंडओ एक्सपायरी भी थी। एक्सपायरी वाले दिन आमतौर पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है क्योंकि ट्रेडर्स अपने सौदों को रोलओवर या क्लोज करते हैं।
बाजार आंकड़ों के अनुसार, मई सीरीज में निफ्टी का रोलओवर 59.8% रहा। यह पिछली एक्सपायरी के 61.5% से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन ऐतिहासिक औसत से ऊपर बना हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रेडर्स अभी भी बाजार में पोजिशन बनाए हुए हैं, लेकिन सतर्कता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपायरी के दौरान भारी शॉर्ट कवरिंग और अचानक बिकवाली दोनों की संभावना बनी रहती है। यही कारण रहा कि दिनभर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
तकनीकी स्तरों ने बढ़ाई चिंता
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर बेहद अहम बना हुआ है। अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिकता तो बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
ब्रोकरेज फर्म बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, अगर निफ्टी 24,200 के ऊपर मजबूती से निकलता है तो 24,300–24,400 तक शॉर्ट कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर, 24,000 के नीचे फिसलने पर 23,800 तक दबाव बढ़ने की आशंका है। तकनीकी संकेत फिलहाल यह दिखा रहे हैं कि बाजार में निकट अवधि में अस्थिरता बनी रह सकती है। खासतौर पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे।
रुपये में भी बड़ी गिरावट, डॉलर के मुकाबले टूटा भारतीय मुद्रा बाजार
शेयर बाजार की कमजोरी के साथ-साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 47 पैसे टूटकर 95.73 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.43 पर खुला था। सोमवार को यह 95.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। यानी एक ही कारोबारी सत्र में रुपये में बड़ी कमजोरी देखने को मिली।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और डॉलर की मजबूती से रुपये पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी भारतीय मुद्रा को कमजोर कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बाजार में तरलता बढ़ाने और हस्तक्षेप के कदम निकट अवधि में रुपये को कुछ सहारा दे सकते हैं।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा दबाव रहा?
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। कई दिग्गज शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की। हालांकि, कुछ डिफेंस और ऊर्जा शेयरों में खरीदारी बनी रही क्योंकि पश्चिम एशिया तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित सेक्टरों की ओर रुख कर रहे हैं।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिश्रित कारोबार देखने को मिला। बाजार चौड़ाई लगभग संतुलित रही, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली पूरी तरह घबराहट वाली नहीं थी बल्कि चुनिंदा मुनाफावसूली थी।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्र बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। निवेशकों की नजर अब इन बड़े फैक्टर्स पर रहेगी:
- अमेरिका-ईरान तनाव में आगे क्या होता है
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- डॉलर इंडेक्स और रुपये की चाल
- विदेशी निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली
- RBI की संभावित रणनीति
- वैश्विक बाजारों का रुख
अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो भारतीय बाजार में दबाव बना रह सकता है। वहीं, यदि कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रगति होती है तो बाजार में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक दांव लगाने से बचना चाहिए। बाजार अभी खबरों के आधार पर तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर फोकस बनाए रखना चाहिए।
कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक कहानी अभी भी मजबूत मानी जा रही है।
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