कोविड-19 महामारी का दौर दुनिया के लिए सबसे मुश्किल समय में से एक था। लाखों लोग अपनी नौकरी गंवा रहे थे, बिजनेस बंद हो रहे थे और हर तरफ आर्थिक अनिश्चितता का माहौल था। ऐसे समय में ज्यादातर लोग सुरक्षित नौकरी बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन महाराष्ट्र के रहने वाले भाऊसाहेब नवले ने बिल्कुल उल्टा फैसला लिया।
उन्होंने 50 साल की उम्र में अपनी ₹2.5 लाख प्रतिमाह वाली शानदार नौकरी छोड़ दी और एक ऐसा बिजनेस शुरू किया, जिसे उस समय बहुत बड़ा जोखिम माना जा रहा था। आज वही फैसला उन्हें करोड़ों के कारोबार तक ले गया है। उनकी ‘ग्रीन एंड ब्लूम्स नर्सरी’ आज देशभर में पौधे सप्लाई करती है और सालाना 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का टर्नओवर हासिल कर चुकी है।
आरामदायक जिंदगी छोड़ चुना संघर्ष का रास्ता
महाराष्ट्र के पुणे जिले के रहने वाले भाऊसाहेब नवले लंबे समय तक विदेशों में काम कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने लगभग 25 वर्षों तक अलग-अलग देशों में हॉर्टिकल्चर और पॉलीहाउस खेती से जुड़ा काम किया।
उनके पास खास तौर पर इथियोपिया में पॉलीहाउस के अंदर गुलाब की खेती का करीब 10 वर्षों का अनुभव था। इस दौरान उन्हें हर महीने लगभग ₹2.5 लाख वेतन मिलता था। रहने, खाने और दूसरी कई सुविधाएं भी कंपनी की ओर से मिलती थीं।
कई लोगों के लिए ऐसी नौकरी एक सपना होती है, लेकिन भाऊसाहेब के मन में हमेशा अपना बिजनेस शुरू करने की इच्छा थी। उन्होंने एग्रीकल्चर में बीएससी की पढ़ाई की थी और खेती-बागवानी के क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे।
कोविड संकट में लिया सबसे बड़ा फैसला
साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी, तब भाऊसाहेब ने विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।
यह वही समय था जब कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी कर रही थीं छोटे कारोबार बंद हो रहे थे, लोग निवेश करने से डर रहे थे आर्थिक मंदी का खतरा बना हुआ था. ऐसे माहौल में सुरक्षित नौकरी छोड़ना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं था। लेकिन भाऊसाहेब ने डरने के बजाय अवसर तलाशा। उन्होंने महसूस किया कि महामारी के बाद लोग घरों, गार्डनिंग और इंडोर प्लांट्स की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसी बदलते ट्रेंड को उन्होंने अपने बिजनेस आइडिया में बदल दिया।
पुणे में शुरू की ‘ग्रीन एंड ब्लूम्स नर्सरी’
भारत लौटने के बाद भाऊसाहेब नवले ने पुणे जिले के मावल तालुका में ‘ग्रीन एंड ब्लूम्स नर्सरी’ की शुरुआत की। उन्होंने इंडोर पॉट प्लांट्स यानी गमलों में लगाए जाने वाले सजावटी पौधों पर फोकस किया। शुरुआत बेहद छोटी थी। उन्होंने सिर्फ 27 यूनिट्स के साथ काम शुरू किया था।
लेकिन उनके पास विदेशी अनुभव, पौधों की गहरी समझ, पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी की जानकारी, और मार्केट की सही पहचान थी। इन्हीं चीजों ने उनके बिजनेस को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की।
कैसे बढ़ा कारोबार?
कोविड के बाद लोगों में होम डेकोरेशन और गार्डनिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा। वर्क फ्रॉम होम के कारण लोग घरों को बेहतर बनाने लगे और इंडोर प्लांट्स की मांग अचानक बढ़ गई।
भाऊसाहेब ने इस मौके का फायदा उठाया। उन्होंने अलग-अलग वैरायटी के इंडोर प्लांट्स तैयार किए, बेहतर क्वालिटी पर फोकस किया, और समय पर सप्लाई नेटवर्क बनाया।
आज उनकी नर्सरी एक एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली हुई है। यहां 100 से अधिक प्रजातियों के पौधे उगाए जाते हैं।
पूरे देश में जाते हैं पौधे
भाऊसाहेब की मेहनत का नतीजा यह रहा कि आज उनके ग्राहक सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देशभर की करीब 300 छोटी-बड़ी नर्सरियां उनसे पौधे खरीदती हैं उनके प्लांट्स कई राज्यों में सप्लाई किए जाते हैं इंडोर और सजावटी पौधों की डिमांड लगातार बढ़ रही है उनकी कंपनी अब एक मजबूत सप्लाई नेटवर्क बना चुकी है।
सालाना टर्नओवर पहुंचा ₹2 करोड़ के पार
जिस बिजनेस की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी, वह आज करोड़ों के कारोबार में बदल चुका है।
रिपोर्ट्स के अनुसार ‘ग्रीन एंड ब्लूम्स नर्सरी’ का सालाना टर्नओवर ₹2 करोड़ से ज्यादा हो चुका है, कंपनी लगातार विस्तार कर रही है पौधों की नई प्रजातियों और आधुनिक तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है
उनकी कहानी से क्या सीख मिलती है?
भाऊसाहेब नवले की सफलता सिर्फ पैसे कमाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह जोखिम लेने और सही समय पर सही फैसला करने की मिसाल भी है। उन्होंने साबित किया कि उम्र कभी सफलता की बाधा नहीं बनती अनुभव का सही इस्तेमाल बड़ा बिजनेस बना सकता है संकट के समय में भी अवसर छिपे होते हैं खेती और नर्सरी जैसे सेक्टर में भी करोड़ों का कारोबार खड़ा किया जा सकता है
आज जब बड़ी संख्या में युवा और प्रोफेशनल्स नौकरी के साथ-साथ अपना बिजनेस शुरू करने का सपना देख रहे हैं, तब भाऊसाहेब की कहानी उन्हें नई प्रेरणा देती है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है नर्सरी और प्लांट बिजनेस
पिछले कुछ वर्षों में भारत में गार्डनिंग और इंडोर प्लांट्स का बाजार तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लोग अब घर और ऑफिस में हरियाली पसंद कर रहे हैं एयर प्यूरीफाइंग प्लांट्स की मांग बढ़ रही है, ऑनलाइन प्लांट डिलीवरी का ट्रेंड मजबूत हुआ है, शहरी इलाकों में सजावटी पौधों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है यही वजह है कि नर्सरी बिजनेस अब सिर्फ पारंपरिक खेती नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ता हुआ एग्री-बिजनेस मॉडल बन चुका है।
निष्कर्ष
जब पूरी दुनिया डर और अनिश्चितता में जी रही थी, तब भाऊसाहेब नवले ने जोखिम उठाकर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की। उन्होंने आरामदायक नौकरी छोड़कर अपने अनुभव और जुनून के दम पर ऐसा बिजनेस खड़ा किया, जो आज करोड़ों का टर्नओवर दे रहा है।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर सोच मजबूत हो और मेहनत सही दिशा में की जाए, तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत करके बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
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