नई दिल्ली। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अब लड़ाई सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रह गई है। आने वाले समय की सबसे बड़ी जंग “क्रिटिकल मिनरल्स” यानी दुर्लभ खनिजों पर होने वाली है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर और मिसाइल सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों की रीढ़ माने जाने वाले इन खनिजों पर फिलहाल चीन का भारी दबदबा है। लेकिन अब भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर चीन के इसी ‘खनिज साम्राज्य’ को चुनौती देने का मास्टरप्लान तैयार किया है।
भारत में आयोजित Quad विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद “Quad Critical Mineral Framework” लॉन्च किया गया। इस घोषणा को वैश्विक सप्लाई चेन में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इस खबर का असर भारतीय शेयर बाजार में भी तुरंत दिखाई दिया और सरकारी कंपनी GMDC के शेयरों में जोरदार तेजी आ गई।
आखिर क्या है Quad का नया Critical Mineral Framework?
Quad यानी भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का रणनीतिक समूह अब सिर्फ रक्षा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता। Quad देशों ने अब उन संसाधनों पर ध्यान केंद्रित किया है जो भविष्य की टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा जरूरी माने जा रहे हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस फ्रेमवर्क की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच खनिजों के खनन, प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग में सहयोग बढ़ाना है। इसके जरिए Quad देश चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
यह फ्रेमवर्क कई स्तरों पर काम करेगा:
- रणनीतिक निवेश का समन्वय
- नई माइनिंग परियोजनाओं को बढ़ावा
- सप्लाई चेन सुरक्षा
- क्लीन एनर्जी उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता
- रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना
- चीन के निर्यात नियंत्रण के प्रभाव को कम करना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले दशक में वैश्विक टेक्नोलॉजी और ऊर्जा बाजार का संतुलन बदल सकता है।
क्रिटिकल मिनरल्स इतने अहम क्यों हैं?
आज की दुनिया में जिस तरह तेल कभी सबसे अहम संसाधन हुआ करता था, उसी तरह अब “क्रिटिकल मिनरल्स” को भविष्य का तेल माना जा रहा है। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं।
इनका इस्तेमाल होता है इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में, मोबाइल और लैपटॉप में, सोलर पैनल और विंड टर्बाइन में, मिसाइल और रक्षा उपकरणों में, AI और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में.
समस्या यह है कि इनकी प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन पर चीन का लगभग 70% से 90% तक नियंत्रण माना जाता है। अगर चीन सप्लाई रोक दे तो दुनिया की EV और टेक इंडस्ट्री पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। यही वजह है कि अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश लंबे समय से “China Plus One” रणनीति पर काम कर रहे हैं।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत के लिए यह फ्रेमवर्क बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के पास रेयर अर्थ और अन्य खनिजों के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं, लेकिन अब तक प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर कमजोर रहा है। अब Quad की मदद से भारत को विदेशी निवेश, आधुनिक माइनिंग टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग क्षमता, सप्लाई चेन नेटवर्क, वैश्विक निर्यात अवसर मिल सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत अगले 5-10 वर्षों में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता विकसित कर लेता है तो वह एशिया का बड़ा माइनिंग और मटेरियल प्रोसेसिंग हब बन सकता है।
GMDC शेयर में अचानक क्यों आई तेजी?
इस घोषणा का सबसे बड़ा असर Gujarat Mineral Development Corporation यानी GMDC पर दिखाई दिया। मंगलवार को कंपनी के शेयरों में 5% से ज्यादा की तेजी आई और स्टॉक ₹691 के आसपास पहुंच गया। निवेशक मान रहे हैं कि भारत में अगर क्रिटिकल मिनरल सेक्टर को सरकारी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता है, तो GMDC जैसी कंपनियां इसका सबसे बड़ा लाभ उठा सकती हैं।
GMDC पहले से ही लिग्नाइट माइनिंग, बॉक्साइट, फ्लोरस्पार, औद्योगिक खनिज से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। भविष्य में कंपनी रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिज क्षेत्रों में भी विस्तार कर सकती है।
पिछले एक साल में कंपनी के शेयर ने करीब 91% का रिटर्न दिया है, जिससे यह निवेशकों की नजर में पहले ही मजबूत PSU स्टॉक बन चुका है।
चीन की चिंता क्यों बढ़ी?
चीन ने पिछले कई वर्षों में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में भारी निवेश किया है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां और EV निर्माता अभी भी चीन की सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।
लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका-चीन तनाव, ट्रेड वॉर, सेमीकंडक्टर प्रतिबंध, निर्यात नियंत्रण के कारण कई देशों ने वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करना शुरू कर दिया है। Quad का यह नया फ्रेमवर्क चीन के आर्थिक प्रभाव को सीमित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
EV और AI सेक्टर पर पड़ेगा बड़ा असर
आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन और AI आधारित तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। इसके साथ ही बैटरी और हाई-परफॉर्मेंस चिप्स के लिए जरूरी खनिजों की मांग भी कई गुना बढ़ सकती है।
अगर Quad देश सप्लाई चेन को सफलतापूर्वक diversify कर लेते हैं, तो EV कंपनियों की लागत स्थिर हो सकती है, टेक कंपनियों को सुरक्षित सप्लाई मिलेगी, चीन पर वैश्विक निर्भरता कम होगी, भारत जैसे देशों को बड़े निवेश मिल सकते हैं
आगे क्या है योजना?
अमेरिका ने संकेत दिया है कि इस साल के अंत में “Indo-Pacific Energy Security Forum” आयोजित किया जाएगा। इसमें ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक खनिजों पर आगे की नीति बनाई जाएगी। भारत पहले ही अमेरिका समर्थित “Pax Silica” पहल से जुड़ चुका है, जिसका उद्देश्य AI और हाई-टेक सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
क्या निवेशकों को माइनिंग सेक्टर पर नजर रखनी चाहिए?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में “क्रिटिकल मिनरल्स” थीम वैश्विक निवेश का बड़ा सेक्टर बन सकती है। भारत सरकार भी इस सेक्टर को लेकर तेजी से नीतियां बना रही है। हालांकि निवेशकों को सिर्फ खबरों के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए। माइनिंग सेक्टर में नीति जोखिम, पर्यावरण मंजूरी, वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव जैसे फैक्टर भी अहम भूमिका निभाते हैं।
लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो Quad का यह नया कदम भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बड़ा अवसर बन सकता है।
Also Read:


