भारत के घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आमतौर पर सोना अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत के आधार पर बिकता है, लेकिन इस समय भारतीय बाजार में सोना आयातित कीमत (Landed Price) से करीब ₹450 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹4500 प्रति 10 ग्राम सस्ता बिक रहा है। यह स्थिति सिर्फ निवेशकों ही नहीं बल्कि ज्वेलरी कारोबारियों के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने हाल ही में सोना, चांदी और प्लैटिनम पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। आमतौर पर ड्यूटी बढ़ने पर सोना महंगा होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट बाजार में कीमतें दबाव में हैं। ज्वेलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज तक कम कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और इसका आम खरीदार, छोटे दुकानदार और पूरे बुलियन मार्केट पर क्या असर पड़ेगा, आइए विस्तार से समझते हैं।
आयातित कीमत से सस्ता बिक रहा सोना
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की भारत अनुसंधान प्रमुख कविता चाको के मुताबिक घरेलू बाजार में सोना आधिकारिक आयातित कीमतों की तुलना में काफी डिस्काउंट पर बिक रहा है। उन्होंने बताया कि ड्यूटी बढ़ने से पहले जहां घरेलू बाजार में सोने पर औसतन 14 डॉलर प्रति औंस का डिस्काउंट था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 150 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है। भारतीय मुद्रा में यह करीब ₹462 प्रति ग्राम बैठता है।
इसका सीधा मतलब यह है कि भारतीय खरीदारों को बाजार में सोना अंतरराष्ट्रीय लागत से कम कीमत पर मिल रहा है। ऐसी स्थिति सामान्य बाजार परिस्थितियों में कम देखने को मिलती है।
ड्यूटी बढ़ने के बाद क्यों सस्ता हुआ सोना?
सरकार ने 13 मई को सोना, चांदी और प्लैटिनम पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15% कर दी थी। सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा के बहाव को रोकना और नए आयात को कम करना था। लेकिन इस फैसले का बाजार में अलग असर देखने को मिला।
असल में कई बुलियन डीलर्स और बड़े आयातकों के पास पहले से ऐसा स्टॉक मौजूद था जिसे उन्होंने कम ड्यूटी यानी 6% के समय आयात किया था। ड्यूटी बढ़ने के बाद उन्होंने उसी पुराने स्टॉक को तेजी से बाजार में उतारना शुरू कर दिया। इससे बाजार में सप्लाई अचानक बढ़ गई।
जब सप्लाई ज्यादा हो और मांग कमजोर हो, तो कीमतों पर दबाव आना तय है। यही वजह है कि घरेलू बाजार में सोना डिस्काउंट पर बिक रहा है।
मांग में भारी गिरावट
सोने की मांग में गिरावट इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा फैक्टर बनकर सामने आया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में निवेशकों और आम ग्राहकों दोनों की खरीदारी कमजोर हुई है।
चेन्नई के NAC Jewellers के मैनेजिंग डायरेक्टर एन. अनंत पद्मनाभन ने कहा कि मौजूदा समय में मांग लगभग शून्य जैसी स्थिति में पहुंच गई है। यही कारण है कि ज्वेलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज तक घटा रहे हैं। आमतौर पर ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को सोने की कीमत के अलावा 8% से 25% तक मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। लेकिन अब कई दुकानदार इस चार्ज में कटौती कर रहे हैं ताकि ग्राहक दोबारा बाजार में लौटें।
प्रधानमंत्री की अपील का भी असर
बाजार से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने को लेकर की गई अपील का भी असर बिक्री पर पड़ा है। कई ग्राहकों ने फिलहाल खरीदारी टाल दी है। हालांकि शुरुआती दिनों में कुछ बड़े शहरों में पैनिक बाइंग देखने को मिली। लोगों को डर था कि सरकार आगे और कड़े नियम लागू कर सकती है या सोने पर अतिरिक्त नियंत्रण लगाए जा सकते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद बाजार सामान्य हुआ और मांग फिर कमजोर पड़ गई।
पुराने स्टॉक ने बढ़ाया दबाव
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मीडिया प्रवक्ता CA सुरेंद्र मेहता के अनुसार, ड्यूटी बढ़ने के बाद पुराने स्टॉक को तेजी से बेचने की होड़ लग गई। वीकेंड पर मुंबई स्पॉट मार्केट में सोना ₹1,58,534 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि MCX पर जून गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट ₹1,58,588 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस सप्ताह सोने में गिरावट दर्ज की गई और कीमतें 0.5% से ज्यादा टूट गईं।
पुराने स्टॉक को सस्ते में निकालने के कारण बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। बड़े डीलर्स जल्दी कैश निकालना चाहते हैं ताकि नए ऊंची ड्यूटी वाले आयात के जोखिम से बचा जा सके।
छोटे ज्वेलर्स सबसे ज्यादा परेशान
इस पूरी स्थिति का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स पर पड़ रहा है। बड़े ब्रांडेड ज्वेलर्स के पास मजबूत ग्राहक आधार और बड़ा स्टॉक होता है, इसलिए वे कुछ समय तक दबाव झेल सकते हैं। लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए यह स्थिति मुश्किल बनती जा रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार छोटे ज्वेलर्स पहले से ही ऊंची कीमतों और कमजोर मांग की वजह से संघर्ष कर रहे थे। अब बिक्री घटने और मुनाफा कम होने से उनकी स्थिति और खराब हो सकती है।
कई छोटे ज्वेलर्स अब पुराने सोने के एक्सचेंज मॉडल पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। यानी ग्राहक पुराने गहने देकर नया गहना खरीद रहे हैं। इससे दुकानदारों को नए स्टॉक की खरीद कम करनी पड़ रही है।
शादी सीजन से उम्मीद
हालांकि बाजार पूरी तरह निराश नहीं है। भारत में शादी सीजन के दौरान सोने की मांग हमेशा बनी रहती है। बड़े ज्वेलर्स को उम्मीद है कि वेडिंग सीजन में बिक्री दोबारा बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक परिवारों में सोना अभी भी निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का बड़ा माध्यम माना जाता है। इसलिए मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है।
क्या बढ़ सकती है सोने की तस्करी?
WGC ने अपनी रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण चिंता जताई है। जब भी भारत में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ती है, तब तस्करी बढ़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है। कविता चाको ने कहा कि 2013 से 2026 के बीच जब भी ड्यूटी बढ़ाई गई, उसके बाद छोटे स्तर पर गोल्ड स्मगलिंग बढ़ी। क्योंकि ज्यादा ड्यूटी होने से वैध आयात महंगा हो जाता है और अवैध रास्ते से सोना लाने वालों को फायदा मिलने लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच बड़ा अंतर लंबे समय तक बना रहता है, तो तस्करी का खतरा और बढ़ सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। जिन लोगों को शादी या जरूरत के लिए सोना खरीदना है, उनके लिए यह अच्छा मौका हो सकता है क्योंकि बाजार में डिस्काउंट और कम मेकिंग चार्ज दोनों मिल रहे हैं।
लेकिन निवेश के नजरिए से खरीदारी करने वालों को अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दरों और भारत की इंपोर्ट पॉलिसी पर नजर रखनी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
अगर मांग कमजोर बनी रहती है और बाजार में पुराने स्टॉक की बिक्री जारी रहती है, तो घरेलू बाजार में सोने पर डिस्काउंट कुछ समय तक और बना रह सकता है। हालांकि शादी सीजन और त्योहारी खरीदारी से बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव बढ़ता है या डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है। फिलहाल स्थिति यही है कि भारत में सोना अंतरराष्ट्रीय कीमतों से सस्ता बिक रहा है और ज्वेलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज तक घटाने को मजबूर हो गए हैं।
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