पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब शेयर बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों यानी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के शेयर 4% से 6% तक उछल गए।
दरअसल, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को फिर बढ़ोतरी की गई। यह पिछले दो हफ्तों के भीतर चौथी वृद्धि है। लगातार महंगे होते ईंधन ने जहां आम लोगों की चिंता बढ़ाई है, वहीं निवेशकों को उम्मीद है कि तेल कंपनियों के मार्जिन में सुधार हो सकता है। इसी वजह से इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी।
HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में कितना उछाल आया?
बीएसई पर सोमवार के कारोबार में तेल कंपनियों के शेयर मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे। Hindustan Petroleum Corporation Limited का शेयर करीब 5.86% की तेजी के साथ 412.55 रुपये के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। Bharat Petroleum Corporation Limited का शेयर 4.55% चढ़कर 309 रुपये के आसपास पहुंच गया। Indian Oil Corporation का शेयर भी 4% से अधिक मजबूत होकर 145.30 रुपये तक पहुंच गया।
शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि हालिया ईंधन मूल्य वृद्धि से इन कंपनियों की अंडर-रिकवरी कम होने की उम्मीद बनी है। लंबे समय तक सरकार के दबाव में कीमतें नियंत्रित रखने से इन कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ रहा था। अब कीमतों में बढ़ोतरी से इनके वित्तीय प्रदर्शन में सुधार की संभावना जताई जा रही है।
पेट्रोल-डीजल कितने महंगे हुए?
सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2.61 रुपये से 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई। इससे पहले भी पिछले दो हफ्तों में तीन बार कीमतें बढ़ चुकी थीं। अगर 15 मई से अब तक का आंकड़ा देखें तो पेट्रोल और डीजल करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजें, सब्जियां, दूध, ऑनलाइन डिलीवरी, टैक्सी और बस किराए तक महंगे हो सकते हैं।
क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। खासतौर पर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
विश्लेषकों के मुताबिक फरवरी के अंत से अब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा उछाल आ चुका है। ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों में लगातार तेजी देखी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या आपूर्ति बाधित होती है तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में तेल को लेकर चिंता बनी हुई है।
भारत पर कितना असर पड़ेगा?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
संभावित असर:
पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं, महंगाई दर बढ़ सकती है, परिवहन लागत बढ़ेगी, FMCG और लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, एयरलाइन और पेंट सेक्टर की लागत बढ़ सकती है, सरकार पर टैक्स घटाने का दबाव बन सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए महंगाई नियंत्रण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तेल कंपनियों के लिए क्यों पॉजिटिव है यह स्थिति?
हालांकि आम जनता के लिए ईंधन महंगा होना चिंता का विषय है, लेकिन तेल विपणन कंपनियों के लिए यह स्थिति कुछ हद तक राहत देने वाली मानी जा रही है।
पिछले कई महीनों से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद कंपनियां खुदरा कीमतों में उतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं कर पा रही थीं। इससे उनके मार्जिन पर दबाव बना हुआ था। अब कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनियों की कमाई बेहतर हो सकती है। भारत में लगभग 90% ईंधन बाजार पर IOC, BPCL और HPCL का नियंत्रण है। ऐसे में कीमतों में बदलाव का सबसे बड़ा असर इन्हीं कंपनियों पर पड़ता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल कंपनियों के शेयरों में अल्पकालिक तेजी बनी रह सकती है, लेकिन निवेशकों को कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सरकार की नीति पर नजर रखनी चाहिए।
अगर सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए टैक्स कटौती या मूल्य नियंत्रण जैसे कदम उठाती है तो इन कंपनियों के शेयरों पर असर पड़ सकता है। वहीं, अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
(पीटीआई इनपुट के साथ)
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