दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित और हाई-प्रोफाइल क्लबों में शामिल Delhi Gymkhana Club इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। वजह है केंद्र सरकार द्वारा इसकी जमीन की लीज रद्द किए जाने का मामला। लेकिन इस विवाद के बीच लोगों की दिलचस्पी एक और चीज में बढ़ गई है—आखिर यह क्लब कितना अमीर है?
लुटियंस दिल्ली के दिल में बसे इस क्लब की पहचान सिर्फ एक सोशल क्लब के रूप में नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे प्रभावशाली और एक्सक्लूसिव नेटवर्किंग सेंटर्स में भी गिना जाता है। यहां सदस्यता मिलना किसी “स्टेटस सिंबल” से कम नहीं माना जाता। क्लब की वेटिंग लिस्ट ही 20-30 साल तक लंबी बताई जाती है।
सेक्शन-8 कंपनी, लेकिन संपत्ति अरबों में
दिल्ली जिमखाना क्लब कानूनी तौर पर एक “नॉट-फॉर-प्रॉफिट” संस्था है। इसका रजिस्ट्रेशन कंपनी कानून 2013 की धारा-8 के तहत हुआ है। इसका मतलब यह है कि क्लब को होने वाला लाभ किसी शेयरहोल्डर में डिविडेंड के रूप में बांटा नहीं जा सकता। उस पैसे का उपयोग क्लब के संचालन, सुविधाओं और विस्तार पर ही किया जाता है। हालांकि “नॉन-प्रॉफिट” टैग के बावजूद इसकी वित्तीय स्थिति किसी बड़ी कॉरपोरेट संस्था से कम नहीं दिखाई देती।
कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय के पास दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार मार्च 2024 तक क्लब की नेटवर्थ करीब ₹129 करोड़ थी। खास बात यह है कि क्लब ने म्यूचुअल फंड्स में भारी निवेश कर रखा है। मार्च 2024 में इसका MF निवेश करीब ₹162 करोड़ था, जिसकी मौजूदा मार्केट वैल्यू बढ़कर लगभग ₹217 करोड़ तक पहुंच चुकी बताई जा रही है।
इसके अलावा क्लब के पास अलग-अलग बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट भी हैं, जिससे साफ है कि इसकी नकदी स्थिति काफी मजबूत है।
असली ताकत: लुटियंस दिल्ली की 27 एकड़ जमीन
दिल्ली जिमखाना क्लब की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी जमीन मानी जा रही है। क्लब करीब 27 एकड़ से ज्यादा इलाके में फैला हुआ है और यह पूरी जमीन देश के सबसे महंगे और पॉश इलाकों में गिने जाने वाले लुटियंस जोन में स्थित है।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस इलाके में एक एकड़ का बंगला या प्रीमियम जमीन खरीदने के लिए करीब ₹1000 करोड़ तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसी हिसाब से देखें तो क्लब की जमीन की अनुमानित वैल्यू ₹27,000 करोड़ से भी ज्यादा बैठती है।
यही कारण है कि इस क्लब को लेकर सरकार और प्रशासनिक स्तर पर हर फैसला बेहद संवेदनशील माना जाता है। इतनी महंगी सरकारी जमीन पर मौजूद किसी संस्था को लेकर विवाद स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाता है।
क्लब की कमाई और सरप्लस में जबरदस्त उछाल
मार्च 2024 तक उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक क्लब की आय में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसके कुल रेवेन्यू में 17 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ।

दिलचस्प बात यह रही कि खर्चों में सिर्फ 4.7 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि क्लब का सरप्लस लगभग 955 फीसदी तक बढ़ गया। इससे संकेत मिलता है कि क्लब की आय और निवेश प्रबंधन दोनों काफी मजबूत रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि हाई-एंड सदस्यता शुल्क, प्रीमियम सुविधाएं, इवेंट्स और निवेश से होने वाली कमाई इसकी वित्तीय स्थिति को लगातार मजबूत बना रही है।
100 साल से ज्यादा पुराना इतिहास
दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है। क्लब की स्थापना 3 जुलाई 1913 को हुई थी। शुरुआत में इसका नाम “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” रखा गया था। उस दौर में ब्रिटिश प्रशासन और उच्च अधिकारियों का यह प्रमुख सामाजिक केंद्र हुआ करता था। स्पेंसर हार्कोर्ट बटलर इसके पहले अध्यक्ष बताए जाते हैं। आजादी के बाद इसके नाम से “इम्पीरियल” शब्द हटा दिया गया और तब से इसे “दिल्ली जिमखाना क्लब” कहा जाने लगा।
आज भी यह क्लब देश के सबसे प्रतिष्ठित सोशल संस्थानों में गिना जाता है। यहां की सदस्यता बेहद सीमित है और मौजूदा समय में करीब 1200 सदस्य बताए जाते हैं।
सदस्य बनना लगभग नामुमकिन क्यों?
दिल्ली जिमखाना क्लब की सबसे बड़ी खासियत इसकी एक्सक्लूसिव सदस्यता मानी जाती है। यहां नए सदस्य बनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वेटिंग पीरियड 20 से 30 साल तक पहुंच सकता है।
यही वजह है कि इस क्लब की सदस्यता को सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि “एलीट स्टेटस” का प्रतीक माना जाता है। देश के बड़े उद्योगपति, वरिष्ठ नौकरशाह, पूर्व राजनयिक और प्रभावशाली परिवारों के लोग इससे जुड़े रहे हैं।
सरकार की कार्रवाई से क्यों बढ़ी चर्चा?
हाल में केंद्र सरकार द्वारा क्लब की जमीन की लीज रद्द करने के फैसले के बाद यह संस्था फिर सुर्खियों में आ गई है। हालांकि इस मामले का कानूनी और प्रशासनिक पहलू अभी आगे बढ़ सकता है, लेकिन इस विवाद ने क्लब की संपत्ति, नेटवर्क और प्रभाव को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।
दिल्ली के रियल एस्टेट और पावर सर्किल्स में यह क्लब हमेशा से एक खास पहचान रखता रहा है। अब जब इसकी जमीन और प्रशासनिक स्थिति चर्चा में है, तो आने वाले समय में यह मामला और बड़ा हो सकता है।
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