भारत की दिग्गज आईटी कंपनी Wipro के शेयरों में सोमवार को अच्छी तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर BSE पर करीब 2% से ज्यादा चढ़कर ₹207.60 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब कंपनी के ₹15,000 करोड़ के बड़े बायबैक की रिकॉर्ड डेट अब बेहद करीब आ गई है।
विप्रो ने अपने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों के साथ इस बायबैक का ऐलान किया था। खास बात यह है कि कंपनी निवेशकों से शेयर ₹250 प्रति शेयर के भाव पर वापस खरीदेगी, जो मौजूदा बाजार भाव से लगभग 20% ज्यादा है। यही वजह है कि निवेशकों की दिलचस्पी इस शेयर में तेजी से बढ़ती दिख रही है।
क्यों खास माना जा रहा है यह बायबैक?
भारतीय शेयर बाजार में बायबैक को अक्सर निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। जब कोई कंपनी अपने शेयर बाजार से वापस खरीदती है, तो इसका मतलब होता है कि कंपनी को अपने बिजनेस और भविष्य की कमाई पर भरोसा है। विप्रो का यह बायबैक कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बायबैक माना जा रहा है। कंपनी कुल ₹15,000 करोड़ खर्च करके करीब 60 करोड़ शेयर वापस खरीदेगी। यह कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग 5% से थोड़ा ज्यादा हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या कम होगी, जिससे भविष्य में प्रति शेयर कमाई (EPS) मजबूत हो सकती है। यही कारण है कि रिकॉर्ड डेट नजदीक आने के साथ शेयर में खरीदारी बढ़ती दिखाई दे रही है।
रिकॉर्ड डेट कब है?
कंपनी ने इस बायबैक के लिए शुक्रवार, 5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। रिकॉर्ड डेट का मतलब यह होता है कि इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होंगे, वही इस बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र माने जाएंगे।
यानी अगर कोई निवेशक इस ऑफर का फायदा उठाना चाहता है तो उसे रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदकर अपने डीमैट खाते में रखने होंगे।
₹250 प्रति शेयर का ऑफर क्यों आकर्षित कर रहा है?
विप्रो ने बायबैक प्राइस ₹250 प्रति शेयर तय किया है। अगर मौजूदा बाजार भाव ₹207-208 के आसपास देखा जाए तो निवेशकों को लगभग 20% तक का संभावित प्रीमियम मिल सकता है। यही वजह है कि कई शॉर्ट टर्म निवेशक भी इस स्टॉक पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बायबैक में सभी शेयर स्वीकार नहीं किए जाते। कंपनी एक निश्चित संख्या तक ही शेयर खरीदती है। ऐसे में निवेशकों को “Acceptance Ratio” पर भी ध्यान देना चाहिए।
छोटे निवेशकों के लिए क्या फायदा?
SEBI के नियमों के तहत किसी भी बायबैक ऑफर का 15% हिस्सा छोटे शेयरधारकों (Retail Investors) के लिए आरक्षित रखना जरूरी होता है। विप्रो के मामले में लगभग ₹2,250 करोड़ का हिस्सा छोटे निवेशकों के लिए रिजर्व रहेगा। यहां छोटे निवेशक का मतलब उन शेयरधारकों से है जिनके पास रिकॉर्ड डेट तक ₹2 लाख या उससे कम मूल्य के शेयर हैं।
इससे रिटेल निवेशकों के शेयर स्वीकार होने की संभावना अपेाकृत ज्यादा रहती है। यही कारण है कि कई निवेशक बायबैक रिकॉर्ड डेट से पहले ऐसे शेयरों में पोजिशन लेते हैं।
कंपनी के नतीजे कैसे रहे?
विप्रो ने FY26 की चौथी तिमाही में मजबूत मुनाफा दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध लाभ पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% बढ़कर ₹3,502 करोड़ हो गया। हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ अपेाकृत सीमित रही और कंपनी की आय ₹24,236 करोड़ के आसपास रही। आईटी सेक्टर में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी की मुनाफाखोरी में सुधार को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
आईटी सेक्टर के लिए क्या संकेत?
पिछले कुछ समय से भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका और यूरोप की धीमी आर्थिक स्थिति, कमजोर टेक खर्च और डील्स में देरी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
ऐसे माहौल में बड़ी कंपनियों द्वारा बायबैक लाना यह संकेत देता है कि उनके पास मजबूत कैश रिजर्व मौजूद है। विप्रो का यह कदम निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाली तिमाहियों में वैश्विक टेक खर्च सुधरता है, तो आईटी सेक्टर में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
बायबैक पर टैक्स नियम बदल गए
1 अप्रैल 2026 से बायबैक पर टैक्स का नियम पूरी तरह बदल गया है। पहले कंपनियां बायबैक टैक्स देती थीं और निवेशकों को मिलने वाली रकम काफी हद तक टैक्स-फ्री होती थी। लेकिन अब सरकार ने व्यवस्था बदल दी है।
नई व्यवस्था के तहत अब निवेशकों को सीधे टैक्स देना होगा। बायबैक से होने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन्स की तरह माना जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे शेयर बाजार में शेयर बेचने पर टैक्स लगता है। इस बदलाव का मकसद टैक्स सिस्टम में मौजूद खामियों को खत्म करना और बायबैक को डिविडेंड टैक्सेशन के करीब लाना बताया जा रहा है।
निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बायबैक में निवेश करने से पहले सिर्फ प्रीमियम देखकर फैसला लेना सही नहीं माना जाता। निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- Acceptance Ratio कितना रह सकता है
- रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर में कितनी तेजी आ चुकी है
- टैक्स का असर कितना पड़ेगा
- बायबैक के बाद शेयर में गिरावट का जोखिम
- कंपनी के लॉन्ग टर्म बिजनेस फंडामेंटल
अगर किसी निवेशक का नजरिया लंबी अवधि का है, तो उसे कंपनी के बिजनेस प्रदर्शन, ऑर्डर बुक और आईटी सेक्टर की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
क्या आगे और तेजी आ सकती है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिकॉर्ड डेट तक शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बायबैक प्राइस और मौजूदा मार्केट प्राइस के बीच बड़ा अंतर होने की वजह से ट्रेडर्स की दिलचस्पी बनी रह सकती है।
हालांकि रिकॉर्ड डेट के बाद अक्सर ऐसे शेयरों में मुनाफावसूली भी देखने को मिलती है। इसलिए निवेशकों को केवल तेजी देखकर एंट्री लेने से बचना चाहिए और अपनी जोखिम क्षमता के हिसाब से फैसला करना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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