भारत सरकार ने चीनी निर्यात पर प्रतिबंध जारी रहने के बावजूद अमेरिका को विशेष TRQ (Tariff Rate Quota) व्यवस्था के तहत 8,606 टन कच्ची गन्ना चीनी निर्यात करने की अनुमति दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्यात 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक किया जाएगा और इस पर सामान्य निर्यात प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए निर्यात पर सख्त नीति अपनाए हुए है। हालांकि, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत के पुराने व्यापार समझौतों के तहत कुछ विशेष कोटे को प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
क्या है TRQ कोटा?
TRQ यानी Tariff Rate Quota एक ऐसी व्यापार व्यवस्था होती है जिसमें किसी देश को सीमित मात्रा में उत्पाद कम शुल्क या विशेष छूट के साथ निर्यात करने की अनुमति दी जाती है। भारत और अमेरिका के बीच चीनी व्यापार को लेकर लंबे समय से यह व्यवस्था लागू है।
DGFT की अधिसूचना के अनुसार, अमेरिका को भेजी जाने वाली 8,606 मीट्रिक टन कच्ची गन्ना चीनी इसी TRQ कोटे के तहत आएगी। इसका मतलब है कि इस मात्रा पर सामान्य निर्यात प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
DGFT ने क्या कहा?
विदेश व्यापार नीति 2023 के अनुच्छेद 2.04 के तहत जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ को TRQ व्यवस्था के तहत चीनी निर्यात जारी रहेगा। यह व्यवस्था अधिसूचना संख्या 3/2015-20 (20 अप्रैल 2015) के नियमों के अनुसार लागू होगी। निर्यात केवल निर्धारित मात्रा और पात्र निर्यातकों तक सीमित रहेगा।
सरकार ने साफ किया है कि यह छूट केवल व्यापार समझौतों के तहत निर्धारित कोटे के लिए है और सामान्य चीनी निर्यात पर प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेगा।
APEDA की भूमिका क्या होगी?
अगर अमेरिका को निर्यात के लिए Certificate of Origin यानी मूल प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है, तो इसे DGFT मुंबई कार्यालय द्वारा जारी किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) की सिफारिशों के आधार पर मिलेगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र निर्यातक ही निर्धारित कोटे का लाभ उठा सकें और निर्यात प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
भारत ने चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में घरेलू मांग, एथेनॉल उत्पादन और मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण सरकार ने चीनी स्टॉक को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है।
सरकार का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर चीनी निर्यात की अनुमति दी गई, तो घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसी वजह से जून 2022 में पहली बार चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे बाद में कई बार बढ़ाया गया। अब यह प्रतिबंध सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
किन प्रकार की चीनी पर लागू है बैन?
सरकार ने निम्न प्रकार की चीनी के निर्यात पर रोक लगाई हुई है कच्ची चीनी (Raw Sugar), सफेद चीनी (White Sugar), रिफाइंड चीनी (Refined Sugar) हालांकि, अमेरिका और यूरोपीय संघ के लिए CXL और TRQ कोटा के तहत सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति बनी हुई है।
घरेलू बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि 8,606 टन चीनी का निर्यात भारत के कुल उत्पादन की तुलना में बहुत कम है, इसलिए इससे घरेलू कीमतों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। भारत हर साल करोड़ों टन चीनी का उत्पादन करता है। ऐसे में सीमित TRQ कोटा के तहत अमेरिका को निर्यात करने से व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं पूरी होंगी, घरेलू बाजार में आपूर्ति पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा हालांकि, अगर भविष्य में सरकार बड़े पैमाने पर निर्यात की अनुमति देती है, तो घरेलू चीनी कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
अमेरिका के लिए यह कोटा क्यों महत्वपूर्ण है?
अमेरिका अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से सीमित मात्रा में चीनी आयात करता है। भारत को मिलने वाला TRQ कोटा इसी नीति का हिस्सा है। इससे अमेरिकी बाजार में नियंत्रित कीमतों पर चीनी उपलब्ध कराई जाती है।
भारत के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे निर्यातकों को अमेरिकी बाजार तक पहुंच मिलती है, जो दुनिया के बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है।
क्या भविष्य में निर्यात बैन हट सकता है?
फिलहाल सरकार ने सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात प्रतिबंध जारी रखने का फैसला किया है। लेकिन आगे का निर्णय कई कारकों पर निर्भर करेगा मानसून और गन्ना उत्पादन, घरेलू चीनी स्टॉक, एथेनॉल ब्लेंडिंग की मांग, महंगाई और खाद्य कीमतें अगर उत्पादन बेहतर रहता है और स्टॉक पर्याप्त रहता है, तो सरकार भविष्य में सीमित निर्यात की अनुमति दे सकती है।
निष्कर्ष
भारत ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों को स्थिर रखने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों के तहत TRQ कोटे को छूट दी गई है। इसी व्यवस्था के तहत भारत अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक अमेरिका को 8,606 टन कच्ची गन्ना चीनी निर्यात करेगा।
यह कदम एक तरफ भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है, वहीं दूसरी ओर घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति और कीमतों के संतुलन को बनाए रखने की कोशिश भी करता है।
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