Highlights
- भारत और कनाडा के बीच FTA को लेकर फिर तेज हुई चर्चा
- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल 150 उद्योगपतियों के साथ करेंगे कनाडा दौरा
- भारत में करीब 600 कनाडाई कंपनियां कर रही हैं कारोबार
- दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना
- ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों पर रहेगा फोकस
नई दिल्ली। भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से अटकी मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता एक बार फिर गति पकड़ती नजर आ रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal 25 से 27 मई के बीच कनाडा का दौरा करेंगे। इस दौरे को दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। खास बात यह है कि उनके साथ करीब 150 भारतीय उद्योगपतियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा, जो कनाडा के व्यापारिक संगठनों और निवेशकों के साथ कई अहम बैठकों में हिस्सा लेगा।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पिछले कुछ समय से राजनयिक तनाव के कारण भारत और कनाडा के रिश्तों में ठंडापन देखा गया था। अब दोनों देश व्यापार और निवेश के जरिए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
A Free Trade Agreement between India & Canada will unlock massive investment opportunities for our country and contribute to the mutual growth of both nations. 🇮🇳🤝🇨🇦 pic.twitter.com/mnMHCMq6q2
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) May 23, 2026 भारत-कनाडा FTA पर बढ़ी उम्मीदें
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि आने वाले समय में कनाडा के साथ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता किया जा सकता है। इस समझौते में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), टेक्नोलॉजी, खाद्य प्रसंस्करण और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता होता है तो भारतीय टेक्सटाइल, चमड़ा, फार्मा और इंजीनियरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। वहीं कनाडा को भारत जैसे विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
मार्च में बनी थी सहमति
मार्च 2026 में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के नई दिल्ली दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement) के लिए “Terms of Reference” को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई थी।
इसी के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत में तेजी आई है। अब पीयूष गोयल का दौरा उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
किन सेक्टरों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?
इस दौरे में जिन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा चर्चा होने की संभावना है, उनमें शामिल हैं स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), टेक्नोलॉजी और AI, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट, कृषि व्यापार.
कनाडा लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा स्रोत माना जाता है। भारत इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी सेक्टर को तेजी से बढ़ा रहा है, ऐसे में कनाडा भारत के लिए रणनीतिक साझेदार बन सकता है।
भारत में 600 कनाडाई कंपनियां कर रही हैं काम
पीयूष गोयल ने बताया कि इस समय लगभग 600 कनाडाई कंपनियां भारत में सक्रिय हैं। इनमें बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस संख्या को बढ़ाकर 1,000 तक पहुंचाना है। कनाडा के पेंशन फंड और निवेशकों ने भारत में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक कनाडाई निवेशकों का भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और रियल एस्टेट सेक्टर में भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और कनाडा ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी इसकी संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। भारत कनाडा से मुख्य रूप से दालें, उर्वरक, लकड़ी, खनिज आयात करता है।
वहीं भारत कनाडा को फार्मास्युटिकल उत्पाद, कपड़ा, मशीनरी, आईटी सेवाएं निर्यात करता है।
भारतीय कंपनियों को क्या फायदा होगा?
अगर भारत-कनाडा FTA होता है तो भारतीय कंपनियों को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं:
1. एक्सपोर्ट सस्ता होगा
कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम हो सकता है, जिससे भारतीय सामान कनाडा में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
2. टेक और स्टार्टअप सेक्टर को बढ़ावा
AI, फिनटेक और क्लीन टेक सेक्टर में भारतीय कंपनियों को नए निवेश और साझेदारी के अवसर मिल सकते हैं।
3. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निर्यात बढ़ने से नौकरियां बढ़ सकती हैं।
4. महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई मजबूत होगी
EV और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
राजनयिक तनाव के बाद नया मोड़
भारत और कनाडा के संबंध पिछले कुछ समय में राजनीतिक और राजनयिक कारणों से तनावपूर्ण रहे थे। हालांकि अब दोनों देश आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देते हुए संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और चीन पर बढ़ती निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच भारत और कनाडा एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बन सकते हैं।
आगे क्या?
पीयूष गोयल के कनाडा दौरे के दौरान कई व्यापारिक बैठकों और निवेश चर्चाओं का आयोजन होगा। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच FTA पर औपचारिक वार्ता और तेज हो सकती है। अगर यह समझौता सफल रहता है तो यह भारत के लिए यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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