दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई बड़े शहरों में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी (CNG) उपभोक्ताओं को भी बड़ा झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने शनिवार को सीएनजी की कीमतों में फिर इजाफा कर दिया। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों से लेकर टैक्सी और ऑटो चालकों तक की चिंता बढ़ा दी है।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई देने लगा है। भारत का क्रूड ऑयल आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी जैसे ईंधनों पर पड़ रहा है।
दिल्ली-NCR में CNG के नए दाम
IGL की ओर से जारी नई दरों के अनुसार सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में पहली बार सीएनजी का रेट 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है।
नई कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | नई कीमत |
|---|---|
| दिल्ली | ₹81.09 प्रति किलोग्राम |
| नोएडा | ₹89.70 प्रति किलोग्राम |
| ग्रेटर नोएडा | ₹89.70 प्रति किलोग्राम |
| गाजियाबाद | ₹89.70 प्रति किलोग्राम |
| गुरुग्राम | ₹86.12 प्रति किलोग्राम |
इससे पहले 15 मई को सीएनजी ₹2 प्रति किलो महंगी हुई थी, 17 मई को फिर ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई अब शनिवार को फिर ₹1 प्रति किलो का इजाफा कर दिया गया यानी केवल 10 दिनों में सीएनजी ₹4 प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है।
क्यों बढ़ रहे हैं CNG के दाम?
#WATCH | CNG prices increase by Rs 1 per kg, to Rs 81.09 per kg in Delhi, with effect from today, 23rd May. Visuals from a fuel pump in RK Puram area. pic.twitter.com/97vbrLbJfI
— ANI (@ANI) May 23, 2026 विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
कुछ महीने पहले तक क्रूड ऑयल 70-72 डॉलर प्रति बैरल था युद्ध के दौरान यह 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया फिलहाल कीमतें 104-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं भारत का अपना क्रूड ऑयल बास्केट भी तेजी से महंगा हुआ है। फरवरी में जहां भारतीय क्रूड बास्केट लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब यह बढ़कर औसतन 113-114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली हर बड़ी हलचल का असर सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
सीएनजी की कीमत बढ़ने का असर सबसे पहले दिल्ली-एनसीआर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर दिखाई देगा। राजधानी और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी, कैब, स्कूल वैन, छोटे कमर्शियल वाहन सीएनजी पर चलते हैं।
ईंधन महंगा होने से इन वाहनों की परिचालन लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में ऑटो किराया बढ़ सकता है, कैब सर्विस महंगी हो सकती है, स्कूल ट्रांसपोर्ट फीस बढ़ सकती है, लोकल डिलीवरी खर्च भी महंगा हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
टैक्सी यूनियनों का विरोध तेज
ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों का विरोध भी तेज हो गया है। कई ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और चालक शक्ति यूनियन समेत कई संगठनों का कहना है कि कमाई स्थिर है, किराये नहीं बढ़े लेकिन ईंधन और रखरखाव खर्च लगातार बढ़ रहा है यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन और हड़ताल की जा सकती है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट तनाव कम नहीं होता, कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती, डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत नहीं होता तब तक भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
रुपये की कमजोरी भी भारत के लिए बड़ी चिंता है क्योंकि डॉलर महंगा होने पर तेल आयात और अधिक महंगा पड़ता है। इससे पेट्रोल, डीजल और गैस कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।
महंगाई पर भी बढ़ेगा दबाव
सीएनजी और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर सब्जियों, दूध, राशन, ऑनलाइन डिलीवरी, निर्माण सामग्री, छोटे कारोबार पर भी पड़ सकता है।
जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो सामान की ढुलाई लागत बढ़ती है और आखिरकार इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने का संकेत मान रहे हैं।
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