अमेरिका में गौतम अदाणी और अदाणी समूह से जुड़े मामलों पर चल रही कानूनी अनिश्चितता खत्म होने के बाद विदेशी निवेशकों का भरोसा तेजी से लौटता दिखाई दे रहा है। इसी बीच दुनिया की दिग्गज निवेश प्रबंधन कंपनी Capital Group ने अदाणी समूह की कंपनियों में 2 अरब डॉलर (करीब ₹20 हजार करोड़) से ज्यादा का बड़ा निवेश कर बाजार को चौंका दिया है। खास बात यह है कि इसी दौरान फर्म ने Reliance Industries में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है।
विदेशी निवेशकों की यह रणनीति केवल शेयर खरीदने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत के दो सबसे बड़े कारोबारी समूहों के बीच बदलते निवेश रुझान के तौर पर भी देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक साल में अदाणी समूह की कंपनियों में आई जबरदस्त तेजी और कानूनी विवादों में राहत ने बड़े ग्लोबल फंड्स का भरोसा बढ़ाया है।
SEC केस बंद होने के बाद बदला माहौल
अमेरिका के न्याय विभाग और SEC से जुड़े मामलों में राहत मिलने के बाद अदाणी समूह के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इसे एक बड़े सकारात्मक संकेत के रूप में लिया।
इसी माहौल में कैपिटल ग्रुप ने हाल के हफ्तों में अदाणी समूह की तीन प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी। जानकारी के मुताबिक फर्म ने: Adani Ports and Special Economic Zone में करीब 2% हिस्सेदारी खरीदी, Adani Power में 1.5% से 2% तक निवेश बढ़ाया, Adani Green Energy में भी हिस्सेदारी खरीदी.
BSE ब्लॉक-डील डेटा के अनुसार 5 मई को कैपिटल ग्रुप ने ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए अदाणी पोर्ट्स में लगभग ₹7,486 करोड़ का निवेश किया। यह अकेला सौदा ही बाजार में चर्चा का बड़ा विषय बन गया।
क्यों बढ़ रहा है अदाणी समूह पर भरोसा?
पिछले डेढ़ साल में अदाणी समूह ने कई मोर्चों पर वापसी की है।
1. कर्ज घटाने की रणनीति
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद समूह ने: कर्ज कम करने, नकदी स्थिति मजबूत करने, और विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटाने पर फोकस किया।
2. बिजनेस विस्तार जारी
अदाणी समूह: ग्रीन एनर्जी, पोर्ट्स, डेटा सेंटर, एयरपोर्ट, और पावर सेक्टर में लगातार निवेश बढ़ा रहा है।
3. शेयरों में शानदार रिटर्न
पिछले एक साल में: अदाणी पावर करीब 98% चढ़ा, अदाणी ग्रीन एनर्जी में लगभग 40% तेजी अदाणी पोर्ट्स में 30% से ज्यादा उछाल ने विदेशी फंड्स का ध्यान खींचा। विश्लेषकों का कहना है कि हाई ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर थीम पर दांव लगाने वाले ग्लोबल निवेशक अब अदाणी समूह को लंबे समय के अवसर के तौर पर देख रहे हैं।
दूसरी तरफ रिलायंस में हिस्सेदारी क्यों घटी?
जहां अदाणी समूह में निवेश बढ़ रहा है, वहीं Reliance Industries में कैपिटल ग्रुप की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार: मार्च 2017 में फर्म के पास रिलायंस के लगभग 755 मिलियन शेयर थे, छह साल पहले यह आंकड़ा करीब 500 मिलियन था, मार्च 2026 तक यह घटकर करीब 142 मिलियन शेयर रह गया हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी निवेशक रिलायंस से पूरी तरह बाहर हो रहे हैं। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह “पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग” की रणनीति भी हो सकती है, जहां निवेशक तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर्स में ज्यादा एक्सपोजर बढ़ाते हैं।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस घटनाक्रम से तीन बड़े संकेत मिलते हैं:
विदेशी फंड्स का भरोसा लौट रहा
SEC विवाद खत्म होने के बाद ग्लोबल निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी थीम मजबूत
विदेशी निवेशक भारत के: पोर्ट्स, ग्रीन एनर्जी, बिजली, और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में लंबी अवधि की ग्रोथ देख रहे हैं।
अदाणी बनाम अंबानी निवेश ट्रेंड चर्चा में
भारत के दो सबसे बड़े कारोबारी समूहों के बीच विदेशी निवेश का बदलता संतुलन बाजार में नई बहस पैदा कर रहा है।
बाजार विशेषज्ञ क्या मान रहे हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार विदेशी फंड्स फिलहाल उन कंपनियों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं जहां: कैपेक्स तेजी से बढ़ रहा हो, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का फायदा मिले, और अगले 5-10 साल में हाई ग्रोथ की संभावना हो।
अदाणी समूह फिलहाल इन तीनों थीम पर मजबूत दिखाई दे रहा है। हालांकि विश्लेषक यह भी मानते हैं कि रिलायंस अभी भी भारत की सबसे मजबूत और विविध कारोबार वाली कंपनियों में शामिल है।
निष्कर्ष
अमेरिकी SEC विवाद खत्म होने के बाद अदाणी समूह को लेकर वैश्विक निवेशकों का नजरिया तेजी से बदलता दिख रहा है। कैपिटल ग्रुप का ₹20 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश यह संकेत देता है कि बड़े विदेशी फंड अब अदाणी समूह को फिर से आक्रामक ग्रोथ स्टोरी के रूप में देख रहे हैं।
दूसरी ओर रिलायंस में हिस्सेदारी घटाना यह दिखाता है कि ग्लोबल निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में नई प्राथमिकताएं तय कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विदेशी निवेश का यह रुझान भारतीय शेयर बाजार में किस तरह का बड़ा बदलाव लाता है।
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