पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच महाराष्ट्र में लोगों ने बड़े पैमाने पर पेट्रोल और डीजल की खरीदारी शुरू कर दी। इसका असर यह हुआ कि मई 2026 के पहले पखवाड़े में राज्य में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्य सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए लोगों से घबराहट में खरीदारी न करने की अपील की है।
महाराष्ट्र के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार, मई के पहले 15 दिनों में डीजल की बिक्री में 19.66 प्रतिशत और पेट्रोल की बिक्री में 20.39 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विभाग का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते लोगों में ईंधन की कमी की आशंका बढ़ी, जिसके कारण कई जिलों में सामान्य से कहीं अधिक खरीदारी देखने को मिली।
क्यों बढ़ी अचानक ईंधन की मांग?
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। भारत भी अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लोगों को आशंका होने लगी कि यदि वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई तो पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
इसी डर की वजह से महाराष्ट्र के कई जिलों में लोगों ने जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाना शुरू कर दिया। कई जगह पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें तक देखने को मिलीं।
केवल 19 मई को ही बिक्री में बड़ा उछाल
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 19 मई को अकेले महाराष्ट्र में डीजल की बिक्री औसत दैनिक बिक्री की तुलना में 42 प्रतिशत तक बढ़ गई। वहीं पेट्रोल की बिक्री भी 21 प्रतिशत अधिक रही। यह बताता है कि लोगों में अचानक घबराहट कितनी तेजी से फैली।
राज्य के कई जिलों में यह असर ज्यादा देखने को मिला। अकोला, वाशिम, जलगांव, बीड, लातूर, धाराशिव, जालना और छत्रपति संभाजीनगर जैसे जिलों में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक मांग दर्ज की गई।
किन जिलों में सबसे ज्यादा बढ़ी पेट्रोल बिक्री?
महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल की बिक्री में सबसे ज्यादा वृद्धि वाशिम जिले में दर्ज हुई। यहां सामान्य दैनिक खपत की तुलना में बिक्री 42 प्रतिशत अधिक रही।
इसके अलावा:
- जलगांव में 40 प्रतिशत वृद्धि
- अकोला में 28 प्रतिशत वृद्धि
- छत्रपति संभाजीनगर और बीड में 27-27 प्रतिशत वृद्धि
- धाराशिव में 19 प्रतिशत वृद्धि
- बुलढाणा में 18 प्रतिशत वृद्धि
- हिंगोली में 16 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई
वहीं लातूर में सबसे कम पांच प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली।
डीजल बिक्री में अकोला सबसे आगे
डीजल की खरीदारी में सबसे बड़ा उछाल अकोला जिले में देखा गया, जहां बिक्री औसत दैनिक स्तर से 111 प्रतिशत तक बढ़ गई। इसके बाद वाशिम में 109 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
अन्य जिलों में स्थिति इस प्रकार रही:
- जलगांव में 72 प्रतिशत वृद्धि
- बीड में 63 प्रतिशत वृद्धि
- लातूर और धाराशिव में 50-50 प्रतिशत वृद्धि
- छत्रपति संभाजीनगर में 49 प्रतिशत वृद्धि
- हिंगोली में 46 प्रतिशत वृद्धि
- जालना में 43 प्रतिशत वृद्धि
यह आंकड़े दिखाते हैं कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी ईंधन को लेकर चिंता काफी तेजी से फैली।
सरकार ने क्या कहा?
महाराष्ट्र सरकार ने साफ किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री Chhagan Bhujbal ने कहा कि राज्य में पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन जमा करने की कोशिश न करें। सरकार का कहना है कि घबराहट में खरीदारी करने से सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव बनता है और कृत्रिम संकट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक सप्लाई स्रोत मौजूद हैं।
भारत पहले ही रूस, यूएई और वेनेजुएला जैसे देशों से आयात बढ़ाने की दिशा में कदम उठा चुका है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से: दूध और सब्जियों की कीमतें बढ़ सकती हैं, बस और कैब किराया महंगा हो सकता है, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है, महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है यही वजह है कि पश्चिम एशिया संकट पर भारत समेत दुनिया भर की नजर बनी हुई है।
(पीटीआई इनपुट के साथ)
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