प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया इटली दौरे के बाद सोशल मीडिया पर एक छोटी सी टॉफी ने बड़ा बवाल मचा दिया। पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को मशहूर मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया, जिसके बाद इंटरनेट पर “Melody” अचानक ट्रेंड करने लगी। लेकिन इस वायरल मोमेंट का सबसे बड़ा फायदा उस कंपनी को मिला जिसका मेलोडी टॉफी से कोई लेना-देना ही नहीं है।
दरअसल, शेयर बाजार में लिस्टेड माइक्रोकैप कंपनी Parle Industries के शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गया। कई रिटेल निवेशकों ने नाम में “Parle” देखकर इसे मशहूर बिस्कुट और कैंडी बनाने वाली कंपनी से जोड़ लिया, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
लगातार तीसरे दिन अपर सर्किट
बीएसई पर पारले इंडस्ट्रीज का शेयर शुक्रवार को फिर 5 फीसदी के अपर सर्किट के साथ 5.78 रुपये पर पहुंच गया। पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन में यह शेयर करीब 16 फीसदी उछल चुका है। कंपनी का मार्केट कैप भी बढ़कर लगभग 28 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
हालांकि, यह तेजी किसी मजबूत बिजनेस प्रदर्शन या बड़े ऑर्डर की वजह से नहीं आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी तरह “नेम कन्फ्यूजन रैली” है, जहां निवेशकों ने कंपनी के नाम को मशहूर पारले ब्रांड से जोड़ दिया।
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— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) May 20, 2026 मेलोडी टॉफी से क्या है कनेक्शन?
असल कहानी पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात से शुरू हुई। इटली दौरे के दौरान मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की। बाद में मेलोनी ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद भारत में “Melody” और “Parle” अचानक चर्चा में आ गए।
सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने यह जानना शुरू कर दिया कि मेलोडी बनाने वाली कंपनी कौन सी है और क्या उसका शेयर बाजार में कोई स्टॉक उपलब्ध है। इसी दौरान कई निवेशकों की नजर पारले इंडस्ट्रीज पर पड़ी और खरीदारी शुरू हो गई।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि:
पारले इंडस्ट्रीज का मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
क्या करती है पारले इंडस्ट्रीज?
मुंबई स्थित Parle Industries मुख्य रूप से: इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, पेपर वेस्ट रिसाइक्लिंग जैसे कारोबार में सक्रिय है। कंपनी का FMCG या कन्फेक्शनरी बिजनेस से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद केवल नाम की समानता के कारण इसमें अचानक ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ गया।
ऐसे मामलों को शेयर बाजार में अक्सर “Mistaken Identity Rally” कहा जाता है। भारतीय बाजार में पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है जब किसी चर्चित ब्रांड से मिलता-जुलता नाम होने पर छोटी कंपनियों के शेयर अचानक भागने लगते हैं।
असली कंपनी कौन है?
मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी Parle Products है, जो भारत की सबसे पुरानी FMCG कंपनियों में गिनी जाती है। यही कंपनी: पारले-जी बिस्कुट, मेलोडी टॉफी, Monaco, KrackJack, Hide & Seek जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट बनाती है।
कंपनी की शुरुआत 1929 में “House of Parle” के रूप में हुई थी। बाद में यह ग्रुप अलग-अलग हिस्सों में बंट गया। मेलोडी टॉफी को पहली बार 1983 में लॉन्च किया गया था और आज भी यह भारत की सबसे लोकप्रिय कैंडी ब्रांड्स में शामिल है।
क्या पारले प्रोडक्ट्स शेयर बाजार में लिस्टेड है?
नहीं। Parle Products अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट ने हाल में कहा कि फिलहाल लिस्टिंग की कोई योजना नहीं है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ने के बाद निवेशकों ने गलती से पारले इंडस्ट्रीज में खरीदारी शुरू कर दी।
निवेशकों के लिए क्या सबक?
यह घटना रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा सबक भी है। केवल कंपनी का नाम देखकर निवेश करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले यह जरूर जांचना चाहिए कि:
- कंपनी का असली बिजनेस क्या है?
- उसका ब्रांड से संबंध है या नहीं?
- फाइनेंशियल प्रदर्शन कैसा है?
- प्रमोटर और कारोबार की विश्वसनीयता क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोकैप शेयरों में ऐसी तेजी अक्सर टिकाऊ नहीं होती और बाद में भारी गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
सोशल मीडिया और शेयर बाजार का नया ट्रेंड
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया ट्रेंड्स का असर शेयर बाजार पर तेजी से बढ़ा है। किसी वायरल वीडियो, मीम, राजनीतिक बयान या ब्रांड चर्चा का असर छोटे शेयरों में तुरंत दिखाई देने लगा है।
अमेरिका में GameStop और AMC जैसे उदाहरण पहले सामने आ चुके हैं। भारत में भी अब रिटेल निवेशक सोशल मीडिया ट्रेंड्स के आधार पर तेजी से ट्रेडिंग करने लगे हैं। ऐसे में गलतफहमी आधारित रैली की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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