ईरान-इजरायल तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल या एलपीजी सिलेंडर तक सीमित नहीं रही है। इसका असर धीरे-धीरे रोजमर्रा की कई चीजों पर दिखने लगा है। अब इस लिस्ट में कंडोम भी शामिल हो सकता है। भारत की सबसे बड़ी कंडोम कंपनियों में शामिल मैनकाइंड फार्मा ने संकेत दिए हैं कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो आने वाले समय में Manforce कंडोम की कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।
यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में कंडोम बाजार का बड़ा हिस्सा लो-कॉस्ट और अफोर्डेबल प्रोडक्ट्स पर आधारित है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर करोड़ों ग्राहकों को प्रभावित कर सकती है।
आखिर कच्चे तेल का कंडोम से क्या संबंध?
पहली नजर में यह सुनकर अजीब लग सकता है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से कंडोम महंगे हो सकते हैं। लेकिन इंडस्ट्री के जानकार बताते हैं कि कंडोम निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट पेट्रोलियम आधारित होते हैं।
हालांकि कंडोम का मुख्य कच्चा माल नेचुरल लेटेक्स होता है, लेकिन इसके अलावा: लुब्रिकेंट, पैकेजिंग मटेरियल, कुछ केमिकल कंपाउंड, सिंथेटिक एडिटिव्स, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इन सभी में पेट्रोलियम आधारित सामग्री का उपयोग होता है। जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो इन सभी चीजों की लागत बढ़ जाती है। इससे कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ने लगता है।
मैनकाइंड फार्मा ने क्या कहा?
भारत में Manforce ब्रांड बेचने वाली मैनकाइंड फार्मा की बाजार हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी बताई जाती है। कंपनी के सीईओ शीतल अरोड़ा ने संकेत दिया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिली तो कंपनी को कीमतें बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है।
कंपनी का कहना है कि वह बेहद कम मार्जिन पर कारोबार करती है। ऐसे में कच्चे माल की लागत बढ़ने का असर सीधे प्रोडक्ट की कीमतों पर पड़ता है। खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन पहले से दबाव में हो।
कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें?
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक कंडोम की कीमतों में 20% से 30% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, शिपिंग लागत बढ़ सकती है, पेट्रोकेमिकल उत्पाद महंगे हो सकते हैं. इन सबका असर FMCG और हेल्थकेयर सेक्टर पर दिखाई देगा।
दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम कंपनी ने भी दिया संकेत
मलेशिया की कंपनी Karex दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनियों में गिनी जाती है। यह करीब 130 देशों में अपने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करती है। कंपनी पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह अपने उत्पादों की कीमतों में 20% से 30% तक बढ़ोतरी कर सकती है।
Karex का यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यह केवल भारत की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी ग्लोबल इंडस्ट्री लागत दबाव का सामना कर रही है।
सिर्फ कंडोम नहीं, कई FMCG प्रोडक्ट्स पर असर
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में कई FMCG और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। क्योंकि पैकेजिंग, प्लास्टिक, केमिकल और ट्रांसपोर्टेशन की लागत लगभग हर इंडस्ट्री में जुड़ी हुई है।
इसका असर इन सेक्टर्स पर भी पड़ सकता है: दवाइयां, कॉस्मेटिक्स, पैकेज्ड फूड, प्लास्टिक उत्पाद, मेडिकल सप्लाई.
भारत में क्यों अहम है यह मुद्दा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है और यहां बड़ी आबादी लो-कॉस्ट हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स पर निर्भर करती है। ऐसे में कंडोम जैसे जरूरी प्रोडक्ट की कीमत बढ़ना केवल FMCG खबर नहीं बल्कि पब्लिक हेल्थ से जुड़ा मामला भी माना जा रहा है।
सरकारी और स्वास्थ्य एजेंसियां लंबे समय से सुरक्षित यौन संबंधों को बढ़ावा देती रही हैं। यदि कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो इसका असर मांग पर भी पड़ सकता है।
क्या आगे और बढ़ सकती हैं दिक्कतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि अभी बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। ईरान-इजरायल तनाव बढ़ने पर: तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, सप्लाई चेन महंगी हो सकती है, रुपए पर दबाव बढ़ सकता है, आयात लागत बढ़ सकती है ऐसे में आने वाले समय में कई कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
निष्कर्ष
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहा। पेट्रोल-डीजल से शुरू हुई महंगाई अब रोजमर्रा की कई चीजों तक पहुंच रही है। कंडोम जैसी हेल्थकेयर कैटेगरी में संभावित प्राइस हाइक यह दिखाती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव किस तरह आम उपभोक्ता की जिंदगी को प्रभावित करता है। आने वाले हफ्तों में तेल बाजार की दिशा तय करेगी कि यह महंगाई अस्थायी रहेगी या फिर उपभोक्ताओं को लंबे समय तक ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
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