भारत में लोगों के कर्ज लेने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक जहां पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड सबसे लोकप्रिय विकल्प माने जाते थे, वहीं अब गोल्ड लोन ने इन दोनों को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि अब बैंकों का कुल गोल्ड लोन बकाया, क्रेडिट कार्ड के बकाया कर्ज से करीब 57 फीसदी ज्यादा हो चुका है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय परिवारों की आर्थिक सोच में आए बड़े बदलाव की तरफ भी इशारा करता है।
हाल ही में जेरोधा कैपिटल ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के आधार पर एक रिपोर्ट और चार्ट साझा किया है। इसके अनुसार देश में गोल्ड लोन का कुल बकाया लगभग 4.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि क्रेडिट कार्ड बकाया करीब 3 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। यानी दोनों के बीच करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का अंतर बन चुका है।
क्यों तेजी से बढ़ रहा है गोल्ड लोन?
भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं बल्कि इमरजेंसी फाइनेंशियल सिक्योरिटी माना जाता है। पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी आई है। यही वजह है कि अब लोग अपनी पुरानी ज्वेलरी गिरवी रखकर पहले की तुलना में ज्यादा रकम हासिल कर पा रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी परिवार के पास 10 लाख रुपये मूल्य का सोना है, तो अब बैंक उसके बदले पहले से कहीं ज्यादा लोन देने को तैयार हैं। इससे छोटे कारोबारियों, किसानों और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए गोल्ड लोन आसान विकल्प बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के दौर में लोग अब ऐसे लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं जिसमें जल्दी पैसा मिल जाए, कम दस्तावेज लगें, ब्याज का बोझ कम हो, डिफॉल्ट का खतरा कम हो. गोल्ड लोन इन सभी जरूरतों को पूरा करता है।
RBI की सख्ती ने बदला खेल
भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ समय में बिना गारंटी वाले कर्ज यानी अनसिक्योर्ड लोन पर काफी सख्ती दिखाई है। इसमें पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, Buy Now Pay Later (BNPL) जैसे उत्पाद शामिल हैं।
RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए जोखिम भार (Risk Weight) बढ़ा दिया था। इसके बाद कई बैंकों ने क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की मंजूरी को सीमित करना शुरू कर दिया। इससे ग्राहकों के लिए ऐसे लोन लेना कठिन हो गया।
दूसरी तरफ गोल्ड लोन एक सिक्योर्ड लोन है, यानी बैंक के पास ग्राहक का सोना सुरक्षा के तौर पर रहता है। इस कारण बैंकों का जोखिम काफी कम होता है और वे आसानी से लोन मंजूर कर देते हैं।
क्रेडिट कार्ड क्यों पड़ रहे पीछे?
एक समय में क्रेडिट कार्ड तेजी से बढ़ रहे थे। ऑनलाइन शॉपिंग, EMI और रिवॉर्ड प्वाइंट्स के कारण लोगों ने जमकर कार्ड इस्तेमाल किया। लेकिन धीरे-धीरे इसके नुकसान सामने आने लगे।
सबसे बड़ी समस्या है अत्यधिक ब्याज दर। अगर ग्राहक समय पर बिल का भुगतान नहीं करता तो 30% से 45% तक सालाना ब्याज, लेट फीस, पेनाल्टी चार्ज जैसे अतिरिक्त बोझ बढ़ जाते हैं।
कई लोग न्यूनतम भुगतान (Minimum Due) करके लंबे समय तक कर्ज में फंसे रहते हैं। इससे उनका सिबिल स्कोर भी खराब होता है।
इसके मुकाबले गोल्ड लोन में ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है, भुगतान में लचीलापन मिलता है, तुरंत नकदी उपलब्ध हो जाती है यही वजह है कि अब लोग क्रेडिट कार्ड की बजाय गोल्ड लोन को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मानने लगे हैं।
छोटे कारोबारियों की पहली पसंद बना गोल्ड लोन
भारत में लाखों छोटे व्यापारी और स्वरोजगार करने वाले लोग ऐसे हैं जिनकी नियमित सैलरी नहीं होती। ऐसे लोगों को पर्सनल लोन मिलने में दिक्कत होती है क्योंकि आय का स्थायी प्रमाण नहीं होता, सिबिल स्कोर कमजोर होता है, बैंकिंग हिस्ट्री सीमित होती है
लेकिन गोल्ड लोन में इन चीजों की जरूरत काफी कम पड़ती है। ग्राहक सिर्फ सोना गिरवी रखकर कुछ घंटों में लोन हासिल कर सकता है।
इसी वजह से किराना दुकानदार, छोटे व्यापारी, किसान, ग्रामीण परिवार तेजी से गोल्ड लोन की तरफ बढ़ रहे हैं।
2021 से 2026 तक कैसे बदले आंकड़े?
जेरोधा की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में बैंकों का कुल गोल्ड लोन बकाया 1 लाख करोड़ रुपये से भी कम था। लेकिन सिर्फ पांच साल में यह आंकड़ा बढ़कर 4.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया।
दूसरी ओर क्रेडिट कार्ड बकाया लगातार बढ़ने के बाद अब करीब 3 लाख करोड़ रुपये के आसपास स्थिर होता दिखाई दे रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी गोल्ड लोन की ग्रोथ तेज बनी रह सकती है क्योंकि भारत में घरों में भारी मात्रा में सोना मौजूद है, गोल्ड प्राइस मजबूत बने हुए हैं, बैंक सिक्योर्ड लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं.
क्या बढ़ सकता है गोल्ड लोन का जोखिम?
हालांकि गोल्ड लोन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हैं। अगर ग्राहक समय पर भुगतान नहीं करता तो बैंक गिरवी रखा सोना नीलाम कर सकते हैं। इसके अलावा अगर भविष्य में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आती है तो बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।
RBI पहले ही गोल्ड लोन सेक्टर पर नजर बनाए हुए है। खासकर NBFCs द्वारा आक्रामक लोन वितरण को लेकर नियामक सतर्क दिखाई दे रहा है।
भारत में सोना क्यों है सबसे बड़ा ‘इमरजेंसी फंड’?
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवार पीढ़ियों से सोने को बचत और सुरक्षा के रूप में देखते आए हैं।
आर्थिक संकट या नकदी की जरूरत के समय शेयर बेचना मुश्किल हो सकता है, प्रॉपर्टी बेचने में समय लगता है, पर्सनल लोन मंजूर होने में देरी होती है लेकिन सोना तुरंत नकदी में बदल सकता है। यही वजह है कि गोल्ड लोन अब भारतीय परिवारों के लिए सबसे भरोसेमंद वित्तीय विकल्प बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
भारत में गोल्ड लोन का तेजी से बढ़ना सिर्फ एक बैंकिंग ट्रेंड नहीं बल्कि बदलती आर्थिक मानसिकता का संकेत है। लोग अब ऐसे कर्ज को प्राथमिकता दे रहे हैं जिसमें जोखिम कम हो, मंजूरी आसान हो और ब्याज का दबाव सीमित हो।
क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की तुलना में गोल्ड लोन ने खुद को ज्यादा सुरक्षित और व्यवहारिक विकल्प साबित किया है। अगर सोने की कीमतें मजबूत बनी रहती हैं और RBI सिक्योर्ड लोन को प्रोत्साहन देता है, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड लोन बाजार और तेजी से बढ़ सकता है।
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