भारतीय रेलवे ने देश के अलग-अलग हिस्सों में रेल नेटवर्क को मजबूत, सुरक्षित और तेज बनाने के लिए 2,193 करोड़ रुपये की तीन अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स का असर सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक विकास, माल ढुलाई और व्यापारिक कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलेगी। खास बात यह है कि इनमें जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रूट की सुरक्षा बढ़ाने से लेकर पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के व्यस्त रेल कॉरिडोर की क्षमता विस्तार तक कई बड़े काम शामिल हैं।
कटड़ा रेल रूट पर सुरक्षा के लिए 238 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट
रेलवे ने जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेल खंड की सुरक्षा मजबूत करने के लिए 238 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। यह परियोजना खास तौर पर भूस्खलन, सुरंगों के पुनर्वास, टनल में पानी के रिसाव को रोकने और संवेदनशील पुलों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
कटड़ा रूट पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरता है। मानसून और खराब मौसम के दौरान यहां परिचालन बनाए रखना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु वैष्णो देवी यात्रा के लिए इसी रेल मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में रेलवे अब इस पूरे सेक्शन को और ज्यादा सुरक्षित तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की तैयारी में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के बाद ट्रेन संचालन में व्यवधान कम होंगे और यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही, सुरंगों और पुलों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर को राहत देगा क्यूल-झाझा तीसरी लाइन प्रोजेक्ट
रेल मंत्रालय ने बिहार के क्यूल-झाझा सेक्शन पर 962 करोड़ रुपये की लागत से तीसरी रेल लाइन बिछाने की मंजूरी भी दी है। यह लाइन करीब 54 किलोमीटर लंबी होगी और देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।
फिलहाल इस सेक्शन की डबल लाइन अपनी अधिकतम क्षमता से भी ज्यादा ट्रैफिक संभाल रही है। इसके कारण ट्रेनों की लेटलतीफी और मालगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित होती है। तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों दोनों के संचालन में तेजी आएगी।
यह रेल मार्ग कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को उत्तर भारत तथा नेपाल से जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर माना जाता है। इसके अलावा कई थर्मल पावर प्लांटों तक कोयला पहुंचाने में भी यही रूट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नई लाइन बनने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और माल ढुलाई की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
चेन्नई नेटवर्क को मजबूत करेगा अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण
तीसरा बड़ा प्रोजेक्ट तमिलनाडु में चेन्नई उपनगरीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। रेलवे ने अरक्कोनम-चेंगलपट्टू सेक्शन के दोहरीकरण के लिए 993 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। करीब 68 किलोमीटर लंबी इस सिंगल लाइन को अब डबल लाइन में बदला जाएगा।
दक्षिण भारत का यह सेक्शन तेजी से बढ़ते शहरी और औद्योगिक ट्रैफिक के कारण काफी दबाव में है। एक ही लाइन पर लोकल और दूसरी ट्रेनों के संचालन से अक्सर देरी की समस्या सामने आती है। दोहरीकरण के बाद लोकल ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ सकेगी और यात्रियों का यात्रा समय कम होगा।
यह कॉरिडोर महिंद्रा वर्ल्ड सिटी, श्रीपेरंबुदूर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है। इसके अलावा प्रस्तावित परंदूर एयरपोर्ट भी इसी रूट के आसपास स्थित है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में चेन्नई और आसपास के औद्योगिक इलाकों की आर्थिक गतिविधियों को और मजबूत कर सकता है।
औद्योगिक विकास और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
रेल मंत्री के अनुसार, इन तीनों परियोजनाओं का सीधा असर देश की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा। रेलवे नेटवर्क मजबूत होने से सीमेंट, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, कोयला, लोहा और इस्पात जैसी वस्तुओं की ढुलाई तेज और आसान होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार बेहद जरूरी है। यही वजह है कि सरकार अब हाई-डेंसिटी और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर ज्यादा निवेश कर रही है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ उद्योगों को भी तेज और भरोसेमंद परिवहन नेटवर्क का फायदा मिलेगा। रेलवे की ये पहल आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक रफ्तार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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