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Top Firms Mcap: शेयर बाजार में हाहाकार, 9 दिग्गज कंपनियों के ₹3.12 लाख करोड़ डूबे, रिलायंस को सबसे बड़ा झटका

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/27 at 10:53 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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तेल संकट, कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव ने बिगाड़ा खेल, Airtel बनी इकलौती चमकती कंपनी

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता कारोबारी सप्ताह लंबे समय तक याद रखा जा सकता है। घरेलू और वैश्विक स्तर पर बढ़ते आर्थिक दबावों के बीच निवेशकों की घबराहट इतनी बढ़ गई कि देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 9 का संयुक्त बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) 3.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा झटका मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को लगा, जिसका मार्केट कैप अकेले 1.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया।

Contents
तेल संकट, कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव ने बिगाड़ा खेल, Airtel बनी इकलौती चमकती कंपनीक्यों टूटा बाजार?रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ा झटकाबैंकिंग सेक्टर में भी भारी दबावSBI को ₹52 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसानHDFC Bank और ICICI Bank भी फिसलेआईटी सेक्टर क्यों दबाव में आया?Bajaj Finance और NBFC सेक्टर पर दबावL&T और HUL भी नहीं बच पाएLIC पर भी दिखा दबावआखिर Airtel कैसे बनी सबसे बड़ी विजेता?विदेशी निवेशकों की रणनीति भी बनी बड़ी वजहक्या आगे और गिर सकता है बाजार?भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों की नई रैंकिंगनिवेशकों के लिए क्या संकेत?

पूरे सप्ताह बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,090 अंक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 532 अंकों से ज्यादा फिसल गया। यह गिरावट सिर्फ तकनीकी करेक्शन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके पीछे कई बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण दिखाई दे रहे हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना, रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भारतीय बाजार की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, कच्चे तेल में तेजी सीधे तौर पर महंगाई, राजकोषीय घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ाती है।

क्यों टूटा बाजार?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से बाजार कंसोलिडेशन फेज में था, लेकिन जैसे ही कच्चे तेल में तेज उछाल और वैश्विक तनाव बढ़ा, निवेशकों ने जोखिम कम करना शुरू कर दिया। इसका असर बैंकिंग, आईटी, फाइनेंस और कंज्यूमर सेक्टर तक में दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार इस समय तीन बड़े दबावों का सामना कर रहा है महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया, विदेशी फंड्स की बिकवाली. जब तेल महंगा होता है तो भारत का आयात बिल बढ़ता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और महंगाई दोनों बढ़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि निवेशकों ने बड़े स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ा झटका

देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 1,34,445.77 करोड़ रुपये घटकर 18.08 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

रिलायंस पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ऊर्जा कारोबार को लेकर बढ़ती चिंताएं मानी जा रही हैं। हालांकि कच्चे तेल में तेजी कुछ हिस्सों में रिफाइनिंग मार्जिन को सपोर्ट कर सकती है, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मांग में कमजोरी की आशंका निवेशकों को सतर्क बना रही है।

इसके अलावा रिलायंस के रिटेल और टेलीकॉम कारोबार की ग्रोथ को लेकर भी बाजार अधिक सतर्क नजर आया। कई विदेशी ब्रोकरेज हाउस पहले ही भारतीय बाजार में वैल्यूएशन को ऊंचा बता चुके हैं।

बैंकिंग सेक्टर में भी भारी दबाव

भारतीय बैंकिंग सेक्टर के दिग्गजों को भी इस गिरावट का बड़ा असर झेलना पड़ा।

SBI को ₹52 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का मार्केट कैप 52,245 करोड़ रुपये घट गया। बैंकिंग सेक्टर पर दबाव की बड़ी वजह यह आशंका है कि अगर कच्चे तेल और महंगाई में तेजी बनी रहती है, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना पड़ सकता है। इससे लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

HDFC Bank और ICICI Bank भी फिसले

एचडीएफसी बैंक की वैल्यूएशन 20,630 करोड़ रुपये घट गई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक को 14,290 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

विश्लेषकों का मानना है कि निजी बैंक अभी भी मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन बाजार फिलहाल जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर सबसे ज्यादा बड़े बैंकिंग शेयरों पर देखा गया।

आईटी सेक्टर क्यों दबाव में आया?

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मार्केट कैप 47,415 करोड़ रुपये घट गया। आईटी सेक्टर पर दोहरी मार पड़ती दिख रही है। पहला, अमेरिका और यूरोप में आर्थिक सुस्ती की आशंका।
दूसरा, कंपनियों द्वारा टेक खर्च में कटौती का डर।

भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है। ऐसे में अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, तो नए प्रोजेक्ट्स और डील फ्लो प्रभावित हो सकते हैं।

Bajaj Finance और NBFC सेक्टर पर दबाव

बजाज फाइनेंस की वैल्यूएशन करीब 28 हजार करोड़ रुपये घट गई। एनबीएफसी सेक्टर पर बढ़ती ब्याज दरों और संभावित डिफॉल्ट रिस्क को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो उपभोक्ता खर्च पर असर पड़ सकता है। इससे कंज्यूमर फाइनेंस कंपनियों की ग्रोथ धीमी हो सकती है।

L&T और HUL भी नहीं बच पाए

इंफ्रास्ट्रक्चर दिग्गज लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मार्केट कैप 9,078 करोड़ रुपये घटा। हालांकि सरकार के कैपेक्स और इंफ्रा निवेश की वजह से लंबे समय में इस सेक्टर को मजबूत माना जा रहा है, लेकिन अल्पकालिक बिकवाली से यह शेयर भी बच नहीं पाया।

हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) का मार्केट कैप भी करीब 4 हजार करोड़ रुपये घट गया। एफएमसीजी सेक्टर में निवेशकों को यह चिंता सता रही है कि लगातार महंगाई बढ़ने से ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है।

LIC पर भी दिखा दबाव

देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी की वैल्यूएशन भी 2,182 करोड़ रुपये घट गई। बाजार में कमजोरी का असर बीमा कंपनियों के निवेश पोर्टफोलियो पर भी पड़ता है, क्योंकि उनका बड़ा निवेश इक्विटी बाजार में होता है।

आखिर Airtel कैसे बनी सबसे बड़ी विजेता?

जहां पूरा बाजार लाल निशान में डूबा था, वहीं भारती एयरटेल ने निवेशकों को राहत दी। कंपनी का मार्केट कैप 42,470 करोड़ रुपये बढ़ गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक Airtel में तेजी की सबसे बड़ी वजह उसका मजबूत एआरपीयू (Average Revenue Per User), 5G विस्तार और स्थिर कैश फ्लो है। बाजार को उम्मीद है कि आने वाले समय में टैरिफ बढ़ोतरी से टेलीकॉम कंपनियों की कमाई और मजबूत हो सकती है।

इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर को अपेक्षाकृत डिफेंसिव सेक्टर माना जा रहा है, जहां आर्थिक अनिश्चितता का असर सीमित रहता है।

विदेशी निवेशकों की रणनीति भी बनी बड़ी वजह

पिछले कुछ सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाला है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर इंडेक्स मजबूत होने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा है।

जब वैश्विक निवेशकों को अमेरिका जैसे सुरक्षित बाजारों में बेहतर रिटर्न मिलता है, तो वे भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। इसका असर बड़े लार्जकैप शेयरों पर सबसे पहले दिखाई देता है।

क्या आगे और गिर सकता है बाजार?

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा काफी हद तक तीन चीजों पर निर्भर करेगी कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति अगर तेल 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है और रुपये में कमजोरी जारी रहती है, तो भारतीय बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

हालांकि कई ब्रोकरेज हाउस यह भी मान रहे हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अच्छी कंपनियों में खरीदारी का अवसर बन सकती है।

भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों की नई रैंकिंग

गिरावट के बावजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक का स्थान है।

टॉप 10 कंपनियों की सूची में शामिल कंपनियां:

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज
  • एचडीएफसी बैंक
  • भारती एयरटेल
  • आईसीआईसीआई बैंक
  • भारतीय स्टेट बैंक
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज
  • बजाज फाइनेंस
  • लार्सन एंड टुब्रो
  • हिंदुस्तान यूनिलीवर
  • एलआईसी

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

यह गिरावट सिर्फ एक सामान्य मार्केट करेक्शन नहीं मानी जा रही, बल्कि यह संकेत दे रही है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अब भारतीय बाजारों पर भी गहरा असर डाल रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इस समय घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। जिन कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है और जिनका बिजनेस मॉडल स्थिर है, वे लंबी अवधि में फिर से मजबूती दिखा सकती हैं।

फिलहाल बाजार की नजर तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और आगामी वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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