राजस्थान सरकार का सख्त रुख, किसानों के लंबित क्लेम पर बीमा कंपनियों को नोटिस
जयपुर: राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों के लंबित बीमा क्लेम को लेकर भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने तीन प्रमुख बीमा कंपनियों को सख्त नोटिस जारी करते हुए तुरंत भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा के भीतर किसानों का पैसा जारी नहीं किया गया, तो कंपनियों पर 12 प्रतिशत वार्षिक पेनल्टी लगाई जाएगी।
राज्य सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब हजारों किसान पिछले कई वर्षों से अपने फसल बीमा क्लेम का इंतजार कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि किसानों ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन इसके बावजूद कंपनियों ने भुगतान में अनावश्यक देरी की।
किन कंपनियों को जारी हुआ नोटिस?
राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि जिन कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें Agriculture Insurance Company of India Limited, Kshema General Insurance, Reliance General Insurance शामिल हैं।
इन कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित क्लेम का तत्काल भुगतान करें और देरी की स्थिति में 12 प्रतिशत ब्याज सहित किसानों को राशि उपलब्ध कराई जाए।
33.15 करोड़ रुपये का क्लेम अब भी लंबित
राजस्थान सरकार के अनुसार वर्ष 2018 से 2022 के बीच का करीब 33.15 करोड़ रुपये का फसल बीमा क्लेम अब भी लंबित पड़ा है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों ने अपने दावे से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज पहले ही जमा करा दिए थे।
सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार की 16 फरवरी 2024 की गाइडलाइन और राज्य सरकार के कई निर्देशों के बावजूद कंपनियों ने भुगतान प्रक्रिया में तेजी नहीं दिखाई।
21 दिन में भुगतान नहीं तो पेनल्टी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की परिचालन गाइडलाइन 2023 के मुताबिक, बीमा क्लेम का भुगतान निर्धारित समय सीमा यानी 21 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। यदि कंपनियां ऐसा नहीं करतीं, तो उन पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के हिसाब से पेनल्टी लगाने का प्रावधान है।
कृषि विभाग ने अब इसी नियम का इस्तेमाल करते हुए कंपनियों को चेतावनी दी है।
तीन दिन में जवाब देने को कहा गया
राजस्थान के कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने संबंधित कंपनियों को तीन कार्य दिवस के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। उनसे पूछा गया है कि आखिर क्यों न लंबित भुगतान पर देरी की तारीख से भुगतान की तारीख तक 12 प्रतिशत ब्याज लगाया जाए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कंपनियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की, तो मामला केंद्र सरकार तक भेजा जाएगा और सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में किसान मानसून और मौसम पर निर्भर खेती करते हैं। ऐसे में सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ या बेमौसम बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं सीधे किसानों की आय को प्रभावित करती हैं।
फसल बीमा योजना का उद्देश्य यही है कि नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। लेकिन जब क्लेम भुगतान में वर्षों की देरी होती है, तो किसान कर्ज और आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार कंपनियों पर सख्ती दिखाती है और समय पर भुगतान सुनिश्चित करती है, तो इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा।
क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने की थी। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और कीटों से फसल को हुए नुकसान पर किसानों को आर्थिक सहायता देना है।
योजना के तहत किसानों को बेहद कम प्रीमियम पर व्यापक बीमा सुरक्षा मिलती है।
किसानों को कितना प्रीमियम देना होता है?
| फसल | किसान का प्रीमियम |
|---|---|
| खरीफ फसल | 2% |
| रबी फसल | 1.5% |
| बागवानी/कैश क्रॉप | अधिकतम 5% |
बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं।
आधुनिक तकनीक से होता है नुकसान का आकलन
सरकार अब फसल नुकसान के आकलन के लिए ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट डेटा, स्मार्टफोन ऐप जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। इससे दावा प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है।
सिर्फ खड़ी फसल ही नहीं, कटाई के बाद भी मिलता है कवर
इस योजना की एक बड़ी खासियत यह है कि यह केवल खड़ी फसल को ही नहीं, बल्कि बुआई न हो पाने की स्थिति, प्राकृतिक आपदा, कटाई के बाद 14 दिन तक खेत में रखी फसल के नुकसान को भी कवर करती है।
यानी अगर बारिश या चक्रवात के कारण कटाई के बाद खेत में रखी फसल खराब हो जाए, तब भी किसान क्लेम के पात्र हो सकते हैं।
क्या अब किसानों को जल्दी मिलेगा पैसा?
राजस्थान सरकार के सख्त रुख के बाद संभावना बढ़ गई है कि लंबित क्लेम मामलों में तेजी आएगी। हालांकि असली राहत तभी मिलेगी जब कंपनियां तय समय सीमा में भुगतान शुरू करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में 12 प्रतिशत पेनल्टी लागू करती है, तो भविष्य में बीमा कंपनियां क्लेम भुगतान में देरी करने से बचेंगी। इससे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
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