भारत में 15 मई 2026 को चांदी की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। घरेलू सर्राफा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट तक सिल्वर की कीमतों पर कई वैश्विक फैक्टर्स का असर दिखाई दे रहा है। ताजा रेट के अनुसार देश में चांदी का भाव ₹290 प्रति ग्राम और ₹2,90,000 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में सिल्वर में करीब ₹10 प्रति ग्राम और ₹10,000 प्रति किलो की गिरावट दर्ज हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफावसूली और औद्योगिक मांग में उतार-चढ़ाव के कारण चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। हालांकि लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का अवसर भी मानी जा रही है।
भारत में आज का चांदी का भाव
| यूनिट | आज का भाव | बदलाव |
|---|---|---|
| 1 ग्राम चांदी | ₹290 | -₹10 |
| 10 ग्राम चांदी | ₹2,900 | -₹100 |
| 100 ग्राम चांदी | ₹29,000 | -₹1,000 |
| 1 किलो चांदी | ₹2,90,000 | -₹10,000 |
स्रोत: GoodReturns
प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा रेट
| शहर | 10 ग्राम | 100 ग्राम | 1 किलो |
|---|---|---|---|
| मुंबई | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| दिल्ली | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| कोलकाता | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| जयपुर | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| अहमदाबाद | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| लखनऊ | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| पटना | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| गुरुग्राम | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
| नोएडा | ₹2,900 | ₹29,000 | ₹2,90,000 |
क्यों गिर रही है चांदी की कीमत?
चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसे धातु निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग कमजोर पड़ती है।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी अनिश्चितता भी कमोडिटी बाजार को प्रभावित कर रही है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ झुक रहे हैं, जिसके चलते सिल्वर में बिकवाली बढ़ी है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार चीन और यूरोप की औद्योगिक मांग में धीमापन भी चांदी पर दबाव बना रहा है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और ऑटो सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों में नरमी का सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ता है।
रुपये की कमजोरी से क्यों महंगी होती है चांदी?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की ट्रेडिंग डॉलर में होती है। ऐसे में यदि रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है तो आयात लागत बढ़ जाती है और घरेलू बाजार में चांदी महंगी हो जाती है।
हाल के दिनों में रुपये में कमजोरी देखी गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के कारण घरेलू बाजार में बड़ी तेजी फिलहाल नहीं दिखी। यदि डॉलर और मजबूत होता है तो आने वाले दिनों में चांदी फिर महंगी हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में दबाव बना रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सिल्वर अभी भी मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
दरअसल, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। सोलर इंडस्ट्री में सिल्वर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि कई वैश्विक निवेश बैंक आने वाले वर्षों में चांदी की कीमतों में तेजी की संभावना जता रहे हैं।
क्या अभी चांदी खरीदनी चाहिए?
यदि आप शादी, ज्वेलरी या घरेलू उपयोग के लिए चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो मौजूदा गिरावट कुछ राहत दे सकती है। वहीं निवेश के नजरिए से एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि एकमुश्त निवेश करने की बजाय SIP या चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।
कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और अमेरिकी ब्याज दरें अगले कुछ हफ्तों में चांदी की दिशा तय करेंगी। ऐसे में निवेशकों को बाजार पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
सोने और चांदी में कौन बेहतर?
हाल के वर्षों में चांदी ने कई बार सोने से बेहतर रिटर्न दिया है। हालांकि चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। सोना जहां सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं चांदी को हाई रिस्क-हाई रिटर्न एसेट माना जाता है।
यदि वैश्विक औद्योगिक मांग मजबूत रहती है तो आने वाले समय में चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
15 मई 2026 को चांदी की कीमतों में गिरावट जरूर दर्ज हुई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर मान रहे हैं। डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक हालात और औद्योगिक मांग आने वाले दिनों में सिल्वर की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों और खरीदारों दोनों की नजर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार और रुपये की चाल पर बनी हुई है।
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