भारत के शेयर बाजार में लंबे समय से जिस IPO का इंतजार किया जा रहा था, उसमें अब बड़ी देरी होती दिख रही है। देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart का बहुप्रतीक्षित IPO फिलहाल टाल दिया गया है। कंपनी की पैरेंट कंपनी Walmart ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए फ्लिपकार्ट को पहले मुनाफे की राह पर लाने का फैसला किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अब वित्त वर्ष 2027 के अंत तक EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल करने पर फोकस कर रही है। यानी फ्लिपकार्ट फिलहाल शेयर बाजार में लिस्ट होने से पहले अपनी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत करना चाहती है। इस फैसले से उन निवेशकों को झटका लग सकता है जो आने वाले वर्षों में फ्लिपकार्ट IPO में निवेश की उम्मीद लगाए बैठे थे।
क्यों टाला गया Flipkart IPO?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, वॉलमार्ट ने फिलहाल IPO की योजना को आगे बढ़ाने के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला वॉलमार्ट के CEO और अध्यक्ष John Furner ने लिया।
बताया जा रहा है कि फरवरी में पद संभालने के बाद जॉन फर्नेर ने हाल ही में बेंगलुरु का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने फ्लिपकार्ट की टीम के साथ कई रणनीतिक बैठकें कीं। इन्हीं बैठकों के बाद कंपनी ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल IPO लॉन्च करने से ज्यादा जरूरी बिजनेस को स्थायी मुनाफे की दिशा में ले जाना है।
सूत्रों के अनुसार, फ्लिपकार्ट ने आंतरिक रूप से यह लक्ष्य तय किया है कि वह FY2027 समाप्त होने से पहले EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल करेगी। जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक कंपनी न तो IPO लाएगी और न ही किसी बड़े प्री-IPO फंडिंग राउंड पर जोर देगी।
क्या होता है EBITDA ब्रेक-ईवन?
EBITDA का मतलब होता है: Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation and Amortisation सरल भाषा में कहें तो यह किसी कंपनी के मुख्य कारोबार से होने वाली कमाई को दिखाता है।
जब कोई कंपनी EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल करती है, तो इसका मतलब होता है कि उसका ऑपरेशनल बिजनेस घाटे से बाहर निकल रहा है और कंपनी अपने रोजमर्रा के खर्चों को खुद संभालने की स्थिति में पहुंच रही है।
ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए यह बेहद अहम माना जाता है क्योंकि इस सेक्टर में भारी डिस्काउंट, लॉजिस्टिक्स लागत और मार्केटिंग खर्च की वजह से लंबे समय तक घाटा रहता है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने बढ़ाई चुनौती
फ्लिपकार्ट के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ता कॉम्पिटिशन है। भारत का ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स बाजार अब पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो चुका है।
फ्लिपकार्ट अपनी 10 मिनट ग्रॉसरी डिलीवरी सर्विस “Minutes” का विस्तार कर रही है। लेकिन इस क्षेत्र में उसे कई बड़ी कंपनियों से मुकाबला करना पड़ रहा है।
इनमें शामिल हैं:
- Amazon की Amazon Now
- Reliance Retail का JioMart
- Blinkit
- Zepto
- BigBasket
- Swiggy का Instamart
इन सभी कंपनियों के बीच मार्केट शेयर की जंग तेज हो चुकी है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट, फास्ट डिलीवरी और तकनीकी निवेश की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में फ्लिपकार्ट को IPO से पहले अपने बिजनेस मॉडल को ज्यादा मजबूत बनाना जरूरी लग रहा है।
Walmart क्यों नहीं करना चाहता जल्दबाजी?
वॉलमार्ट ने 2018 में फ्लिपकार्ट में बड़ी हिस्सेदारी खरीदकर भारतीय बाजार में मजबूत एंट्री की थी। वर्तमान में वॉलमार्ट के पास फ्लिपकार्ट में 80% से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe में भी वॉलमार्ट की बड़ी हिस्सेदारी है।
दिलचस्प बात यह है कि PhonePe के IPO को लेकर भी लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन वह भी अभी तक बाजार में नहीं आया है। ऐसे में फ्लिपकार्ट का IPO टलना यह दिखाता है कि वॉलमार्ट फिलहाल भारतीय बाजार में “ग्रोथ के साथ मुनाफा” मॉडल पर ज्यादा फोकस कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वॉलमार्ट जल्दबाजी में कम वैल्यूएशन पर IPO नहीं लाना चाहता। अगर फ्लिपकार्ट पहले प्रॉफिटेबिलिटी हासिल कर लेती है, तो भविष्य में कंपनी को कहीं बेहतर वैल्यूएशन मिल सकता है।
भारत के IPO बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
अगर फ्लिपकार्ट IPO आता, तो यह भारत के सबसे बड़े टेक IPO में शामिल हो सकता था। इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ती।
हाल के वर्षों में भारतीय निवेशकों ने टेक IPO में काफी रुचि दिखाई है। हालांकि, कुछ टेक कंपनियों की लिस्टिंग के बाद शेयरों में गिरावट ने निवेशकों को सतर्क भी किया है। इसी वजह से अब कंपनियां केवल ग्रोथ नहीं बल्कि मुनाफे पर भी जोर दे रही हैं।
फ्लिपकार्ट का IPO टलना यह संकेत देता है कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम अब “ब्लिट्जस्केलिंग” से आगे बढ़कर “सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल” की ओर बढ़ रहा है।
Quick Commerce सेक्टर बना सबसे बड़ा रणक्षेत्र
भारत में क्विक कॉमर्स अब सबसे तेजी से बढ़ने वाला डिजिटल बिजनेस सेगमेंट बन चुका है।
10 मिनट डिलीवरी मॉडल में कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। डार्क स्टोर्स, सप्लाई चेन, वेयरहाउसिंग और डिलीवरी नेटवर्क पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अगले 2-3 वर्षों में यही सेक्टर तय करेगा कि कौन सी कंपनी लंबे समय तक बाजार में टिकेगी। फ्लिपकार्ट भी इसी वजह से अपने Minutes बिजनेस को मजबूत करने में जुटी है।
हालांकि, इस बिजनेस में लाभ कमाना बेहद मुश्किल माना जाता है क्योंकि ग्राहक तेजी के साथ कम कीमत भी चाहते हैं। ऐसे में कंपनियों को लगातार पूंजी निवेश करना पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
फ्लिपकार्ट IPO टलने से अल्पकाल में निवेशकों को निराशा जरूर हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह फैसला कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
अगर फ्लिपकार्ट FY2027 तक EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल कर लेती है, तो उसका IPO अधिक मजबूत वित्तीय आधार के साथ आ सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा समय में वैश्विक निवेशक उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो केवल ग्रोथ नहीं बल्कि स्थायी मुनाफे का रास्ता भी दिखा सकें।
निष्कर्ष
फ्लिपकार्ट IPO का टलना केवल एक कॉर्पोरेट फैसला नहीं बल्कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में बदलती रणनीति का संकेत है। अब केवल तेजी से विस्तार करना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि कंपनियों पर मुनाफा कमाने का दबाव भी बढ़ गया है।
वॉलमार्ट फिलहाल फ्लिपकार्ट को पहले वित्तीय रूप से मजबूत बनाना चाहता है ताकि भविष्य में IPO बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत निवेशक भरोसे के साथ लॉन्च किया जा सके। आने वाले दो वर्षों में फ्लिपकार्ट की प्रॉफिटेबिलिटी और क्विक कॉमर्स रणनीति पर पूरे बाजार की नजर रहेगी।
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