नई दिल्ली। उद्योगपति Anil Ambani से जुड़ी कंपनी Reliance Communications (RCom) एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation (CBI) ने गुरुवार को कंपनी से जुड़े कथित ₹27,337 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में बड़ा तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु समेत सात ठिकानों पर की गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक यह छापेमारी कंपनी के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशकों से जुड़े परिसरों पर की गई, जिन्होंने 2015 से 2017 के दौरान कंपनी में अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर देश के बैंकिंग सिस्टम में कॉरपोरेट लोन डिफॉल्ट और कथित फंड डायवर्जन का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
किन लोगों के ठिकानों पर हुई कार्रवाई?
CBI ने बताया कि तलाशी अभियान कंपनी के उस समय के CEO, CFO और अन्य डायरेक्टर्स के आवास और संबंधित परिसरों पर चलाया गया। एजेंसी का कहना है कि मुंबई की विशेष CBI अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर 14 मई 2026 को यह कार्रवाई की गई।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी उन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है जिनका संबंध बैंकों से लिए गए कर्ज, फंड ट्रांसफर और कथित वित्तीय अनियमितताओं से है। शुरुआती जांच में कई “महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक दस्तावेज” मिलने का दावा किया गया है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
CBI के अनुसार पिछले कुछ महीनों में Reliance ADA Group से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ सात अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले विभिन्न सरकारी बैंकों और Life Insurance Corporation of India (LIC) की शिकायतों के आधार पर दर्ज हुए हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये के लोन का कथित दुरुपयोग हुआ और कई वित्तीय लेन-देन नियमों के खिलाफ पाए गए। कुल कथित नुकसान ₹27,337 करोड़ बताया गया है।
अब तक की प्रमुख कार्रवाई
| कार्रवाई | विवरण |
|---|---|
| दर्ज मामले | 7 |
| कुल कथित नुकसान | ₹27,337 करोड़ |
| ताजा छापेमारी | 7 ठिकानों पर |
| पहले की छापेमारी | 31 स्थानों पर |
| गिरफ्तार अधिकारी | 2 |
| जांच शहर | मुंबई, गुरुग्राम, बेंगलुरु |
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
CBI इससे पहले 20 अप्रैल 2026 को रिलायंस कम्युनिकेशंस के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें डी. विश्वनाथ और अनिल काल्या के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक:
- डी. विश्वनाथ समूह के बैंकिंग ऑपरेशंस संभालते थे।
- अनिल काल्या फंड उपयोग और बैंकिंग ट्रांजैक्शन में उनकी सहायता कर रहे थे।
दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी यह जांच कर रही है कि बैंकों से लिए गए फंड का वास्तविक उपयोग क्या था और कहीं रकम को दूसरी कंपनियों या उद्देश्यों में तो नहीं ट्रांसफर किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच
CBI ने कहा है कि अनिल अंबानी समूह से जुड़े कुछ मामलों की जांच की निगरानी Supreme Court of India कर रहा है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में फंड डायवर्जन, फर्जी दस्तावेज या बैंकिंग नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आने वाले समय में और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
बैंकिंग सेक्टर पर क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
भारत में पिछले एक दशक में बड़े कॉरपोरेट लोन डिफॉल्ट मामलों ने बैंकिंग सेक्टर को भारी नुकसान पहुंचाया है। IL&FS, DHFL, Yes Bank और कई टेलीकॉम कंपनियों के वित्तीय संकट के बाद बैंक अब बड़े कॉरपोरेट लोन मामलों में ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
RCom कभी देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में गिनी जाती थी, लेकिन भारी कर्ज, तीव्र प्रतिस्पर्धा और टेलीकॉम सेक्टर में कीमतों की जंग के बाद कंपनी वित्तीय संकट में फंस गई। बाद में कंपनी दिवाला प्रक्रिया में भी पहुंची।
अब CBI की यह कार्रवाई सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत के बैंकिंग सिस्टम में बड़े कॉरपोरेट लोन मॉनिटरिंग की व्यापक जांच के रूप में देखा जा रहा है।
क्या बढ़ सकती हैं अनिल अंबानी की मुश्किलें?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी के ठोस सबूत सामने आते हैं, तो:
- ED भी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच तेज कर सकती है
- बैंक रिकवरी कार्रवाई बढ़ा सकते हैं
- कोर्ट मॉनिटरिंग के कारण मामले की गति तेज हो सकती है
- संबंधित कंपनियों और पूर्व अधिकारियों पर अतिरिक्त कानूनी दबाव बन सकता है
हालांकि, अभी तक अनिल अंबानी या रिलायंस ADA समूह की ओर से इस ताजा कार्रवाई पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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