CGHS New Rule: केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए CGHS नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए आदेश के मुताबिक अब कर्मचारी अपने माता-पिता या पत्नी के माता-पिता यानी सास-ससुर में से केवल एक पक्ष को ही मेडिकल सुविधा के लिए आश्रित घोषित कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के इस फैसले ने कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से पहले केंद्र सरकार ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 13 मई 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum) में स्पष्ट किया गया है कि अब केंद्रीय सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता या पत्नी के माता-पिता यानी ससुराल पक्ष में से केवल एक पक्ष को ही Central Government Health Scheme (CGHS) और Central Services Medical Attendance Rules, 1944 [CS(MA) Rules] के तहत आश्रित के रूप में चुन सकेंगे।
केंद्रीय कर्मचारियों को विकल्प के तौर पर अपने माता पिता या स्पाउस के माता पिता में से #CGHS सुविधा के लिए किसी एक पक्ष को ही रखने का अधिकार होगा। कल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया है। लेकिन इस आदेश में उन परिवारों के संबंध में कोई क्लैरिफिकेशन नहीं है… pic.twitter.com/oWHb5K29Z4
— Dr Manjeet Singh Patel (@ManjeetIMOPS) May 14, 2026 सरकार का यह फैसला लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को प्रभावित कर सकता है। खासकर ऐसे परिवारों में जहां पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं या जहां बुजुर्ग माता-पिता दोनों पक्षों में चिकित्सा सहायता पर निर्भर हैं।
क्या है नया CGHS नियम?
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब किसी केंद्रीय कर्मचारी को यह तय करना होगा कि वह मेडिकल सुविधा के लिए किस पक्ष को आश्रित घोषित करना चाहता है:
- अपने माता-पिता
या - पत्नी/पति के माता-पिता (सास-ससुर)
दोनों पक्षों को एक साथ CGHS लाभ के तहत शामिल नहीं किया जा सकेगा।
सरकार ने साफ किया है कि यह विकल्प केवल एक बार दिया जाएगा। यानी यदि कर्मचारी शुरुआत में अपने माता-पिता को चुनता है तो भविष्य में वह सास-ससुर को शामिल नहीं कर सकेगा। इसी तरह यदि ससुराल पक्ष को चुना गया तो बाद में माता-पिता को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
सबसे बड़ी बात यह है कि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाद में परिस्थितियां बदलने पर भी यह विकल्प नहीं बदला जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि चुने गए आश्रितों की मृत्यु हो जाए तब भी कर्मचारी दूसरे पक्ष को जोड़ने का दावा नहीं कर सकेगा।
सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
सरकार की ओर से जारी आदेश में इस बदलाव के पीछे विस्तृत कारण नहीं बताए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे CGHS पर बढ़ता वित्तीय बोझ एक बड़ा कारण हो सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में:
- CGHS लाभार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है
- इलाज की लागत में भारी वृद्धि हुई है
- निजी अस्पतालों के क्लेम खर्च बढ़े हैं
- वरिष्ठ नागरिकों के इलाज पर खर्च बढ़ा है
ऐसे में केंद्र सरकार स्वास्थ्य व्यय को नियंत्रित करने की दिशा में नियमों को सख्त कर रही है।
CGHS क्या है और कितने लोगों को मिलता है लाभ?
Central Government Health Scheme यानी CGHS केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इसके तहत:
- OPD सुविधा
- दवाइयां
- जांच
- सरकारी अस्पतालों में इलाज
- पैनल वाले निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार
जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों में लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स इस योजना का लाभ लेते हैं।
कर्मचारी संगठनों ने उठाए सवाल
नए नियम के सामने आने के बाद कर्मचारी संगठनों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि सरकार ने नियम तो जारी कर दिया, लेकिन कई जटिल पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
उन्होंने खास तौर पर उन मामलों का जिक्र किया जहां: पत्नी पहले से सरकारी कर्मचारी थी, बाद में उसकी शादी किसी केंद्रीय कर्मचारी से हुई दोनों परिवारों के माता-पिता स्वास्थ्य सुविधा पर निर्भर हैं ऐसे मामलों में यह तय करना मुश्किल होगा कि किस पक्ष को सुविधा मिलेगी और किसे नहीं।
पति-पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हों तो क्या होगा?
सबसे बड़ा विवाद इसी बिंदु को लेकर खड़ा हुआ है।
अभी तक आमतौर पर पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी होने पर एक ही CGHS कार्ड के तहत परिवार कवर होता है। लेकिन नए नियम के बाद सवाल उठ रहे हैं:
- क्या पति अपने माता-पिता को कवर करेगा और पत्नी अपने माता-पिता को?
- या फिर दोनों को मिलकर केवल एक पक्ष चुनना होगा?
- क्या किसी एक को CGHS सुविधा छोड़नी पड़ेगी?
सरकार की ओर से अभी तक इन सवालों पर कोई अलग स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
महिला कर्मचारियों पर ज्यादा असर पड़ सकता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नियम का सबसे ज्यादा असर महिला कर्मचारियों पर पड़ सकता है। भारतीय परिवार व्यवस्था में अक्सर शादी के बाद महिलाओं पर दोनों परिवारों की जिम्मेदारी होती है।
ऐसी स्थिति में यदि:
- महिला अपने माता-पिता को चुनती है
तो - सास-ससुर CGHS से बाहर हो सकते हैं
और यदि वह ससुराल पक्ष को चुनती है तो उसके बुजुर्ग माता-पिता स्वास्थ्य सुरक्षा से वंचित हो सकते हैं।
इस वजह से सोशल मीडिया और कर्मचारी संगठनों में इस नियम को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
8th Pay Commission से पहले क्यों अहम है यह फैसला?
आठवें वेतन आयोग को लेकर पहले से ही केंद्रीय कर्मचारियों में कई उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में:
- वेतन संशोधन
- फिटमेंट फैक्टर
- पेंशन बदलाव
- स्वास्थ्य सुविधाओं
पर बड़े फैसले हो सकते हैं।
ऐसे समय में CGHS नियमों को सख्त करना कई कर्मचारियों को चौंकाने वाला लग रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को मेडिकल सुविधाएं सीमित करने के बजाय बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मॉडल पर काम करना चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द विस्तृत FAQ या स्पष्टीकरण जारी करे। विशेष रूप से इन मुद्दों पर स्पष्टता मांगी जा रही है:
- पति-पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति
- दूसरी शादी या पारिवारिक बदलाव
- माता-पिता की मृत्यु के बाद विकल्प परिवर्तन
- महिला कर्मचारियों के मामलों में नियम
यदि सरकार क्लैरिफिकेशन जारी नहीं करती है तो आने वाले समय में यह मामला बड़े कर्मचारी आंदोलन या कानूनी चुनौती का रूप भी ले सकता है।
कर्मचारियों के लिए अभी क्या जरूरी?
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि वे:
- आश्रित चुनते समय जल्दबाजी न करें
- विभागीय प्रशासन से लिखित जानकारी लें
- परिवार की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखें
- भविष्य के मेडिकल खर्च और आयु स्थिति का आकलन करें
क्योंकि एक बार विकल्प चुनने के बाद उसे बदलना संभव नहीं होगा।
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