Highlights
- वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत में अत्यधिक नोटिस सिस्टम पर चिंता जताई
- बोले- दूसरे देशों में 100 नोटिस निकलते हैं तो भारत में 800 जारी होते हैं
- ‘जन विश्वास बिल’ और ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस मॉडल की तारीफ की
- कहा- बिजनेस के लिए “स्पीड ब्रेकर फ्री रोड” जैसी व्यवस्था जरूरी
- मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी तो GDP और रोजगार दोनों मजबूत होंगे
नई दिल्ली: देश के बड़े उद्योगपतियों में शामिल वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत के रेगुलेटरी सिस्टम को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” विजन की तारीफ की, वहीं दूसरी ओर सरकारी नोटिसों की “अत्यधिक संख्या” पर चिंता जताई।
अनिल अग्रवाल का कहना है कि भारत अब धीरे-धीरे “भरोसे पर आधारित सिस्टम” यानी Trust-Based Governance की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अनावश्यक नोटिस और जटिल प्रक्रियाएं कारोबार की रफ्तार धीमी कर देती हैं।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार लगातार Ease of Doing Business, डिजिटल गवर्नेंस और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर दे रही है।
‘दूसरे देशों में 100 नोटिस, भारत में 800’
अनिल अग्रवाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा का हवाला देते हुए कहा कि भारत में जरूरत से कहीं ज्यादा नोटिस जारी किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर दूसरे देशों में किसी सेक्टर या मामले में 100 नोटिस जारी होते हैं, तो भारत में वही संख्या 800 तक पहुंच जाती है, जबकि उत्पादन स्तर कई मामलों में उनसे काफी कम है।
उनके मुताबिक यह केवल कारोबारियों के लिए परेशानी नहीं है, बल्कि इससे सरकारी अधिकारियों और कंपनियों दोनों का समय बर्बाद होता है।
अग्रवाल ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नोटिस भेजने से असली काम पर फोकस कम हो जाता है। मैनेजमेंट का बड़ा हिस्सा जवाब देने और अनुपालन (compliance) में लग जाता है, जबकि ऊर्जा उत्पादन, निवेश और विस्तार पर लगनी चाहिए।
एयरपोर्ट से टैक्स सिस्टम तक, भारत में क्या बदला?
वेदांता चेयरमैन ने भारत में पिछले कुछ वर्षों में आए प्रशासनिक बदलावों की खुलकर तारीफ भी की।
उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पहले भारतीय एयरपोर्ट्स पर कस्टम क्लियरेंस में घंटों लग जाते थे। यात्रियों को लंबी लाइनों, पूछताछ और मैनुअल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था।
लेकिन अब स्थिति तेजी से बदली है।
उनके अनुसार आज 99.9 फीसदी यात्रियों को बिना किसी रुकावट के एयरपोर्ट से निकलने दिया जाता है। इससे न केवल समय बचा है बल्कि भारत की वैश्विक छवि भी बेहतर हुई है।
इसी तरह उन्होंने इनकम टैक्स सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि अब ज्यादातर प्रक्रियाएं डिजिटल हो चुकी हैं और आम लोगों को अधिकारियों के साथ फेस-टू-फेस इंटरैक्शन की जरूरत काफी कम हो गई है।
यह बदलाव सरकार के “Trust First” मॉडल को दिखाता है।
‘जन विश्वास बिल’ से उद्योग जगत को क्यों उम्मीद?
अनिल अग्रवाल ने हाल ही में पारित जन विश्वास बिल का भी समर्थन किया। इस कानून का उद्देश्य छोटे-मोटे अनुपालन उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
उन्होंने कहा कि जब तक मामला हथियारों की तस्करी, ड्रग्स या मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा न हो, तब तक सरकार को कारोबारियों के साथ भरोसे पर आधारित व्यवहार करना चाहिए।
उनका मानना है कि उद्यमियों को शक की नजर से देखने के बजाय उन्हें सम्मान और सहयोग देना चाहिए। इससे निवेश का माहौल बेहतर होगा और नए उद्योग तेजी से आगे आएंगे।
‘बिजनेस के लिए स्पीड ब्रेकर फ्री रोड चाहिए’
अनिल अग्रवाल ने अपनी बात को समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कहा कि जैसे आज नेशनल हाईवे पर FASTag और ऑटोमेटेड टोल सिस्टम की वजह से गाड़ियों को हर टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ता, वैसे ही बिजनेस के लिए भी एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां अनावश्यक रुकावटें न हों।
उनके मुताबिक अगर हर कदम पर अनुमति, नोटिस और निरीक्षण का दबाव रहेगा तो उद्योगों की गति धीमी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को अगर वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है तो रेगुलेटरी सिस्टम को अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद बनाना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी तो GDP और रोजगार दोनों बढ़ेंगे
वेदांता चेयरमैन ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की आर्थिक मजबूती का रास्ता बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग से होकर जाता है।
उनके मुताबिक अगर देश में उत्पादन बढ़ता है तो:
- रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे
- आयात पर निर्भरता घटेगी
- निर्यात मजबूत होगा
- GDP ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब भारत केवल सर्विस सेक्टर तक सीमित न रहे बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में भी वैश्विक ताकत बने।
क्यों महत्वपूर्ण है अनिल अग्रवाल का बयान?
अनिल अग्रवाल केवल एक उद्योगपति नहीं बल्कि भारत के बड़े माइनिंग और मेटल्स समूह के प्रमुख हैं। ऐसे में उनका बयान सरकार और उद्योग जगत दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने:
- GST लागू किया
- कॉरपोरेट टैक्स घटाया
- डिजिटल कंप्लायंस बढ़ाया
- PLI स्कीम शुरू की
- लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाया
लेकिन उद्योग जगत लंबे समय से “compliance burden” और “regulatory overreach” की शिकायत करता रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत को चीन प्लस वन रणनीति का बड़ा फायदा उठाना है, तो केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बल्कि रेगुलेटरी माहौल को भी अधिक बिजनेस-फ्रेंडली बनाना होगा।
क्या भारत Ease of Doing Business में और सुधार कर सकता है?
हालांकि भारत ने पिछले एक दशक में बिजनेस करने की आसानी के मामले में बड़ी प्रगति की है, लेकिन कई सेक्टर अब भी जटिल अनुमतियों और मल्टी-लेयर कंप्लायंस से जूझ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चुनौतियां हैं:
- राज्यों के अलग-अलग नियम
- बार-बार नोटिस और निरीक्षण
- लंबी मंजूरी प्रक्रिया
- टैक्स और रेगुलेटरी अनिश्चितता
अगर इन क्षेत्रों में सुधार होता है तो भारत वैश्विक निवेश आकर्षित करने में और मजबूत स्थिति में आ सकता है।
FAQ
अनिल अग्रवाल ने भारत के सिस्टम पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत अब भरोसे पर आधारित सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जरूरत से ज्यादा नोटिस जारी होने की समस्या अभी भी बनी हुई है।
उन्होंने 100 और 800 नोटिस वाली बात क्यों कही?
उनका कहना था कि दूसरे देशों की तुलना में भारत में अनुपात से कहीं ज्यादा नोटिस जारी किए जाते हैं, जिससे कारोबार प्रभावित होता है।
जन विश्वास बिल क्या है?
यह कानून छोटे-मोटे नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और व्यापार को आसान बनाने के लिए लाया गया है।
अनिल अग्रवाल ने किस चीज की मांग की?
उन्होंने सरकार से बिजनेस के लिए अधिक सरल, भरोसेमंद और “स्पीड ब्रेकर फ्री” सिस्टम बनाने की अपील की।
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