भारत के सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने बैंकिंग सेक्टर में नया इतिहास रच दिया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने इस दौरान कुल ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह अब तक का सबसे बड़ा नेट प्रॉफिट माना जा रहा है।
सरकारी बैंकों का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि वे लगातार चौथे साल मुनाफे में रहे हैं। कभी भारी NPA और घाटे से जूझने वाले सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड प्रॉफिट, मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर एसेट क्वालिटी के साथ नई मजबूती दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ बैंकिंग सेक्टर की मजबूती नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की तेजी से बढ़ती क्रेडिट मांग और वित्तीय स्थिरता का भी संकेत है।
₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों ने कुल ₹1.98 लाख करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। यह उपलब्धि कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगातार चौथे साल मुनाफे में रहना, रिकॉर्ड स्तर की प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना, मजबूत लोन ग्रोथ बनाए रखना, बेहतर रिकवरी करना और NPA को कम करना इस उपलब्धि के सबसे बड़े कारण माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, बेहतर जोखिम प्रबंधन, सरकारी सुधार और खराब लोन पर सख्ती जैसे कदमों ने सरकारी बैंकों की स्थिति को काफी मजबूत किया है।
सरकारी बैंकों का कारोबार कितना बढ़ा?
31 मार्च 2026 तक सरकारी बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह पिछले साल की तुलना में 12.8 फीसदी की मजबूत वृद्धि मानी जा रही है। इस दौरान जमा राशि, लोन और क्रेडिट ग्रोथ सभी क्षेत्रों में तेजी देखने को मिली।
जमाकर्ताओं का भरोसा बढ़ा
सरकारी बैंकों की कुल जमा राशि भी तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जमा राशि बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ पहुंच गई। सालाना आधार पर इसमें 10.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सरकारी बैंकों में लोगों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। हाल के वर्षों में बैंकिंग स्थिरता, डिजिटल सेवाओं में सुधार और सरकारी समर्थन की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जमा तेजी से बढ़ी है।
लोन ग्रोथ में भी जोरदार तेजी
सरकारी बैंकों के एडवांस यानी कुल लोन पोर्टफोलियो में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल एडवांस बढ़कर ₹127 लाख करोड़ पहुंच गया। सालाना आधार पर इसमें 15.7 फीसदी की वृद्धि हुई। यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्योग, व्यापार, उपभोक्ता खर्च और ग्रामीण गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा बढ़ा लोन?
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों की लोन ग्रोथ व्यापक आधार पर मजबूत रही। खासकर रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME सेक्टर में तेजी देखने को मिली।
आंकड़ों के मुताबिक रिटेल लोन में 18.1 फीसदी, कृषि लोन में 15.5 फीसदी और MSME लोन में 18.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि MSME और रिटेल सेक्टर की मजबूत मांग भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का बड़ा संकेत है।
NPA में बड़ा सुधार
सरकारी बैंकों की सबसे बड़ी उपलब्धि एसेट क्वालिटी में आया सुधार माना जा रहा है। 31 मार्च 2026 तक ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.93 फीसदी रह गया, जबकि नेट NPA रेशियो घटकर सिर्फ 0.39 फीसदी पर आ गया। यह पिछले कई वर्षों का सबसे बेहतर स्तर माना जा रहा है।
एक समय ऐसा था जब सरकारी बैंक भारी खराब लोन के कारण संकट में थे। लेकिन अब बेहतर रिकवरी, सख्त मॉनिटरिंग और तेजी से प्रोविजनिंग की वजह से स्थिति काफी मजबूत हुई है।
Provision Coverage Ratio भी मजबूत
हर सरकारी बैंक ने 90 फीसदी से ज्यादा का Provision Coverage Ratio बनाए रखा। इसका मतलब यह है कि बैंकों ने संभावित खराब लोन के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान तैयार कर रखे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह मजबूत जोखिम प्रबंधन, सुरक्षित बैलेंस शीट और भविष्य के जोखिमों से सुरक्षा का संकेत माना जाता है।
रिकवरी सिस्टम कितना मजबूत हुआ?
सरकारी बैंकों की रिकवरी क्षमता में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल रिकवरी ₹86,971 करोड़ रही। वहीं स्लिपेज रेशियो घटकर 0.7 फीसदी पर आ गया।
इसका मतलब है कि नए खराब लोन कम बने और पुराने फंसे लोन की रिकवरी बेहतर हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि IBC, SARFAESI और सख्त लोन मॉनिटरिंग का इसमें बड़ा योगदान रहा है।
सरकारी बैंकों की छवि कैसे बदली?
कुछ साल पहले तक सरकारी बैंक बढ़ते NPA, घाटे और कमजोर पूंजी स्थिति की वजह से आलोचना झेल रहे थे। लेकिन अब तस्वीर काफी बदल चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में बैंक मर्जर, रिकैपिटलाइजेशन, टेक्नोलॉजी अपग्रेड, डिजिटल बैंकिंग और सख्त लोन नीतियों ने सरकारी बैंकों को काफी मजबूत किया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह प्रदर्शन?
सरकारी बैंक भारत की अर्थव्यवस्था में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME, कृषि, छोटे व्यापार और रिटेल लोन का बड़ा हिस्सा सरकारी बैंक ही फाइनेंस करते हैं। ऐसे में PSBs की मजबूत स्थिति का मतलब है कि ज्यादा क्रेडिट ग्रोथ होगी, निवेश में तेजी आएगी, रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकारी बैंक इसी तरह मजबूत बने रहते हैं, तो वे भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को और मजबूती दे सकते हैं।
आगे क्या रहेगी सबसे बड़ी चुनौती?
हालांकि प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन विशेषज्ञ कुछ जोखिमों की तरफ भी इशारा कर रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों में बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल जैसे कारक बैंकिंग सेक्टर को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद फिलहाल सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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