पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की महंगाई और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने एक नई बहस शुरू कर दी है। पीएम मोदी ने देशवासियों से गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने, विदेशी पर्यटन पर खर्च कम करने और देश की विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। पहली नजर में यह अपील सामान्य लग सकती है, लेकिन इसके पीछे भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़ी बड़ी चिंता छिपी हुई है।
ईरान-इजरायल युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा खर्च करके आयात करता है। ऐसे माहौल में विदेश घूमने पर होने वाला भारी डॉलर खर्च भी सरकार की चिंता बढ़ा रहा है।
आखिर विदेश यात्रा को लेकर क्यों चिंित है सरकार?

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, डॉलर मजबूत होता है और विदेशी मुद्रा बाहर जाती है, तो इसका सीधा दबाव रुपये की कीमत, विदेशी मुद्रा भंडार और देश के आयात बिल पर पड़ता है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनावश्यक विदेश यात्रा टालने, विदेशी पर्यटन खर्च कम करने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की है।
कोरोना के बाद विदेश घूमने वालों की संख्या में विस्फोट
भारत से विदेश घूमने जाने वालों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 1991 में केवल 19.40 लाख भारतीय विदेश घूमने गए थे, लेकिन 2019 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2.69 करोड़ हो गया। कोरोना महामारी के दौरान 2020 और 2021 में अंतरराष्ट्रीय यात्रा लगभग बंद हो गई थी। लेकिन जैसे ही दुनिया दोबारा खुली, भारतीय आउटबाउंड टूरिज्म ने रिकॉर्ड तोड़ दिए।
2022 और 2023 में रिकॉर्ड उछाल

Travel Agents Association of India (TAAI) के Northern Region के General Secretary और SA Southind Travels Pvt Ltd के MD अनुराग अग्रवाल के मुताबिक 2022 में इंटरनेशनल फ्लाइट्स पूरी तरह खुलने के बाद विदेश यात्रा में जबरदस्त तेजी आई। उन्होंने बताया कि उस समय एयरफेयर comparatively कम थे और कई देशों में होटल भी सस्ते मिल रहे थे। इसी वजह से 2022 में विदेशी पर्यटन करने वालों की संख्या में 152.62% की भारी वृद्धि हुई। वहीं 2023 में 2.78 करोड़ भारतीय विदेश घूमने गए, जिसने कोरोना से पहले के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार 2024 में यह आंकड़ा 3 करोड़ के पार पहुंच गया।
भारतीय विदेशी टूरिज्म पर कितना खर्च करते हैं?
यही वह आंकड़ा है जिसने सरकार की चिंता बढ़ाई है। ट्रैवल सेक्टर के जानकारों के मुताबिक Short-Haul destinations जैसे Thailand, Singapore, Vietnam और Dubai पर जाने वाले भारतीय पर्यटक एक ट्रिप में कानूनी रूप से करीब 1,000 से 5,000 डॉलर तक खर्च कर देते हैं। अगर कोई अमेरिका, कनाडा या यूरोप जैसे देशों की यात्रा करता है, तो एक ट्रिप का खर्च 5,000 डॉलर या उससे भी ज्यादा हो सकता है।
इसके अलावा shopping, luxury spending और forex purchases का खर्च अलग होता है। यानी अगर करोड़ों भारतीय हर साल विदेश यात्रा कर रहे हैं, तो भारत से अरबों डॉलर विदेशी मुद्रा के रूप में बाहर जा रहे हैं।
भारत का आउटबाउंड टूरिज्म कितना बड़ा हो चुका है?

Future Market Insights की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का आउटबाउंड टूरिज्म मार्केट 2026 तक 23.4 अरब डॉलर का हो सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2036 तक यह बाजार 68.8 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह लगभग 11.4% CAGR की दर से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती आय, आसान पासपोर्ट प्रक्रिया, सस्ती अंतरराष्ट्रीय उड़ानें और सोशल मीडिया influence ने विदेश यात्रा को तेजी से लोकप्रिय बनाया है।
अब सिर्फ अमीर नहीं, मिडिल क्लास भी जा रहा विदेश
एक समय था जब विदेश घूमना केवल अमीर वर्ग तक सीमित माना जाता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अनुराग अग्रवाल के मुताबिक Tier-2 और Tier-3 शहरों के लोग भी तेजी से विदेश यात्रा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मध्यम वर्ग की आय बढ़ने, travel financing और aspirational lifestyle की वजह से विदेश घूमना अब middle-class aspiration बन चुका है।
भारतीय सबसे ज्यादा कहां घूमने जा रहे हैं?

TAAI के अनुसार भारतीय पर्यटक फिलहाल Thailand, Singapore, Malaysia, Vietnam, UAE और Gulf देशों को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय पर्यटक Gulf region की यात्रा से थोड़ा बच रहे हैं। इसके बदले South East Asia destinations की मांग तेजी से बढ़ी है।
विदेश यात्रा से विदेशी मुद्रा पर कितना दबाव पड़ता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे देश के लिए यह केवल पर्यटन का मामला नहीं है, बल्कि Forex Management, Current Account Deficit और Currency Stability से जुड़ा मुद्दा भी है।
जब करोड़ों भारतीय विदेशों में डॉलर खर्च करते हैं और उसी समय तेल आयात बिल भी बढ़ता है, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ जाता है। यही वजह है कि सरकार घरेलू पर्यटन और foreign exchange conservation पर जोर दे रही है।
क्या आगे और बढ़ सकती है चिंता?
अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है, तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो सरकार भविष्य में विदेशी खर्च और luxury imports को लेकर और सख्त रुख अपना सकती है। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी की अपील को “preventive economic strategy” के तौर पर देखा जा रहा है।
Why It Matters
विदेश यात्रा पर होने वाला खर्च केवल व्यक्तिगत खर्च नहीं होता। जब करोड़ों लोग विदेशों में डॉलर खर्च करते हैं तो इसका असर देश की विदेशी मुद्रा स्थिति, रुपये की मजबूती और आयात क्षमता पर पड़ता है। ऐसे समय में जब भारत पहले से ही महंगे कच्चे तेल और ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, सरकार विदेशी मुद्रा के हर बड़े आउटफ्लो पर नजर बनाए हुए है।
भारत का Outbound Tourism Snapshot
| फैक्टर | आंकड़े |
|---|---|
| 1991 में विदेश घूमने वाले भारतीय | 19.40 लाख |
| 2019 | 2.69 करोड़ |
| 2023 | 2.78 करोड़ |
| 2024 | 3 करोड़+ |
| 2026 आउटबाउंड मार्केट अनुमान | $23.4 अरब |
| 2036 अनुमान | $68.8 अरब |
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