घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली देखने को मिली। पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार दूसरी अपील के बाद निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 650 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,650 के नीचे फिसल गया। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 2,000 अंक तक लुढ़क चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को कोरोना महामारी के बाद इस दशक का सबसे बड़ा संकट बताते हुए लोगों से ईंधन बचाने, विदेशी मुद्रा खर्च कम करने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की है। इससे बाजार में यह संदेश गया कि सरकार भी वैश्विक आर्थिक दबाव को लेकर सतर्क है।
शुरुआती कारोबार में बाजार का क्या रहा हाल?
सुबह 9:27 बजे बीएसई सेंसेक्स 654.22 अंक यानी 0.86% टूटकर 75,361.06 पर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE निफ्टी50 इंडेक्स 177.85 अंक यानी 0.75% गिरकर 23,638 पर पहुंच गया।
इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 1,312.91 अंक गिरा था और निफ्टी में 360.30 अंकों की कमजोरी आई थी। दो दिनों में सेंसेक्स की कुल गिरावट लगभग 2,000 अंक तक पहुंच गई है।
रुपया क्यों पहुंचा ऑल टाइम लो पर?
बाजार गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया।
मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2% टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव बढ़ा रही हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी सीधे विदेशी मुद्रा पर असर डालती है।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सबसे ज्यादा दबाव आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर में देखने को मिला।
गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में Infosys, Tech Mahindra, TCS, HCL Tech, Asian Paints, HDFC Bank, Bajaj Finserv और Titan शामिल रहे।
Infosys में करीब 2.57% की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
किन शेयरों में रही तेजी?
बाजार की बड़ी गिरावट के बावजूद कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
इनमें Reliance Industries, SBI, Trent, Tata Steel और UltraTech Cement जैसे शेयर शामिल रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेटल और ऊर्जा सेक्टर में अभी भी कुछ सपोर्ट देखने को मिल रहा है।
क्यों डरे हुए हैं निवेशक?
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय कई बड़े दबाव एक साथ बने हुए हैं।
इनमें पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल का $100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहना, डॉलर इंडेक्स की मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू महंगाई की आशंका शामिल हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ईंधन बचाने, विदेशी यात्रा कम करने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील को भी निवेशक वैश्विक आर्थिक संकट की गंभीरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
क्या आगे और गिर सकता है बाजार?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया संकट कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की बजाय क्वालिटी स्टॉक्स, मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों और चरणबद्ध निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
अगर बाजार में गिरावट और रुपये में कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है तो आयात महंगे हो सकते हैं, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशकों की संपत्ति पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कुछ हफ्ते भारतीय बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।
Also Read:


