हैदराबाद के रहने वाले डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम ने वह कर दिखाया, जिसे बहुत कम लोग करने की हिम्मत जुटा पाते हैं। पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद उन्होंने सफेद कोट उतारकर खेती को अपना करियर बना लिया। आज वह न सिर्फ सफल किसान हैं, बल्कि हजारों किसानों को आधुनिक खेती से जोड़कर करोड़ों का कारोबार भी खड़ा कर चुके हैं।
उनकी संस्था ‘डेक्कन एक्जॉटिक्स’ आज देश के सबसे चर्चित Farmer Producer Organizations यानी FPO में शामिल हो चुकी है।
डॉक्टर से किसान बनने का फैसला

डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने तेलंगाना के ममता मेडिकल कॉलेज से MBBS और MD की पढ़ाई की थी। डॉक्टरी पेशे में सफलता मिलने के बावजूद वह शहरों की भागदौड़, प्रदूषण और तनावभरी जिंदगी से परेशान हो चुके थे। ऐसे में उन्होंने प्रकृति के करीब लौटने का फैसला किया।
इसी सोच के साथ उन्होंने तेलंगाना के संगारेड्डी इलाके में करीब 20 एकड़ जमीन खरीदी। शुरुआत में उनका मकसद सिर्फ अपने परिवार के लिए ऑर्गेनिक फल और सब्जियां उगाना था, लेकिन धीरे-धीरे यही प्रयोग एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदल गया।
पहली खेती में मिली बड़ी असफलता
डॉ. माधवराम ने शुरुआत में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला किया। उन्होंने करीब 3,000 पौधे लगाए, लेकिन उनमें से लगभग 90 प्रतिशत पौधे खराब हो गए। यह उनके लिए बड़ा झटका था।
हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। इस असफलता ने उन्हें यह समझा दिया कि आधुनिक खेती में तकनीकी जानकारी, सही पौधे और वैज्ञानिक तरीके बेहद जरूरी होते हैं। यहीं से उन्होंने रिसर्च की राह पकड़ी।
कई देशों में जाकर सीखी आधुनिक खेती

अपनी गलतियों से सीखते हुए डॉ. माधवराम ने भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान यानी IIHR से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने दुनिया के कई देशों की यात्रा शुरू की। उन्होंने वियतनाम, थाईलैंड, इजरायल और ताइवान जैसे देशों में जाकर आधुनिक खेती और विदेशी फलों की तकनीकों का अध्ययन किया। ड्रैगन फ्रूट उत्पादन में वियतनाम दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है, इसलिए वहां की खेती प्रणाली को उन्होंने करीब से समझा।
भारत में लाए विदेशी किस्मों के पौधे
साल 2018 में डॉ. माधवराम ने National Bureau of Plant Genetic Resources यानी NBPGR के साथ मिलकर दुनिया भर से ड्रैगन फ्रूट की 36 उच्च उत्पादक किस्मों को कानूनी तरीके से भारत में आयात किया। इन पौधों की मदद से उन्होंने अपनी खेती को नई दिशा दी।
धीरे-धीरे उनकी फसल सफल होने लगी और आसपास के किसान उनसे सलाह लेने पहुंचने लगे।
ऐसे शुरू हुआ ‘Deccan Exotics’

जब दूसरे किसानों ने उनकी खेती का मॉडल देखा तो डॉ. माधवराम ने इसे बड़े स्तर पर ले जाने का फैसला किया। साल 2019 में उन्होंने ‘Deccan Exotics’ को एक Farmer Producer Organization यानी FPO के रूप में रजिस्टर कराया।
यह संस्था किसानों को विदेशी फल पौधे, तकनीकी प्रशिक्षण, मिट्टी परीक्षण, सिंचाई सलाह और मार्केटिंग सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
23 राज्यों में फैला नेटवर्क
आज डेक्कन एक्जॉटिक्स देश के 23 राज्यों में काम कर रहा है। इससे 3,700 से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। संस्था किसानों को सिर्फ खेती सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बाजार तक पहुंचाने में भी मदद करती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यही वजह है कि यह मॉडल तेजी से सफल हुआ।
करोड़ों का कारोबार

डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम का यह प्रयोग अब करोड़ों के कारोबार में बदल चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में Deccan Exotics और उसके संयुक्त उद्यम IG Deccan ने मिलकर करीब 3.39 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया। अब उनका फोकस केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है।
वे कोल्ड-प्रेस्ड एवोकैडो ऑयल और अन्य वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
डॉ. माधवराम का कहना है कि भारत के किसान अगर वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो विदेशी फलों के बाजार में दुनिया से मुकाबला कर सकते हैं। उनका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और भारतीय बागवानी को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है।
मिल चुका है सम्मान
खेती और बागवानी क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम को ‘Indian Academy of Horticultural Sciences’ द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो खेती को सिर्फ पारंपरिक पेशा मानते हैं। आज आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और सही मार्केटिंग के जरिए खेती भी करोड़ों का सफल बिजनेस बन सकती है।
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