पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे दिन देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक लोगों को सोना खरीदने से बचना चाहिए। प्रधानमंत्री की इस अपील का असर अब सीधे सर्राफा बाजार में दिखाई देने लगा है।
सोमवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड प्राइस दबाव में नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट, महंगा कच्चा तेल, मजबूत डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों की रणनीति बदल दी है।
पीएम मोदी ने सोना न खरीदने की अपील क्यों की?
सोने की आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है।
इसलिए, मैं आप सभी से, देशवासियों से आग्रह करूंगा कि जब तक हालात सामान्य न हो, हम सोने की खरीद को टालें।
– पीएम @narendramodi pic.twitter.com/cPvljPlDjq
— BJP (@BJP4India) May 11, 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। इसके लिए देश को भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है, तब विदेशी मुद्रा बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गैर-जरूरी सोने की खरीदारी फिलहाल टालें, स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और देश के उद्यमियों को मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि संकट के समय में देशहित सबसे ऊपर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के बाद पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को इस दशक के सबसे बड़े वैश्विक संकटों में से एक बताया।
सर्राफा बाजार में कितना गिरा सोना?
प्रधानमंत्री की अपील और वैश्विक दबाव के बीच सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 600 रुपये टूटकर 1,55,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में यही सोना 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों में फिलहाल अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसकी वजह से बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी सोना दबाव में दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 4,661.68 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बाजार में महंगाई की चिंता बढ़ा दी है।
सोने की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज और एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार, गोल्ड मार्केट पर कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर पड़ रहा है। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया खारिज होने और पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ गया है।
इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा, ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका और डॉलर की मजबूती जैसे कारक सामने आए हैं।
ब्याज दरों का गोल्ड पर क्या असर पड़ता है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तब सोने पर दबाव बढ़ जाता है। क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता, जबकि बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्प रिटर्न देते हैं।
ऐसे में निवेशक अक्सर सोने से पैसा निकालकर ब्याज वाले एसेट्स की ओर शिफ्ट होने लगते हैं। यही वजह है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त मौद्रिक नीति का असर गोल्ड मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है।
क्या आगे और गिर सकते हैं सोने के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बाजार फिलहाल पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक निवेशकों की रणनीति पर नजर बनाए हुए है।
अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ता है तो सोना फिर सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत हो सकता है। वहीं अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो गोल्ड पर दबाव बना रह सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है गोल्ड इंपोर्ट?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश में शादी-ब्याह, त्योहार, निवेश और पारंपरिक बचत के रूप में सोने की भारी मांग रहती है। लेकिन बड़ी मात्रा में गोल्ड इंपोर्ट होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। यही कारण है कि सरकार फिलहाल लोगों से गैर-जरूरी खरीद टालने की अपील कर रही है।
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