देश में दिहाड़ी मजदूरों के बीच आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ा वर्ग दिहाड़ी मजदूरों का रहा। कुल आत्महत्या मामलों में इनकी हिस्सेदारी 31 फीसदी दर्ज की गई, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक असुरक्षा, कम आय, पारिवारिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं इस संकट के पीछे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
कितने दिहाड़ी मजदूरों ने की आत्महत्या?
NCRB रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में कुल 52,910 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। साल 2022 में आत्महत्या करने वालों में दिहाड़ी मजदूरों की हिस्सेदारी 26.4 फीसदी थी, जबकि अब यह बढ़कर 31 फीसदी तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, अस्थिर रोजगार और कम आय ने इस वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है।
देश में कुल आत्महत्या के मामले कितने बढ़े?
रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल आत्महत्या मामलों की संख्या बढ़कर करीब 1.7 लाख तक पहुंच गई है। साल 2015 में यह आंकड़ा लगभग 1.34 लाख था। यानी पिछले एक दशक में आत्महत्या के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
कम आय वाले लोगों पर सबसे ज्यादा असर
NCRB रिपोर्ट में बताया गया है कि आत्महत्या करने वाले लगभग 62.9 फीसदी लोगों की सालाना आय 1 लाख रुपये से कम थी। इसका मतलब है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार की अनिश्चितता, कर्ज का दबाव और सामाजिक तनाव मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं।
किन वर्गों में सबसे ज्यादा मामले?
पिछले एक दशक में दिहाड़ी मजदूर, गृहिणियां और स्वरोजगार से जुड़े लोग आत्महत्या करने वालों के सबसे बड़े वर्ग रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गृहिणियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की हिस्सेदारी में कुछ गिरावट दर्ज की गई है।
खेती से जुड़े मामलों में क्या बदलाव आया?
रिपोर्ट के मुताबिक खेती और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की आत्महत्या की हिस्सेदारी में कमी आई है। साल 2016 में यह आंकड़ा 8.7 फीसदी था, जो 2024 में घटकर 6.2 फीसदी रह गया। NCRB ने खेती से जुड़े आत्महत्या आंकड़ों को पहली बार 2016 में अलग श्रेणी में शामिल किया था।
किन राज्यों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक?
दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्या के मामलों में तमिलनाडु सबसे ऊपर रहा। तमिलनाडु में 10,556 मौतें दर्ज की गईं। महाराष्ट्र में 6,811, तेलंगाना में 5,745, मध्य प्रदेश में 5,299 और छत्तीसगढ़ में 3,413 मौतें दर्ज की गईं। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली 343 मामलों के साथ सबसे आगे रही।
आत्महत्या के मुख्य कारण क्या रहे?
NCRB रिपोर्ट के अनुसार पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण रहीं। करीब 35 फीसदी मामलों में family-related issues सामने आए। इसके बाद बीमारी, आर्थिक दबाव और सामाजिक तनाव बड़े कारणों के रूप में दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक बीमारी से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी 17.9 फीसदी रही।
सबसे ज्यादा किस तरीके से हुई मौतें?
रिपोर्ट के अनुसार 62.3 फीसदी मामलों में फांसी लगाकर आत्महत्या की गई। इसके अलावा 24.5 फीसदी मामलों में जहर सेवन, 4.4 फीसदी मामलों में डूबने और 2.5 फीसदी मामलों में ट्रेन या वाहन के नीचे आने से मौत हुई।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक असुरक्षा, रोजगार की अनिश्चितता और सामाजिक दबाव मानसिक तनाव को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य सहायता, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में mental health awareness अभी भी सीमित है। कई लोग आर्थिक समस्याओं, सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव के बावजूद मदद नहीं ले पाते। ऐसे में counselling services और community support systems को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
FAQ
NCRB रिपोर्ट 2024 में क्या कहा गया?
देश में आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ा वर्ग दिहाड़ी मजदूरों का रहा।
कितने दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की?
करीब 52,910।
सबसे ज्यादा मामले किस राज्य में रहे?
तमिलनाडु में।
आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण क्या रहा?
पारिवारिक समस्याएं।
सबसे ज्यादा कौन सा तरीका इस्तेमाल हुआ?
फांसी।
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