भारत को लेकर दुनिया के बड़े देशों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिख रहा है। केंद्र सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के अधीन काम करने वाली एजेंसी इंवेस्ट इंडिया के अनुसार दुनिया के प्रमुख विकसित देश भारत के कई रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश की तैयारी कर रहे हैं।
इंवेस्ट इंडिया के अनुमान के मुताबिक 45 अरब डॉलर से अधिक के निवेश अवसर फिलहाल भारत में मौजूद हैं। एजेंसी के अनुसार इस निवेश को लेकर करीब 5000 निवेशकों से बातचीत चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन प्लस वन रणनीति, बढ़ती घरेलू मांग, मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं की वजह से भारत वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा निवेश की संभावना?
इंवेस्ट इंडिया के अनुसार विदेशी निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ESDM), ऊर्जा, फार्मा, इलेक्ट्रिक वाहन, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, केमिकल्स और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में है।
विशेषज्ञों के अनुसार ये सभी सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की औद्योगिक और निर्यात रणनीति के केंद्र में रह सकते हैं।
कौन-कौन से देश भारत में निवेश करना चाहते हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका, जर्मनी, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, यूएई, ताइवान, ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत में निवेश को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कंपनियां अब केवल भारत को बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी देखने लगी हैं।
पिछले वित्त वर्ष में कितना निवेश आया?
इंवेस्ट इंडिया के प्रयासों से वित्त वर्ष 2025-26 में 6.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया। इनमें सबसे ज्यादा 263.8 करोड़ डॉलर का निवेश गुजरात में हुआ।
वहीं महाराष्ट्र में 81 करोड़ डॉलर, मध्य प्रदेश में 82 करोड़ डॉलर, उत्तर प्रदेश में 23.2 करोड़ डॉलर, राजस्थान में 32.8 करोड़ डॉलर, तेलंगाना में 27.1 करोड़ डॉलर और हरियाणा में 17.6 करोड़ डॉलर का निवेश आया।
इसके अलावा दिल्ली, कर्नाटक, असम और सिक्किम जैसे राज्यों में भी निवेश दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े विदेशी निवेश से आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं।
बिहार में निवेश क्यों रहा बेहद कम?
रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार में पिछले वित्त वर्ष के दौरान केवल 20 लाख डॉलर का निवेश हुआ।
इंवेस्ट इंडिया की सीईओ निवरुति राय के अनुसार जिन राज्यों में मजबूत निवेश इकोसिस्टम मौजूद है, वहां निवेशक ज्यादा तेजी से आते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी का प्रयास बिहार जैसे राज्यों में भी निवेश बढ़ाने का है ताकि संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
निवेशक किन चीजों को सबसे ज्यादा देखते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी कंपनियां केवल भारत के बाजार में उत्पाद बेचने के लिए निवेश नहीं करतीं। वे चाहती हैं कि भारत में बनने वाले उत्पादों का निर्यात पूरी दुनिया में किया जा सके।
इसके लिए बंदरगाह, एयर कार्गो, सड़क नेटवर्क, बिजली आपूर्ति, सप्लाई चेन और स्थानीय उद्योग नेटवर्क जैसे कारक बेहद अहम माने जाते हैं।
यही वजह है कि जिन राज्यों में पहले से मजबूत औद्योगिक ढांचा मौजूद है, वहां निवेश तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को भी विदेशी निवेश बढ़ने की बड़ी वजह माना जा रहा है।
गुजरात क्यों बन रहा निवेशकों की पहली पसंद?
विशेषज्ञों के अनुसार गुजरात में पहले से केमिकल उद्योग, बंदरगाह सुविधा, औद्योगिक कॉरिडोर और निर्यात नेटवर्क मजबूत हैं।
इसी वजह से सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण जैसी परियोजनाएं वहां तेजी से आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई केमिकल पहले से गुजरात में आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे कंपनियों की लागत और सप्लाई चेन दोनों बेहतर रहती हैं।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भी क्यों आगे बढ़ रहे?
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने औद्योगिक नीति सुधार, निवेशक सम्मेलन, भूमि उपलब्धता और लॉजिस्टिक सुधार पर तेजी से काम किया है।
इसी का असर अब निवेश आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।
क्या भारत बन सकता है अगला वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब?
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया की कंपनियां अब चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहती हैं। ऐसे में भारत के पास बड़ा अवसर मौजूद है।
भारत के पक्ष में विशाल घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं, तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे कई बड़े फैक्टर हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को लंबे समय तक बड़े निवेश आकर्षित करने हैं, तो सभी राज्यों में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना होगा।
केवल निवेश नहीं, अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार 45 अरब डॉलर के संभावित निवेश अवसर केवल पूंजी निवेश का मामला नहीं हैं। इससे रोजगार, निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सप्लाई चेन विकास जैसे क्षेत्रों को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
अगर आने वाले वर्षों में ये निवेश जमीन पर उतरते हैं, तो भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है और देश वैश्विक औद्योगिक केंद्र के रूप में और मजबूत होकर उभर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर राज्यों में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार होता है, तो भारत अगले दशक में दुनिया के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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