केंद्र सरकार की जन सुरक्षा योजनाओं ने 11 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) और अटल पेंशन योजना (APY) देश के करोड़ों लोगों के लिए सस्ती सामाजिक सुरक्षा का बड़ा आधार बनकर उभरी हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने योजनाओं के 11 साल पूरे होने पर कहा कि इन योजनाओं के तहत अब तक 25,160 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम का भुगतान किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जन सुरक्षा योजनाओं ने देश में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभाई है।
सरकार के अनुसार इन योजनाओं का मकसद गरीब, निम्न आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों को बीमा और पेंशन सुरक्षा उपलब्ध कराना था, ताकि आर्थिक संकट की स्थिति में परिवारों को सहारा मिल सके।
कितने लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन?
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में 27 करोड़ से ज्यादा नामांकन हुए हैं, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में 58 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं, जबकि अटल पेंशन योजना (APY) में 9 करोड़ से ज्यादा पंजीकरण हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या दिखाती है कि कम प्रीमियम वाली सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की मांग तेजी से बढ़ी है।
किस योजना में कितना भुगतान हुआ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा भुगतान प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत हुआ है। इस योजना में अब तक 21,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम का निपटान किया गया है, जिससे 10.7 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला।
वहीं दुर्घटना बीमा योजना PMSBY के तहत करीब 3,660 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिससे 1.84 लाख परिवार लाभान्वित हुए। ग्रामीण क्षेत्रों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों में इन योजनाओं की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है क्योंकि कम प्रीमियम में सुरक्षा कवच मिल रहा है।
PMJJBY क्या है?
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 18 से 50 वर्ष की आयु के लोगों के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत किसी भी कारण से मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर मिलता है।
इसके लिए सालाना 436 रुपये का प्रीमियम देना होता है। यह योजना बैंकों और डाकघरों के माध्यम से संचालित की जाती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 तक 12.72 करोड़ महिला सदस्य और 8.09 करोड़ जनधन खाताधारक इस योजना से जुड़े थे।
PMSBY में क्या मिलता है?
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 18 से 70 वर्ष के लोगों के लिए उपलब्ध है। यह योजना दुर्घटना बीमा कवर देती है।
इसमें दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण विकलांगता पर 2 लाख रुपये का कवर मिलता है, जबकि आंशिक विकलांगता की स्थिति में 1 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।
इस योजना का सालाना प्रीमियम केवल 20 रुपये रखा गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 तक 27.45 करोड़ महिला सदस्य और 19.30 करोड़ जनधन खाताधारक इस योजना से जुड़े थे।
अटल पेंशन योजना क्यों खास है?
अटल पेंशन योजना खासतौर पर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिल सकती है।
पेंशन की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति कितनी रकम और कितने समय तक जमा करता है। यह योजना 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के गैर आयकरदाता बैंक खाताधारकों के लिए उपलब्ध है।
डिजिटल व्यवस्था से क्या बदला?
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था आने के बाद इन योजनाओं तक पहुंच आसान हुई है। अब ऑनलाइन नामांकन, डिजिटल क्लेम प्रोसेस और बैंक या डाकघर के कम चक्करों जैसी सुविधाओं से लोगों को तेजी से लाभ मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी इन योजनाओं की पहुंच बढ़ी है।
महिलाओं और गरीब वर्ग की बढ़ी भागीदारी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन योजनाओं में महिलाओं और जनधन खाताधारकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम प्रीमियम और आसान प्रक्रिया की वजह से निम्न आय वर्ग के लोग भी अब बीमा और पेंशन योजनाओं से जुड़ पा रहे हैं।
क्यों अहम मानी जा रही हैं ये योजनाएं?
भारत में लंबे समय तक बड़ी आबादी बीमा सुरक्षा, पेंशन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से बाहर रही थी। ऐसे में कम लागत वाली जन सुरक्षा योजनाओं ने करोड़ों परिवारों को पहली बार औपचारिक वित्तीय सुरक्षा से जोड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में छोटी आर्थिक मदद भी गरीब परिवारों के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सरकार इन योजनाओं का दायरा और बढ़ा सकती है। खासतौर पर असंगठित क्षेत्र, ग्रामीण आबादी, छोटे कामगार और महिला खाताधारकों पर ज्यादा फोकस किया जा सकता है।
सरकार भी वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को अगले दशक की बड़ी आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भारत की आर्थिक और वित्तीय रणनीति का और अहम हिस्सा बन सकती हैं।
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