भारत में बीयर पीने वालों के लिए आने वाले दिन महंगे हो सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब सिर्फ तेल या गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अब पेय पदार्थों की इंडस्ट्री तक पहुंच गया है। बीयर बनाने वाली कंपनियों ने राज्यों से कीमत बढ़ाने की अनुमति मांगनी शुरू कर दी है। वजह साफ है—कच्चे माल और खासकर पैकेजिंग की लागत में तेज उछाल।
क्यों बढ़ रही है बीयर की कीमत?
बीयर इंडस्ट्री के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती पैकेजिंग की है। भारत में लगभग 80% बीयर कांच की बोतलों में बेची जाती है, और यही लागत का सबसे बड़ा हिस्सा भी है। बीयर बनाने वालों के संगठन Brewers Association of India के अनुसार, एक बोतल की लागत ही कुल प्रोडक्ट का करीब 40% से 45% तक पहुंच चुकी है।
बीयर इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि कांच की बोतलों की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। गैस और ऊर्जा की लागत बढ़ने से कांच बनाने वाली फैक्ट्रियों पर सीधा असर पड़ा है, जिससे उत्पादन कम हो गया है और कीमतें ऊपर चली गई हैं।
इसी तरह एल्युमिनियम कैन की सप्लाई भी प्रभावित हुई है क्योंकि भारत में सीमित उत्पादन होने के कारण कंपनियां आयात पर निर्भर हैं। वैश्विक लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से यह विकल्प भी महंगा हो गया है।
पैकेजिंग की बढ़ती लागत ने बिगाड़ा पूरा गणित
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, बीयर की पैकिंग लागत में हाल ही में लगभग 20% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा है।
बीयर कंपनियों का कहना है कि वे पहले से ही तय रेट्स पर बिक्री कर रही हैं, लेकिन लागत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यदि राज्यों ने कीमतों में संशोधन की अनुमति नहीं दी, तो उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
शराब उद्योग की दूसरी कंपनियों ने भी उठाई मांग
सिर्फ बीयर निर्माता ही नहीं, बल्कि भारत के शराब उद्योग से जुड़ी बड़ी कंपनियों के संगठन Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies ने भी राज्य सरकारों से कीमतों में संशोधन की अनुमति देने की मांग की है।
इनका तर्क है कि वैश्विक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ गया है। इसका सीधा असर कांच और पैकेजिंग उद्योग पर पड़ा है, जो अल्कोहल सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
CIABC के अनुसार, अगर स्थिति ऐसे ही बनी रही तो आने वाले महीनों में शराब और बीयर दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
Middle-East तनाव और सप्लाई चेन का असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और शिपिंग कॉस्ट भी बढ़े हैं।
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में इसका असर कई सेक्टरों पर पड़ा है, जिनमें पैकेजिंग इंडस्ट्री भी शामिल है। बीयर कंपनियों का कहना है कि कांच और कैन की सप्लाई अब समय पर नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन शेड्यूल बिगड़ रहा है।
क्या बीयर महंगी हो जाएगी?
अभी तक राज्य सरकारों की ओर से कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन उद्योग जगत का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि सरकारें कीमत बढ़ाने की अनुमति देती हैं, तो आने वाले महीनों में बीयर की खुदरा कीमतों में इजाफा संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी सीधे उपभोक्ताओं पर असर डालेगी, खासकर गर्मियों के सीजन में जब बीयर की मांग अपने चरम पर होती है।
गर्मी और डिमांड का सीधा कनेक्शन
उत्तर भारत में जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, बीयर की खपत भी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी उपभोक्ता मांग को प्रभावित कर सकती है।
इंडस्ट्री के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ मांग बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ लागत भी लगातार ऊपर जा रही है।
आगे क्या?
अभी पूरा फोकस राज्य सरकारों के फैसलों पर है। यदि कीमतों में संशोधन की अनुमति मिलती है, तो कंपनियों को राहत मिल सकती है। लेकिन इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
बीयर इंडस्ट्री फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां वैश्विक संकट और घरेलू सप्लाई चेन दोनों मिलकर दबाव बना रहे हैं।
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