वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत का ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर लगातार मजबूती दिखा रहा है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट JLL India की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी–मार्च तिमाही में देश के टॉप 7 शहरों में ऑफिस स्पेस की मांग में ठोस बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत अब सिर्फ बैक-ऑफिस हब नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल कंपनियों के लिए एक स्ट्रैटेजिक इनोवेशन सेंटर बनता जा रहा है।
मजबूत डेटा: ग्रॉस और नेट लीजिंग दोनों में उछाल
रिपोर्ट के अनुसार:
- Gross leasing (कुल लीजिंग) 10% बढ़कर 21.5 मिलियन वर्ग फुट हो गई (पिछले साल: 19.5 मिलियन sq ft)
- Net absorption (नेट लीजिंग) 7% बढ़कर 13.7 मिलियन sq ft रही (पिछले साल: 12.8 मिलियन sq ft)
आसान भाषा में:
- Gross leasing = कुल डील्स (नई + प्री-कमिटमेंट)
- Net absorption = वास्तविक उपयोग में आया स्पेस
दोनों आंकड़ों का एक साथ बढ़ना यह संकेत देता है कि सिर्फ डील्स नहीं हो रहीं, बल्कि कंपनियां वास्तव में ऑफिस स्पेस का इस्तेमाल भी बढ़ा रही हैं।
ग्लोबल कंपनियों का भारत पर भरोसा क्यों बढ़ा?
Rahul Arora (JLL) के अनुसार, इस ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण है Global Capability Centres (GCCs) की तेजी से बढ़ती मांग।
- विदेशी कंपनियों की लीजिंग 43% बढ़कर 9.8 मिलियन sq ft पहुंची
- कुल लीजिंग में इनकी हिस्सेदारी 45.5% रही
मतलब साफ है—भारत अब:
- AI डेवलपमेंट
- डिजिटल इंजीनियरिंग
- प्रोडक्ट इनोवेशन
जैसे हाई-वैल्यू कामों का ग्लोबल हब बन रहा है, न कि सिर्फ सपोर्ट सेंटर।
किन शहरों में सबसे ज्यादा डिमांड?
देश के 7 बड़े शहरों—
Mumbai, Bengaluru, Delhi-NCR, Pune, Hyderabad, Chennai और Kolkata में यह ग्रोथ दर्ज की गई।
बेंगलुरु बना सबसे बड़ा स्टार
- Gross leasing: 25% बढ़कर 5.3 मिलियन sq ft
- Net leasing: 52% बढ़कर 4.9 मिलियन sq ft
यह दिखाता है कि Bengaluru अब सिर्फ IT हब नहीं, बल्कि ग्लोबल ऑपरेशन का “नर्व सेंटर” बनता जा रहा है।
घरेलू कंपनियों की भी मजबूत भागीदारी
विदेशी कंपनियों के साथ-साथ भारतीय कंपनियां भी पीछे नहीं रहीं:
- घरेलू फर्म्स ने 9.2 मिलियन sq ft स्पेस लीज किया
- इसमें 5% की सालाना बढ़ोतरी हुई
खास बात यह रही कि:
- Flex space operators का शेयर 57.8% रहा
यानी कोवर्किंग और फ्लेक्स ऑफिस का ट्रेंड अब मुख्यधारा बन चुका है।
Coworking और Flex Space का बढ़ता दबदबा
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑफिस स्पेस की मांग का पैटर्न बदल चुका है।
Arun Narayan के अनुसार:
“यह मांग अस्थायी नहीं है, बल्कि लंबे समय तक बनी रहेगी। ग्लोबल कंपनियां अब बेंगलुरु को अपने ऑपरेशन का केंद्र बना रही हैं।”
वहीं Manas Mehrotra का कहना है:
“फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस अब बिजनेस स्ट्रैटेजी का हिस्सा बन चुका है।”
इसका मतलब:
- कंपनियां long-term lease से flexible मॉडल की ओर जा रही हैं
- hybrid work culture इस ट्रेंड को और तेज कर रहा है
यह ग्रोथ क्यों है खास?
ग्लोबल स्तर पर:
- ब्याज दरें ऊंची हैं
- आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है
- कई देशों में ऑफिस डिमांड कमजोर है
लेकिन भारत में:
- युवा workforce
- तेजी से बढ़ती economy
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
इन सभी फैक्टर्स ने ऑफिस मार्केट को मजबूत बनाए रखा है।
आगे क्या?
रिपोर्ट और एक्सपर्ट्स की राय को देखें तो आने वाले समय में कुछ बड़े ट्रेंड्स दिख सकते हैं:
1. GCCs का और विस्तार
ग्लोबल कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर इनोवेशन हब बनाएंगी
2. Flex space का dominance
कोवर्किंग अब “optional” नहीं, बल्कि “core strategy” बनेगा
3. टियर-2 शहरों की एंट्री
भविष्य में इंदौर, अहमदाबाद जैसे शहर भी इस ग्रोथ में जुड़ सकते हैं
निष्कर्ष: भारत का ऑफिस मार्केट ग्लोबल रडार पर
JLL India की यह रिपोर्ट साफ दिखाती है कि भारत का ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर सिर्फ स्थिर नहीं, बल्कि तेजी से विकसित हो रहा है।
जहां दुनिया के कई बाजार धीमे पड़ रहे हैं, वहीं भारत:
- ग्लोबल कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है
- टेक और इनोवेशन का हब बन रहा है
- और रियल एस्टेट सेक्टर में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है
अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत का ऑफिस मार्केट एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे मजबूत बाजारों में शामिल हो सकता है।
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