भारत में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की मांग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है, लेकिन रविवार को इसमें हल्की नरमी देखने को मिली। Ministry of Power India के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश की पीक पावर डिमांड 238.15 गीगावॉट दर्ज की गई, जबकि अधिकतम सप्लाई 237.21 गीगावॉट रही। इस तरह कुल मिलाकर 0.93 गीगावॉट का मामूली शॉर्टफॉल सामने आया, जो यह दिखाता है कि सिस्टम फिलहाल संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
रविवार को मांग में आई यह गिरावट असल में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं, बल्कि साप्ताहिक पैटर्न का हिस्सा है। वीकेंड होने के कारण ज्यादातर औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे बिजली की खपत अपने आप कम हो गई। इसके उलट, एक दिन पहले यानी शनिवार को देश ने 256 गीगावॉट की रिकॉर्ड पीक डिमांड दर्ज की थी, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले का उच्चतम स्तर 252.07 गीगावॉट था, जो उसी सप्ताह दर्ज किया गया था।
अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को देखें, तो एक साफ ट्रेंड सामने आता है—हर साल गर्मियों में बिजली की मांग नया रिकॉर्ड बना रही है। 2025 की गर्मियों में अधिकतम मांग 242.77 गीगावॉट तक पहुंची थी, जबकि 2024 में यह 250 गीगावॉट रही थी। 2023 में यह आंकड़ा 243.27 गीगावॉट था। यह लगातार बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि देश की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बदल रही हैं और उनका स्तर लगातार ऊपर जा रहा है।
इस साल मांग और बढ़ने की संभावना इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि India Meteorological Department ने पहले ही कड़ी गर्मी का अनुमान जताया है। तापमान बढ़ने के साथ ही एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ता है, जिसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई और जून के महीनों में जब हीटवेव अपने चरम पर होगी, तब पीक डिमांड और तेजी से ऊपर जा सकती है।
सरकार ने इस गर्मी के लिए करीब 270 गीगावॉट की पीक डिमांड का अनुमान लगाया है, और मौजूदा रुझानों को देखते हुए यह लक्ष्य अब काफी यथार्थवादी लगता है। अप्रैल के अंतिम हफ्तों में ही बिजली की मांग 240 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। उदाहरण के तौर पर, 22 अप्रैल को अधिकतम सप्लाई 239.70 गीगावॉट रही, जो अगले ही दिन 240.12 गीगावॉट तक पहुंच गई। महीने की शुरुआत में मांग अपेक्षाकृत कम थी और यह अप्रैल 2025 के 235.32 गीगावॉट के स्तर से नीचे रही, लेकिन जैसे-जैसे तापमान बढ़ा, मांग ने तेजी पकड़ ली।
यह बढ़ती खपत केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे संरचनात्मक कारण भी हैं। देश में आय स्तर बढ़ने के साथ अब अधिक घरों में एयर कंडीशनर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग हो रहा है। शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, जिससे शहरों में बिजली की मांग लगातार ऊपर जा रही है। इसके अलावा, औद्योगिक गतिविधियों और डेटा सेंटर जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों के विस्तार ने भी कुल खपत को बढ़ाया है।
हालांकि फिलहाल सप्लाई लगभग मांग के बराबर बनी हुई है, लेकिन यह संतुलन नाजुक है। अगर तापमान में अचानक उछाल आता है या हीटवेव लंबे समय तक रहती है, तो पावर शॉर्टफॉल बढ़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए सरकार और पावर कंपनियां पहले से तैयारी में जुटी हैं, जिसमें कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करना, पावर प्लांट्स की क्षमता को ऑप्टिमाइज़ करना और ग्रिड मैनेजमेंट को मजबूत बनाना शामिल है।
कुल मिलाकर, रविवार की हल्की गिरावट के बावजूद तस्वीर साफ है—भारत की बिजली मांग एक नए उच्च स्तर की ओर बढ़ रही है। असली परीक्षा अभी बाकी है, और मई-जून के महीनों में यह तय होगा कि देश इस बढ़ती मांग को कितनी कुशलता से संभाल पाता है।
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