वॉशिंगटन डीसी में आयोजित Hudson Institute के “The New India Conference” में भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा देखने को मिली। इस कार्यक्रम में भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत Kenneth Juster ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर एक ऐसा बयान दिया जिसने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
Juster का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि खुद को एक “सभ्यतागत शक्ति (Civilisational Power)” के रूप में देख रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक व्यवस्था में अधिक निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका निभाना है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक सप्लाई चेन दबाव जैसी कई चुनौतियों से गुजर रही है।
भारत की विदेश नीति में आया बड़ा बदलाव
Kenneth Juster ने अपने संबोधन में कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट और संरचनात्मक बदलाव देखा गया है। उनके अनुसार, यह बदलाव केवल कूटनीतिक शैली का नहीं बल्कि सोच और दृष्टिकोण का भी है।
उन्होंने बताया कि पहले भारत की विदेश नीति अधिक रिएक्टिव (reactive) थी, यानी परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने वाली। लेकिन अब यह प्रो-एक्टिव (proactive) हो गई है, जिसमें भारत खुद वैश्विक एजेंडा को आकार देने की कोशिश करता है।
मोदी सरकार के तहत भारत का फोकस केवल क्षेत्रीय स्थिरता पर नहीं, बल्कि वैश्विक प्रभाव बढ़ाने पर भी केंद्रित हो गया है।
“सभ्यतागत शक्ति” की अवधारणा क्या दर्शाती है?
Juster के अनुसार, भारत का खुद को “सभ्यतागत शक्ति” के रूप में देखना एक गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है।
इस विचार के पीछे यह समझ है कि भारत:
- केवल एक आधुनिक राष्ट्र नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की निरंतर सभ्यता है
- वैश्विक संस्कृति, दर्शन और ज्ञान परंपरा में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है
- आज वह उसी विरासत को आधुनिक वैश्विक व्यवस्था में आगे बढ़ाना चाहता है
यह दृष्टिकोण भारत को अन्य देशों से अलग पहचान देता है, क्योंकि यह सिर्फ आर्थिक ताकत नहीं बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक शक्ति को भी केंद्र में रखता है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। Kenneth Juster ने खासतौर पर G20 और G7 जैसे मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया।
2023 में भारत की G20 अध्यक्षता को उन्होंने एक “turning point” बताया, जहां भारत ने न केवल आयोजन किया बल्कि वैश्विक एजेंडा को भी प्रभावित किया।
भारत ने इस दौरान विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया और “Global South” की आवाज बनने की कोशिश की।
भारत और Global South का संबंध
आज भारत खुद को विकासशील देशों के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इसे ही Global South की भूमिका कहा जाता है।
इस भूमिका में भारत:
- विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों को वैश्विक मंच पर उठाता है
- जलवायु परिवर्तन और विकास असमानता जैसे मुद्दों पर जोर देता है
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की मांग करता है
इससे भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में उभर रही है जो केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक संतुलन की बात करता है।
अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा में भारत की रणनीतिक स्थिति
Juster ने यह भी कहा कि आज की दुनिया अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से प्रभावित है। इस स्थिति में भारत एक संतुलित रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है।
भारत की नीति का मुख्य आधार “strategic autonomy” यानी रणनीतिक स्वतंत्रता है।
इसका मतलब है कि भारत:
- किसी एक शक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहता
- सभी प्रमुख देशों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है
- अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेना चाहता है
यह नीति भारत को वैश्विक शक्ति संतुलन में एक स्वतंत्र खिलाड़ी बनाती है।
भारत का 2047 विजन: विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य
पूर्व अमेरिकी राजदूत ने भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य 2047 का भी उल्लेख किया, जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा।
इस लक्ष्य के तहत भारत का उद्देश्य है:
- एक विकसित अर्थव्यवस्था बनना
- तकनीकी और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर होना
- वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनना
यह विजन भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
आर्थिक और कूटनीतिक बदलाव साथ-साथ
भारत की विदेश नीति केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक बदलावों से भी जुड़ी हुई है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI सिस्टम, और बढ़ता विदेशी निवेश भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।
आज भारत:
- वैश्विक डिजिटल भुगतान में अग्रणी देशों में शामिल है
- विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है
- टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है
निष्कर्ष: बदलता भारत और नई वैश्विक पहचान
Kenneth Juster का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत आज एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
भारत अब:
- केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं
- बल्कि एक “सभ्यतागत शक्ति” के रूप में पहचाना जा रहा है
- और वैश्विक नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति अधिक आत्मविश्वासी, रणनीतिक और वैश्विक दृष्टिकोण वाली बन गई है।
आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने की संभावना है, खासकर जब दुनिया नई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है।
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