उत्तर प्रदेश के Kanpur के किदवई नगर इलाके से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। एक पिता द्वारा अपनी ही दो बेटियों की निर्मम हत्या ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि समाज और परिवार की बुनियादी संवेदनाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोपी शशिरंजन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और शुरुआती पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है। लेकिन इस केस का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह है कि उसने जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया और उसके पीछे जो वजह बताई—वह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं लगती।
डेढ़ घंटे में दो हत्याएं: एक जैसी बर्बरता
पुलिस जांच के अनुसार, यह कोई अचानक गुस्से में उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि बेहद सुनियोजित और ठंडे दिमाग से अंजाम दी गई वारदात थी।
- रात करीब 1:50 बजे, आरोपी ने अपनी बड़ी बेटी रिद्धि को सोते समय निशाना बनाया
- पहले उसका गला दबाया, फिर उसे बिस्तर से नीचे उतारकर धारदार हथियार और हथौड़े से वार किया
- इसके बाद वह कुछ देर के लिए वापस जाकर लेट गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो
- करीब 3:35 बजे, उसने दूसरी बेटी सिद्धि के साथ भी बिल्कुल वही क्रूर तरीका अपनाया
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस अधिकारियों को भी झकझोर दिया है, क्योंकि इसमें न सिर्फ हिंसा, बल्कि असामान्य मानसिक स्थिति के संकेत भी नजर आते हैं।
पहले से रची गई साजिश: 5 दिन पहले खरीदा हथियार
जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले कई दिनों से इस अपराध की योजना बना रहा था।
- उसने पांच दिन पहले मूलगंज इलाके से करीब ₹500 में एक चापड़ खरीदा
- हथियार को घर की अलमारी में छिपाकर रखा
- कई बार उसने बेटियों को मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार रुक गया
- आखिरकार, उसने अपने इरादे को अंजाम दे दिया
यह तथ्य इस मामले को और गंभीर बना देता है, क्योंकि यह अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि पूरी तरह से प्री-प्लान्ड मर्डर था।
घटना से पहले सब कुछ सामान्य
इस केस का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि घटना से पहले घर में सब कुछ सामान्य था।
आरोपी की पत्नी रेशमा के अनुसार:
- उस दिन शशिरंजन सामान्य से पहले घर आया
- पूरे परिवार ने साथ बैठकर खाना खाया
- किसी तरह का झगड़ा या तनाव नहीं था
- रात करीब 10 बजे दोनों बच्चियां अपने कमरे में सोने चली गईं
यानी बाहर से सब कुछ एक सामान्य परिवार जैसा ही दिख रहा था—जिसके अंदर इतना बड़ा तूफान पल रहा था।
‘डिप्रेशन’ और ‘भविष्य की चिंता’: आरोपी का तर्क
पूछताछ के दौरान आरोपी ने जो वजह बताई, वह उतनी ही चौंकाने वाली है जितनी अस्वीकार्य।
- उसने दावा किया कि वह डिप्रेशन से जूझ रहा था
- घर से कुछ दवाइयां और नशीले पदार्थ भी बरामद हुए
- उसने कहा कि उसे लगता था कि वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहेगा
- उसने पत्नी पर बेटियों की देखभाल न कर पाने का आरोप लगाया
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी में किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया।
उसका कहना था कि “मेरे बाद इन बच्चियों का क्या होगा”—इसी सोच के चलते उसने यह कदम उठाया।
कानूनी और सामाजिक सवाल
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि कई बड़े सवाल खड़े करता है:
- क्या मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी ऐसे खतरनाक रूप ले सकती है?
- क्या परिवार के भीतर छिपे तनाव को पहचानने में हम असफल हो रहे हैं?
- क्या समाज में मानसिक बीमारी को लेकर अभी भी जागरूकता की कमी है?
कानूनी रूप से देखें तो यह एक स्पष्ट हत्या (Murder) का मामला है, जिसमें पूर्व नियोजित साजिश भी शामिल है—जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान है।
निष्कर्ष
कानपुर की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक त्रासदी है। दो मासूम जिंदगियों का इस तरह खत्म हो जाना और वह भी अपने ही पिता के हाथों—यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
जहां एक ओर कानून अपना काम करेगा, वहीं यह घटना हमें मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और सामाजिक जागरूकता पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर करती है।
ऐसे मामलों में केवल सजा ही नहीं, बल्कि रोकथाम और समझ भी उतनी ही जरूरी है।
Also Read:


