भारत में हर साल मानसून सिर्फ मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था, खेती और आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा सबसे बड़ा फैक्टर होता है। ऐसे में इस बार मानसून को लेकर आई ताज़ा भविष्यवाणी चिंता बढ़ाने वाली है।
India Meteorological Department (IMD) ने 2026 के लिए अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी करते हुए कहा है कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश (Below Normal Monsoon) होने की संभावना है।
IMD का बड़ा अनुमान: 92% रहेगा मानसून
IMD के मुताबिक, 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कुल बारिश Long Period Average (LPA) का लगभग 92% रहने का अनुमान है।
यह आंकड़ा “below normal” कैटेगरी में आता है, क्योंकि:
- सामान्य मानसून: 96% – 104%
- कम मानसून: 90% – 95%
- कमजोर मानसून: 90% से नीचे
इसका मतलब साफ है कि इस साल बारिश औसत से कम रह सकती है, जो कई सेक्टर पर असर डाल सकती है।
क्या होता है LPA और क्यों जरूरी है समझना
LPA यानी Long Period Average, पिछले 50 सालों के औसत मानसून का आंकड़ा होता है, जो भारत में करीब 87 सेंटीमीटर माना जाता है।
जब IMD कहता है कि मानसून 92% रहेगा, तो इसका मतलब है:
- कुल बारिश औसत से कम होगी
- लेकिन बहुत ज्यादा सूखा जैसी स्थिति जरूरी नहीं
यानी स्थिति “चिंता वाली” है, लेकिन “आपदा जैसी” नहीं।
क्यों कमजोर हो सकता है इस बार मानसून?
इस बार मानसून कमजोर रहने के पीछे कई ग्लोबल क्लाइमेट फैक्टर्स जिम्मेदार बताए जा रहे हैं।
1. La Niña से Neutral की ओर बदलाव
इस समय प्रशांत महासागर में कमजोर La Niña जैसी स्थिति बनी हुई है, जो धीरे-धीरे neutral में बदल रही है।
आमतौर पर:
- La Niña → अच्छी बारिश
- El Niño → कम बारिश
लेकिन अभी की स्थिति ट्रांजिशन में है, जिससे अनिश्चितता बढ़ गई है।
2. Indian Ocean Dipole (IOD) का असर
IMD का कहना है कि मानसून के दूसरे हिस्से में Positive IOD बन सकता है।
यह थोड़ा मददगार हो सकता है, लेकिन:
- शुरुआती मानसून पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा
- इसलिए कुल मिलाकर बारिश कम ही रह सकती है
3. El Niño की आशंका
कुछ मॉडल यह भी संकेत दे रहे हैं कि मानसून के दौरान El Niño जैसी स्थिति विकसित हो सकती है, जो भारत के लिए आमतौर पर नकारात्मक होती है।
किस सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
1. खेती और किसानों पर असर
भारत की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है।
कम बारिश का असर:
- धान, दाल और तिलहन की पैदावार घट सकती है
- सिंचाई की लागत बढ़ सकती है
- किसानों की आय प्रभावित हो सकती है
2. महंगाई बढ़ने का खतरा
अगर फसल कम हुई तो:
- खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी
- खासकर सब्जियां, दाल और अनाज
यह सीधे आम आदमी के बजट पर असर डालेगा।
3. बिजली और पानी संकट
- हाइड्रो पावर प्रोडक्शन घट सकता है
- शहरों में पानी की कमी हो सकती है
- टैंकर और भूजल पर निर्भरता बढ़ेगी
सरकार और एजेंसियों की तैयारी
IMD ने साफ किया है कि यह सिर्फ पहला अनुमान है।
दूसरा अपडेट मई के आखिर में जारी किया जाएगा, जिसमें:
- क्षेत्रवार बारिश का अनुमान मिलेगा
- ज्यादा सटीक आंकड़े सामने आएंगे
सरकार आमतौर पर ऐसे हालात में:
- रिजर्व फूड स्टॉक बढ़ाती है
- किसानों को सपोर्ट देती है
- सिंचाई योजनाओं पर जोर देती है
क्या पूरा देश प्रभावित होगा?
जरूरी नहीं कि हर जगह कम बारिश हो।
भारत में मानसून का पैटर्न हमेशा uneven होता है:
- कुछ राज्यों में सामान्य या ज्यादा बारिश हो सकती है
- कुछ में सूखा जैसे हालात
इसलिए “below normal” का मतलब पूरे देश में सूखा नहीं है।
पिछले सालों का ट्रेंड क्या कहता है
पिछले कुछ सालों में:
- मानसून काफी unpredictable हुआ है
- कभी ज्यादा बारिश, कभी कम
- climate change का असर साफ दिख रहा है
इस साल भी वही trend जारी रहने की संभावना है।
आम लोगों के लिए क्या मतलब है?
अगर आप किसान नहीं भी हैं, तब भी इसका असर पड़ेगा:
- महंगाई बढ़ सकती है
- बिजली-पानी की दिक्कत हो सकती है
- फूड सप्लाई पर असर पड़ सकता है
आगे क्या देखें?
IMD मई के अंत में अपडेट देगा, जो ज्यादा अहम होगा।
फिलहाल ध्यान रखने वाली बातें:
- मानसून की शुरुआत (1 जून के आसपास)
- जून-जुलाई की बारिश
- El Niño/IOD की स्थिति
निष्कर्ष
2026 का मानसून भारत के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। IMD के मुताबिक बारिश औसत से कम रहने की संभावना है, जिससे खेती, महंगाई और पानी की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, यह अंतिम अनुमान नहीं है और आने वाले महीनों में स्थिति बदल भी सकती है। लेकिन अभी के संकेत बताते हैं कि सरकार और लोगों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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